Tuesday, June 22nd, 2021

Ambedkar’s poster controversy : आंबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर हुए विवाद में दलित युवक की मौत

Ambedkar’s poster controversy : राजस्थान के हनुमानगढ़ ज़िले में रावतसर तहसील के किकरालिया गांव में घर के बाहर लगाए गए डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के पोस्टर को फाड़ने के बाद हुए विवाद में 22 वर्षीय दलित युवक विनोद मेघवाल की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई.

घटना के समय मृतक विनोद के साथ मौजूद रहे उनके भाई मुकेश मेघवाल ने बीबीसी से फ़ोन पर बातचीत में बताया कि, “पांच जून की शाम को मैं और विनोद खेत पर जा रहे थे तभी एक गाड़ी हमारे पास रुकी और हम कुछ समझ पाते इतने में गाड़ी से निकले लोगों ने हम पर हॉकी स्टिक और लाठियों से हमला कर दिया.”

“विनोद के सिर पर कई बार लाठियां मारी गईं जिससे बहुत खून बहने लगा और वह बेसुध हो गया. मैं तुरंत वहां से भागा और परिजनों को सूचित किया.”

परिजन विनोद को गंभीर हालत में रावतसर अस्पताल ले गए जहां से हनुमानगढ़ और फिर श्रीगंगानगर के लिए रेफ़र किया गया. सात जून सुबह इलाज के दौरान श्रीगंगानगर अस्पताल में विनोद ने दम तोड़ दिया.

विनोद की मौत के बाद अस्पताल के सामने भीम आर्मी और मेघवाल समाज के लोगों ने धरना दिया और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की.

Ambedkar's poster controversy : आंबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर हुए विवाद में दलित युवक की मौत
Ambedkar’s poster controversy : आंबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर हुए विवाद में दलित युवक की मौत

Ambedkar’s poster controversy : क्या है मामला?

इस मामले में की गई पुलिस कार्रवाई पर रावतसर सर्किल ऑफ़िसर रणवीर सिंह मीणा ने कहा, “घर की दीवार पर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर के बैनर को फाड़ने और हमला करने के मामले में दर्ज एफ़आईआर में बताए चार आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया है. दो की तलाश जारी है.”

उन्होंने कहा, “शुरुआती जानकारी के मुताबिक़ यह विवाद सोशल मीडिया से बढ़ी रंजिश से शुरू हुआ. मृतक विनोद भीम आर्मी का सोशल मीडिया प्रभारी थे और सोशल मीडिया पर टिप्पणियों को लेकर युवकों का विवाद बढ़ गया था.”

स्थानीय पत्रकार पुरुषोत्तम उपाध्याय बताते हैं, “विनोद के परिजनों और आरोपियों के रिश्तेदारों के बीच कई साल से एक रास्ते को लेकर विवाद है. उस रास्ते पर कोर्ट ने स्टे लगाया हुआ है. पहले भी दो बार यह झगड़े हुए हैं.”

रास्ते के विवाद को लेकर मृतक विनोद के भाई मुकेश का कहना है कि, “रास्ते का विवाद से इस हमले का कोई सम्बन्ध नहीं है. वह अन्य परिवार के बीच का मसला है.”

पत्रकार पुरुषोत्तम बताते हैं, “यह विवाद इतना नहीं बढ़ता लेकिन पुलिस-प्रशासन का ढीला रवैया रहने के कारण बात यहां तक पहुंच गई.”

Ambedkar's poster controversy : आंबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर हुए विवाद में दलित युवक की मौत
Ambedkar’s poster controversy : आंबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर हुए विवाद में दलित युवक की मौत

कब पोस्टर फाड़ा गया

एफ़आईआर के मुताबिक़ 14 अप्रैल 2021 को गांव में विनोद ने आंबेडकर जयंती के उत्सव मनाया. इसके बाद बधाई संदेश का पोस्टर घर की दीवार पर लगाया था.

एफआईआर में बताया कि 24 मई को गांव के ही कुछ युवक इस पोस्टर को फाड़कर ले गए. पोस्टर फाड़ने वाले युवकों का विनोद ने पता लगाया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया.

विवाद शांत करने के लिए हुई पंचायत में दोनों पक्षों के बीच राज़ीनामा हो गया. लेकिन उसके बाद आरोपियों ने पांच जून को विनोद पर हमला कर दिया.

22 वर्षीय विनोद की दो साल पहले शादी हुई थी. उनके बड़े भाई और दो बहनों की भी शादियां हो चुकी हैं. उनके माता-पिता खेती करते हैं. विनोद छह बीघा ज़मीन बटाई पर लेकर खेती कर रहे थे.

उनके भाई मुकेश मेघवाल ने बताया कि विनोद भीम आर्मी रावतसर के सोशल मीडिया प्रभारी भी थे.

मुआवज़े की मांग

मृतक विनोद मेघवाल के परिजन और भीम आर्मी एफ़आईआर में दर्ज सभी आरोपियों की गिरफ़्तारी के साथ-साथ परिवार को 25 लाख रुपए मुआवज़ा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, खेत में जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता,

डिप्टी एसपी रणवीर सिंह मीणा की बर्खास्तग़ीने और परिवार को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग कर रही है.

स्थानीय पत्रकार पुरुषोत्तम उपाध्याय ने बताया है कि इनमें से कई मांगों पर सहमति बन गई है.

उन्होंने बताया कि, “10.39 लाख रुपये मुआवज़ा, एफआईआर में दर्ज सभी की गिरफ्तारी, सरकारी नौकरी के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने, खेत में जाने के लिए वैकल्पिक रास्ता और परिजनों की सुरक्षा के लिए घर के बाहर पुलिसकर्मी की तैनाती करने पर प्रशासन के साथ सहमति बन गई है.”

भीम आर्मी के हनुमानगढ़ ज़िला अध्यक्ष कुलदीप अंबेडकर ने बीबीसी से कहा, “विनोद रावतसर से भीम आर्मी के सोशल मीडिया प्रभारी थे. प्रशासन के साथ मागों पर बनी सहमति से परिजन संतुष्ट हैं, इसलिए भीम आर्मी भी संतुष्ट है.”

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