Thursday, December 9th, 2021

संपादकीय : अनिल देशमुख मामले में पहले ही न्यायसंगत रास्ते की जरूरत थी

अंततः महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने आज इस्तीफा दे दिया । चलो देर आयद दुरुस्त आयद कहावत चरितार्थ हो गई पर अगर यही इस्तीफा न्यायालय के आदेश के पहले हो जाता तो अनिल देशमुख की आन बान शान बनी रहती । और छाती तानकर कह सकते थे लो चलो जांच करो हम तैयार हैं । पर वैसी ताकत और साहस की कमी केवल अनिल देशमुख में ही नही  बल्कि पूरी उद्धव सरकार और महा गठबंधन में भी नही थी ।जब शरद पवार जैसे सुलझे हुए राजनेता ने देशमुख को क्लीन  चिट दे दिए फिर देशमुख की छाती तो फूलनी ही फूलनी  थी । शरद पवार ऐसा क्यों किये वे ही समझे लेकिन पहली नजर में ही परमबीर का देशमुख पर आरोप खारिज करने योग्य नहीं था । जब परमबीर ने 100 करोड़ वसूली के आरोप लगाए और अनैतिक तबादले को लेकर उंगली उठाये तभी देशमुख को इस्तीफा देकर कहना था लो मेरी जांच करो ,मेरी गलती नही तब मैं डरता भी नही हूं । लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ अलबत्ता परमबीर को गलत ठहराने की पुरजोर कोशिशअंतिम तक चलती रही । पर परमबीर भी इस पाप में उतना ही सहभागी है जितना कि देशमुख । एक पाप करवाने वाला है और एक पाप करने वाला है । परमबीर इस एपिसोड में अंत में राज खोलकर निर्दोष नही हो सकता । पर देरसबेर उसने न्यायिक व्यवस्था में कदम रखकर अपना दोष कुबुलकर शिथिल जरूर कर लिया है । मुंबई उच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान परमबीर को फटकार लगाकर कहा भी कि जब बॉस गलती करवा रहा था तब आप चुप क्यों बैठे थे ? बहरहाल अब मामला सीबीआई के पास है और कोर्ट के आदेशानुसार 15 दिनों में जांच की प्राथमिकी रिपोर्ट भी सामने आ जाएगी । जांच में सारा सच सामने आ जायेगा । हम तो यही कह सकते हैं धुआं तो वहीं उठता है जहां आग होती है । अब न्यायालय जो फैसला दे वह शिरोधार्य ।

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