Tuesday, June 22nd, 2021

Editorial : – आत्मनिर्भर भारत और विदेशी सहायता, कोरोना ने तोड़ा सारा अभिमान

Atmanirbhar Bharat : रायपुर,न्यूज हसल इंडिया NHI,

अभी तक हम बड़े जोर शोर से आत्मनिर्भर भारत का राग अलाप रहे थे लेकिन कोरोना ने हमारा यह अभिमान भी खत्म कर दिया है ।आज लोगों की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद ने हर स्वाभिमान को लाचार कर दिया है और विदेशी सहायता जहां जिस रूप से हमे मिल रही है स्वीकार कर रहें हैं । कोरोना का यह कालखंड मौतों के साथ बहुत सारी सीख भी हमें दे रहा है कि यही कि हम कभी भी परस्पर सहयोग के बिना जिंदा नहीं रह सकते । कोई भी पूर्ण आत्मनिर्भरता मनुष्य को उसके कब्र तक ले जा सकती है । घर परिवार में भी सब कुछ होते हुए हम दूसरे के सहयोग के बिना आगे नहीं बढ़ सकते । जब कभी भी अपने ऊपर विपत्तियां आती है तो पड़ोसी ही पहले पहुंचता है और हमें सम्बल देता है । उस वक्त न हमारा पैसा काम आता है न धन दौलत । आज यही स्थिति हमें अपने देश के साथ देखना पड़ रहा है । आखिर हम कहाँ कहाँ आत्मनिर्भर हो सकते हैं । हमें रोटी कपड़ा और मकान में आत्म निर्भर होने की जरूरत है । लीगों के पास रोजगार नहीं है इसलिए भूखे मर रहें हैं । रोजगार में आत्म निर्भरता आनी चाहिए । अपने देश की वस्तुएं इस्तेमाल करने की बात हम हमेशा करते हैं पर घर पूरा विदेशी आयातों से सुसज्जित है । गाँधीजी ने कहा था कि खुद का बनाया कपड़ा पहनों पर गांधी के चरखे पर जंग लग गया । लोग कोई खादी की तरफ नहीं जाना चाहता । खादी की पहचान नेताओं के कपड़े के रूप में हो गई है । जो खादी पहन लिए उनको लोग नेताजी बुलाने लग गए तो लोगों ने खादी पहननी ही छोड़ दी । आदमी अपना जीवन रोड पर तो नहीं गुजार सकता इसलिए कहीं न कहीं एक छोटा आशियाना होना भी जरूरी है ।

पर हमारे देश मे अभी भी करोड़ो लोगों के पास अपने खुद का आशियाना नहीं है । जब हम अपनी बुनियादी जरूरतों को ही पूरा नहीं कर पा रहें हैं फिर हरेक क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की कल्पना बेमानी है । पहले अपने देश को रोटी कपड़ा और मकान के लिए आत्म निर्भर कर लें फिर बाद में आगे का सोचेंगे । स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्म निर्भर होना तो कल्पना से बाहर ही लगता है । देखिए जितने भी नेता हैं या सत्तासीन राजनेता हैं हम गरीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल का रास्ता दिखाते हैं । कहते हैं सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में सब सुविधा है । पर जब उनके ऊपर आती है तो विदेशों में इलाज कराने चले जाते हैं । जब आप ही कहते हैँ कि सरकारी अस्पताल में सब सुविधा है । वह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है फिर इलाज कराने विदेश क्यों जा रहे हो भाई । आप अपने देश की चिकित्सा पद्धति को उपेक्षित क्यों कर रहे हो । विदेशों में जाने का मतलब है आप अपने देश की चिकित्सा पर भरोसा नही करते या फिर हमारे देश की चिकित्सा सेवाएं अपूर्ण है और विश्वसनीय नही है । अगर ऐसा है तब फिर जनता को झूठ का आईना क्यों दिखाना । जो है सो है । आपके पास पैसा है विदेश में कराओ हमारे पास नही है हम यहीं मरेंगे । आज कोरोना महामारी में कितनी सारी स्वास्थ्य सेवाओं की सामग्री की सहायता विदेशों से लेनी पड़ी रही है । आक्सीजन मांग रहें हैं, वेंटिलेटर मांग रहें हैं , रेमडिसिवर मांग रहें हैं , जीवन रक्षक प्रणाली और दवाएं मांग रहे हैं । आयरलैंड, वेल्जियम,रोमानिया, लगजमबर्ग,पुर्तगाल, स्वीडम, जर्मनी,ब्रिटेन कनाडा, रसिया, अमेरिका सबसे सहायता ली जा रही है । और वे लोग दिल खोलकर मदद के लिए सामने आ रहें हैं । जब भूखमरी होती है तो दाल चावल गेहूं अनाज की सहायता की जाती है । भूकंप आते हैं तो स्वास्थ्य आवास की सहायता की जाती है । कुल मिलाकर कहें तो अब हरेक क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बात बेमानी होगी । बड़े बड़े विकसित राष्ट्र भी आज कोरोना के सामने घुटने टेक दिए हैं । और उनको भी दूसरे देशों की मदद की जरूरत आ पड़ी है फिर भारत तो अभी उभरता हुआ राष्ट्र है । अभी तो बहुत लम्बा समय बाकी है । परस्पर सहयोग की भावना से ही विश्व में शांति रहेगी ।

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