Friday, July 30th, 2021

Baba ka Dhaba ग्राहकों की राह देखने को मजबूर, बंद होगया नया रेस्टोरेंट, Baba फिर लौटे पुराने टापरी वाले दुकान पर

बाबा का ढाबा (Baba Ka Dhaba) के मालिक कांता प्रसाद (Kanta Prasds Restaurant) और उनकी पत्नी बादामी देवी अपने पुराने ढाबे पर एक बार फिर ग्राहकों के की राह देखने को मजबूर हैं. चिलचिलाती धूप में वह अपने ढाबे पर ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं. कोरोना महामारी की वजह से उनका बिजनेस इन दिनों ठप पड़ा हुआ है. एक बार फिर से वह गरीबी का जीवन जीने के लिए मजबूर हैं.

कोरोना महामारी (Corona Pandemic)की वजह से फरवरी में उनका नया रेस्तरां बंद हो गया था. जिसकी वजह से एक बार फिर कांता प्रसाद और उनकी पत्नी को उनके पुराने ढाबे (Baba Back On Dhaba) पर वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा. एक तरफ अक्टूबर महीने में उनके ढाबे पर खूब ग्राहक पहुंच रहे थे, तो वहीं अब फिर से उनका बिजनेस ठप पड़ा है. फिर वह अपने ढाबे पर ग्राहकों की राह तकने को मजबूर हैं. वह फिर से गरीबी से जूझ रहे हैं.

‘बाबा का ढाबा’ पर ग्राहकों का इंतजार

दिल्ली के मालवीय नगर में सड़क किनारे बने बाबा का ढाबा पर इन दिनों मुश्किल से ही ग्राहक पहुंच रहे हैं, जिससे बाबा बहुत ही परेशान हैं. कुछ महीने पहले बाबा कांता प्रसाद ने सोशल मीडिया के जरिए अपना दुख जनता के सामने रखा था. जिसके बाद उन्हें देशभर से मदद देने वालों की लंबी लाइन लग गई थी. साथ ही उनके ढाबे पर काफी रौनक देखने को मिल रही थी. बाबा का ढाबा रातोंरात काफी मशहूर हो गया था.

एक यूट्यूबर ने उनका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया था, जिसमें बाबा रोते हुए अपना संघर्ष बता रहे थे. उनके इस वीडियो को देखकर न जाने कितने ही लोग रोने पर मजबूर हो गए थे. जिसके बाद लोग बाबा की मदद के लिए आगे आने लगे. वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया था. बााबा के ढाबा पर खाना खाने के साथ ही उनके साथ सेल्फी लेने का क्रेज भी लोगों में खूब देखा गया. साथ ही सोशल मीडिया पर बाबा की मदद के लिए उनके ढाबे से खाना खरीदने की अपील की गई थी.

‘1 हजार रुपये से नहीं चल रहा 8 लोगों का परिवार’

देखते ही देखते बाबा को इतनी आर्थिक मदद मिल गई कि उन्होंने छोटे से ढाबे को छोड़कर एक रेस्तरां खोल लिया साथ ही घर भी बनवा लिया था. बच्चों को स्मार्ट फोन दिलाने जैसी सारी सुविधाएं बाबा के पास थीं. अब फिर से उनका बिजनेस ठप हो गया है.

लॉकडाउन की वजह से एक बार फिर बाबा को गरीबी का सामना करना पड़ रहा है. उनका कहना है कि कोरोना की वजह से फुटपात पर लोग खाना नहीं खरीद रहे हैं. उनकी बिक्री 3500 रुपये से घटकर सिर्फ 1 हजार रुपये ही रह गई है. उनका आठ लोगों का परिवार है इतनी कमाई से घर नहीं चल पा रहा है. वह लगातार ग्राहकों की राह देख रहे हैं.

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