Friday, July 23rd, 2021

Bangal Election Result : ममता के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अभिमान नही अभिमन्यु की जरूरत थी , मोदी घुसे पर निकल नहीं पाए

Bangal Election Result : ममता के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अभिमान नही अभिमन्यु की जरूरत थी , मोदी घुसे पर निकल नहीं पाए

New Delhi, News NHI,

नईदिल्ली, न्यूज हसल इंडिया NHI, पांच राज्यों के विधान सभा चुनावों के परिणाम कल 2 मई को मतगणना के बाद घोषित हो गया । पश्चिम बंगाल,असम,केरल,तमिलनाडु और पुडुचेरी में ये चुनाव हुए थे लेकिन इसमें से पूरी दुनिया की निगाह  पश्चिम बंगाल पर थी।  ममता बैनर्जी ने यहां 213 सीट हासिल कर भाजपा को मात दे दिया है । पिछले दो साल से भाजपा ने पश्चिम बंगाल जितने का लक्ष्य साध कर लगातार बंगाल पर ध्यान केंद्रित कर काम कर रही थी । मध्यप्रदेश के सक्रिय राजनेता कैलाश विजय वर्गीय को बंगाल चुनाव स्पेशल प्रभारी बनाकर करीब 8-10 महीने से वहां बिठा रखे थे । फिर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी भी सीधे बंगाल जितने के लक्ष्य पर काम कर रहे थे । उन्होंने अपने दाहिने हाथ अमितशाह को पूरी रणनीति बनाने की जवाबदारी भी सौपीं थी और उन्होंने यह जवाबदारी बहुत बेहतर तरीक़े से निभाया भी। करीब तीन दर्जन सभाएं व रैलियां उन्होंने चुनाव के दो माह से ताबड़तोड़ की । प्रधानमन्त्री मोदी ने भी करीब दो दर्जन रैलियों और सभाओं को संबोधित किया । मोदी मन्त्री मंडल के करीब दर्जन भर मन्त्री और भाजपा के दो दर्जन सांसदों ने ,मुख्य मन्त्रियों ने अपनी पहुंच के भीतर अपने अपने स्तर पर बंगाल में प्रचार किया । भाजपा ने जितने के लिए मिशन 200 प्लस चलाया । इसके लिए बीजेपी ने सारी सारी ताकत उंडेल दी । अध्य्क्ष जे पी नड्डा सहित क़ई केंद्रीय दिग्गज क़ई क़ई दिनों बंगाल में जाकर बैठे रहे । सभाओं में दुनिया भर के वादे बंगाल के विकास के लिये गए । ममता बनर्जी को राज्य की बर्बादी करने वाली सीएम करार दिया गया । 2 मई दीदी गई के नारे दिए गए । पीएम तक ने दीदी ओ दीदी जैसे संबोधनों से सुशोभित किया । उसे धर्म विरोधी खासकर रामविरोधी प्रचारित किया गया । इन सारे प्रपंचों के बाद भी ममता का चक्रव्यूह नहीं तोड़ पाए । 200 प्लस का दावा करने वाली भाजपा 77 सीट पर आकर सिमट गई । अगर ममता के खिलाफ मोदीजी और अमित शाह इतने आक्रोशित नही हुए होते ,बार बार दीदी गई नही बोले होते ,बार बार राम और धर्म पर उंगलियां नही उठाये होते, मिशन 200 प्लस न चलाकर सिर्फ चुपचाप बिना भेदभाव मिहनत किये होते तो ममता की 213 सीट की जीत भी 77 सीट के सामने हार में बदल जाती । आज 3 से 77 सीट पाकर भी भाजपा गौरवांवित नही है यह बीजेपी के लिए कितनी बड़ी विडंबना है । राजनीतिक लड़ाई को कभी भी निजी प्रतिष्ठा की लड़ाई में तब्दील नहीं करनी चाहिए । लेकिन ऑंखों में पट्टी बांधकर इसे मोदीजी और अमित शाह की प्रतिष्ठा से जोड़ दिया गया । इसमें ममता का कुछ नही बिगड़ा बल्कि पिछली बार से उसको तीन सीटे ज्यादा मिल गई । हां यह जरूर है कि ममता को नन्दीग्राम से शुभेंदु अधिकारी बहुत कम दो हज़ार से भी कम  वोटों के अंतर से हराने में सफल हो गए । जीत के बाद भी शुभेंदु का सिर ऊंचा नही हो रहा है । और ममता अभी शुभेंदु की जीत को भी कोर्ट में चेलेंज करने वाली है । बहरहाल ममता बनर्जी तो जीत गई और भाजपा जीती हुई बाजी हार गई । लेकिन बंगाल चुनाव राजनीतिक दलों को सीख दे गया है कि ज्यादा उतावलापन या अभिमान , चुनाव में अपमानजनक  व्यक्तिगत आक्षेप, प्रत्याशी के प्रति निरादर या क्षेड़खानी के बोली ताकत को कमजोर कर देती है । पहले राहुल गांधी भी ऐसा ही करते रहे हमेशा प्रधानमन्त्री को चोर चोर कहकर  अपनी पार्टी को कंगाल बना डाले और इधर मोदी जी की ताकत बढ़ती चली गईं । दीदी गई दीदी गई ,दीदी ओ दीदी  कहकर दिग्गजों से वही गलतियां बंगाल में भाजपा से हुई  जिसका असर यह हुआ कि बंगाल की जनता ने ममता को ही उत्तम समझा । ममता के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए अभिमान नहीं अभिमन्यु की जरूरत थी ।

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