Wednesday, September 22nd, 2021

Breaking News : शादी के लिए धर्म परिवर्तन को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बताया गलत, कहा- जोधा अकबर से सीखना चाहिए एक दूसरे का सम्मान

Breaking News : शादी के लिए जबरन धर्म परिवर्तन को इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने गलत बताया है. कोर्ट ने ऐसी शादियों पर गहरी चिंता जाहिर की है जो सिर्फ धर्म परिवर्तन के लिए हो रही हैं. कोर्ट ने जोधा-अकबर का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग धर्मों के दो लोगों की शादियों में भी सम्मान होता है. यह हमें जोधा-अकबर से सीखना चाहिए. अकबर ने कभी भी जोधाबाई का धर्म परिवर्तन नहीं कराया. दोनों ने एक दूसरे के धर्म और पूजा पद्धति का सम्मान किया.

कोर्ट ने कहा कि इस तरह के गैरजरूरी धर्मांतरण से बचना चाहिए. इसके लिए जोधा-अकबर से सबक लेना चाहिए. दोनों की शादी में कभी भी धर्म आड़े नहीं आया. कोर्ट ने कहा कि जोधा-अकबर का रिश्ता दो धर्मों के लोगों को बीच शादी का एक सबसे बेहतरीन उदाहरण है.

एक जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की. एटा जिले के जावेद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि धर्म आस्था से जुड़ा विष्य है. ईश्वर के प्रति आस्था होने के लिए जरूरी नहीं कि किसी विशेष पूजा पद्धति के जरिए ही यह हो. कोर्ट ने कहा कि शादी के लिए जरूरी नहीं है कि लड़की और लड़का दोनों एक ही धर्म के हों. ऐसे में सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना गलत है.

Breaking News : धर्म के प्रति नहीं रह जाती आस्था

हाई कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि दबाव डालकर, डर या लालच के जरिए धर्म परिवर्तन में व्यक्ति के अंदर उस धर्म के प्रति कोई आस्था नहीं रहती है. कोर्ट ने कहा कि अपने फायदे के लिए धर्म परिवर्तन करना या कराना व्यक्तिगत तौर पर नुकसान पहुंचाता है, इसके साथ ही सामाजिक ढांचे के लिए भी खतरनाक है.

धोखे से शादी का है आरोप

जस्टिस शेखर यादव ने एटा के रहने वाले जावेद की जमानत अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई की. जावेद ने एक हिंदू लड़की को बहला फुसला कर उससे शादी कर ली. जबरन उसका धर्म परिवर्तन कराया और फिर उससे निकाह कर लिया. इस मामले में लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि जबरन उससे उर्दू में लिखे दस्तावेजों पर साइन ले लिया गया. इस मामले में हाई कोर्ट ने जावेद की जमानत अर्जी खारिज कर दी है.

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