Sunday, May 22nd, 2022

CG Bastar News : नरसिंह अवतार दिवस विशेष : मां दंतेश्वरी प्रतिमा के ऊपर नरसिंह भगवान इसलिए शक्तिपीठ के सामने गरुड़ स्तंभ

(हेमंत कश्यप जगदलपुर द्वारा) देश के शक्तिपीठों में बस्तर का दंतेश्वरी शक्तिपीठ काफी लोकप्रिय है। यहां विराजित मांई जी की प्रतिमा जिस चट्टान में उकेरी गई है। उसी चट्टान में ऊपर की तरफ हिरण्यकश्यपु का वध करते भगवान नरसिंह की भी मूर्ति है इसलिए दंतेश्वरी शक्तिपीठ के सामने गरुड़ ध्वज स्थापित किया गया है। मां दंतेश्वरी प्रतिमा के ऊपर चांदी का बड़ा छत्र टंगा है इसके चलते नरसिंह भगवान की प्रतिमा दर्शनार्थियों को नजर नहीं आती। नरसिंह को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है इसलिए पौराणिक मान्यता के अनुसार शक्तिपीठ के ठीक सामने गरुड़ स्तंभ स्थपित किया गया है। दुर्लभ तस्वीर सहित यह रहस्य और रोचक जानकारी झापी से निकाल कर सुधि पाठकों के लिए लाई गई है। आशा है आपको यह जानकारी जरूर पसंद आएगी।
दंतेश्वरी शक्तिपीठ के संदर्भ में पौराणिक मान्यता है कि माता सती का अधोदंत (नीचे का दांत) शंखनी और डंकनी नदी संगम के ऊपर गिरा था इसलिए यह स्थल दंतेश्वरी शक्तिपीठ के नाम से विख्यात हुआ। यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित है और महामहिम राष्ट्रपति की अनुमति बगैर यहां की एक ईट को भी हटाना वर्जित है।
आमतौर पर गरुड़ स्तंभ भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों वाले मंदिरों के सामने होते हैं। जगन्नाथ, बालाजी मंदिर में गरुड़ स्तंभ नजर आते हैं लेकिन दंतेश्वरी शक्तिपीठ दंतेवाड़ा में करीब तेरह सौ साल पुराना गरुड़ स्तंभ है, जिसे आठ सौ साल पहले वारंगल से आए अन्नम देव ने (वर्ष 1315 – 16 ई. के मध्य) बारसूर से दंतेवाड़ा लाकर स्थापित करवाया था।
दंतेश्वरी मंदिर में के सम्मुख गरुड़ स्तंभ स्थापित करने के संदर्भ में दंतेश्वरी मंदिर में प्रधान पुजारी रहे स्व. हरिहर नाथ ने बताया था कि जिस चट्टान में मां दंतेश्वरी की प्रतिमा उकेरी गई है। उस चट्टान में ही हिरण्यकश्यपु का वध करते भगवान नरसिंह की भी मूर्ति है। यही युगल प्रतिमा शक्तिपीठ में स्थपित की गई है। गर्भगृह के अलावा दंतेश्वरी गुड़ी के मध्य कक्ष टू में भी भगवान विष्णु की प्रतिमा है। ऐसा माना जाता है कि दंतेश्वरी माता के भाग में तथा गुड़ी के द्वितीय कक्ष में विष्णु प्रतिमा होने के कारण शक्तिपीठ के ठीक सामने गरुड़ स्तंभ स्थापित किया गया है।
गरुड़ स्तंभ के प्रति लोगों में बड़ी आस्था है। अपनी मनौती पूरी करने लोग स्तम्भ से पीठ टिकाकर स्तंभ को अपनी बाहों में भरने का प्रयास करते हैं।
मान्यता है कि जब किसी व्यक्ति को जहरीला सर्प काटता था, तब सर्पदंश से मूर्छित व्यक्ति को शक्तिपीठ लाकर गरुड़ स्तंभ के नीचे लिटा देते थे। इस बात की सूचना मंदिर के पुजारी तक पहुंचाई जाती। वे विषनाशक वनोषधियां देते। देवी की कृपा से विषैले सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है। मृतप्राय: व्यक्ति को जीवित कर देने की वजह से ही शक्तिपीठ के पुजारियों को आज भी जिंदा करने वाला अर्थात “जीया” कहने हैं। वर्तमान में जीया परिवार की 20वीं पीढ़ी माता की पूजा- अर्चना कर रही है।

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