Thursday, May 19th, 2022

CG Good News : रायपुर स्मार्ट सिटी ला रही वाटर बिलिंग सिस्टीम की नई तकनीक

छत्तीसगढ़ का अपने आप मे ऐसा पहला प्रोजेक्ट

पानी हम सबके शरीर और इस संसार का आधार है। आज हम इसका उपयोग लापरवाही के साथ ज़्यादा करते हैं । इस व्यवस्था को सुधारने रायपुर स्मार्ट सिटी ने एक प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू कर दिया है। आज से 2 साल बाद जब ये शुरू होगा तब शायद हमें पानी की अहमियत समझ आएगी ।

रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने 24*7 वाटर सप्लाई नाम से एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की हैं। असल मे उन्होंने इसे 2018 में शुरू कर दिया था लेकिन किन्ही कारणों से इसे रोक दिया गया जिसे अब फिर से हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू किया गया है ।

इसके अंतर्गत रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिये ऑटोमैटिक वाटर बिलिंग सिस्टम । यानी आपने कितना पानी उपयोग किया ये अब ऑटोमैटिकली पता लगाकर उसके हिसाब से पानी के पैसे लिए जाएंगे।

अभी हर व्यक्ति से एक तय किराया लिया जाता है जिससे कम पानी और ज़्यादा पानी उपयोग करने वालों के बीच एक असमानता बनी रहती है ।

कैसे और कहाँ से शुरू होगा ?

रायपुर स्मार्ट सिटी में इंजीनियर के तौर पर पदस्त अमित मिश्रा ने बताया कि जयस्तम्भ चौक से 2 किमी के रेडियस ( 12.57 स्क्वायर किमी ) , 14 वार्डो में इसे शुरू किया जाएगा । उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2022 को इसका वर्क आर्डर जारी किया गया है । अभी 3 महीने सर्वे, फिर डिजाइनिंग में लगेंगे और 2 साल के बाद यानी 2024 तक ये शुरू हो जाएगा ।

उन्होंने बताया कि ये पूरा प्रोहेक्ट 130 करोड़ रुपये का है । जिसे मिसेज लक्ष्मी सिविल इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड हैंडल कर रही है। यही कंपनी इसके बनने के बाद अगले 5 साल तक इसका मेन्टेनेंस भी देखेगी ।

उन्होंने बताया कि इस दौरान करीब 156 किमी की पाइपलाइन लगाई जायेगी । जिससे 24-25000 परिवार लाभान्वित होंगे ।

इंजीनियर अमित मिश्रा ने बताया कि इससे एनआरडब्लू ( नॉन रिवेन्यू वाटर ) यानी वो पानी जो श्रोत से जाता तो है लेकिन कुछ कारणों से ( लीकेज आदि ) उपभोक्ता तक पहुंच नही पाता जिससे सप्लायर को आय का नुकसान होता है।

उन्होंने कहा कि अब इस प्रोजेक्ट के बाद ये समस्या बहुत हद तक खत्म हो जाएगी । इसमे जो डीआई पाइप डाली जाएगी उसकी उम्र 30 वर्ष रहती हैं ।

क्या फायदा उपभोक्ता को ?

अभी उपभोक्ता को 200 रुपये प्रति माह निगम में पानी का बिल देने होता हैं । इस प्रोजेक्ट के बाद हो सकता है कि ये इससे भी कम हो जाए या ज़्यादा । उपयोग के आधार पर रहेगा।

सरकार को क्या फायदा ?

उन्होंने बताया कि इससे निगम का वाटर रेवेन्यू 100 प्रतिशत हो जाएगा। साथ ही किसी जगह में कितनी लोग जुड़े है , कितने सर्विस ले रहे हैं इसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी।

किन राज्यों में अभी चल रहा ?

उन्होंने बताया कि नागपुर में इसे 2010 में शुरू किया गया था। लेकिन अभी तक वो 30 -40 प्रतिशत एरिया ही कवर कर पाया हैं । इसके अलावा पुणे , दिल्ली में भी ये व्यवस्था चल रही हैं।

ये भी जाने – – –

इंजीनियर अमित मिश्रा ने बताया कि इसके लिए जो पाइप ( डी आई ) डाली जाएगी वो अभी स्मार्ट रोड बनाने ( इलेक्ट्रिक केबल की अंडरग्राउंड वायरिंग ) के दौरान ही डाल दी जाएगी । ताकि सड़क को बार बार खोदना न पड़े , एक बार मे ही सारा काम हो जाए ।

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