Tuesday, September 21st, 2021

CG News : कोरोना काल में रायपुर पुलिस रही मुस्तैद, लोगो की सेवा को ही मानते हैं अपनी ड्यूटी

रायपुर/वेदप्रकाश भोई : जब पूरी दुनिया कोरोना से जूझ रही थी तब फ्रंट लाइन वर्कर्स ने अपनी जान जोखिम में डालकर दुसरो की जान बचाई है। जिसमें पुलिस प्रशासन की भी बड़ी भूमिका रही है। जिस समय पूरी देश और दुनिया लॉक डाउन के चलते अपने-अपने घरों में कैद थी उस वक्त भी पुलिस ने आमनागरिकों को सेवाएं मुहैया कराना जारी रखा। हमने कोरोना काल में मुस्तैदी ड्यूटी पर तैनात थाना प्रभारी, एएसआई, और आरक्षक से बात की जिनमें कई महत्वपूर्ण बात निकल कर सामने आई।

लोगो की सेवा, हमारी ड्यूटी
जब कोरोना के दौरान कार्य में आने वाले कठिनाइयों के संबंध में सिविल लाइन थाना प्रभारी आर के मिश्रा से हमने सवाल पूछा तो उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के आने से उन्हें आमजन की सेवा करने का मौका मिला है। और यही हमारी ड्यूटी भी है। भले ही ये वायरस खतरनाक है लेकिन इसे हम सब मिलकर हरा सकते हैं। जिसके लिए शासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना होगा, जैसे दो गज दूरी, मास्क, और सेनेटाइजर का इस्तेमाल लगातार करते रहना होगा। उन्होंने बताया कि कोरोना के पहले लहर के समय जब वे ड्यूटी से घर जाते थे तो इस बात पर पूरा ध्यान रखते थे कि वो पूरे तरीके से खुद को सेनेटाइज करे, कपड़े बदल कर, और स्नान करने के बाद ही घर में प्रवेश लेते थे। साथ ही घर के सदस्यों से भी थोड़ी दूरी बनाकर रखते थे। ताकि घर वालो को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।

अफवाहों से दूरी बना खुद को रखा पॉसिटिव
पहले लहार के समय टीवी पर दिखाए जा रहे नेगेटिव खबरों के बावजूद खुद को पॉज़िटिव कैसे रखा? तब थाना प्रभारी मिश्रा ने कहा कि जो समझदार लोग है वो कभी भी आरोप नहीं लगते हैं, लेकिन जो असामाजिक तत्व हैं पुलिस प्रशासन या डॉक्टर उन्हें निर्देशों का पालन करने की हिदायत देते थे। उसके बावजूद भी वो लोग लापरवाही करते थे। जो उनके हित के लिए काम कर रहे हैं उनके ऊपर भी आरोप लगा रहे थे तो ये उनकी नासमझी है। बाकी जो समझदार लोग थे और कोरोना की गंभीरता को समझते थे उन्होंने किसी के द्वारा किसी पर भी आरोप नहीं लगाया है।

परिवार और नौकरी, दोनों साथ-साथ
परिवार और नौकरी एक साथ सम्भालना कितना चुनैतीपूर्ण रहा? थाना प्रभारी मिश्रा बताते है कि उस समय ऐसे किसी भी प्रकार की समस्या नहीं थी। उस समय जो हमारी प्राथमिकता थी वो केवल इतनी थी कि हमें अपने नागरिकों की और अपनी सुरक्षा करनी है।

आमनागरिकों या समाज सेवी संस्थाओं की ओर से क्या सुविधाएं मुहैया कराई गई थी? हमारे माध्यम से समाज सेवी लोगो ने गरीबों कि सेवा की है, उनके खाने पीने का भी व्यवस्था कराया गया था, हमारे पुलिस स्टाफ के लोगो ने भी आपस मे कलेक्शन कर के गरीब तबके के लोगो के लिए खाने पीने की चीज़ों की व्यवस्था कराई थी।

कोरोना से डरे नहीं, जागरूक रहें
कोरोना से डर नहीं लगा? इस सवाल का जवाब देते हुए सिविल लाइन थाना प्रभारी ने बताया कि पिछले साल

उनके थाना के लगभग 60% कर्मचारी कोरोना के चपेट में थे। और काफी लोग बीमार चल रहे थे। इसके बावजूद वे सभी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। हमें बिल्कुल भी डर नहीं था, हम अपनी ओर से पूरी सावधानी और सुरक्षा करते थे, बाकी घर के सदस्यों को भी कोविड गाइड लाइन का पालन करने की हिदायत देते थे। डर के ड्यूटी तो की नहीं जा सकती तो हम डरे तो बिल्कुल भी नहीं मगर जागरूक थे, और आम जनता को भी जागरूक करते थे।

सिविल लाइन थाना के एएसआई शिव कुमार साहू ने बताया कि कोरोना के दौरान पुलिस के प्रति आमलोगों का भरपूर सहयोग रह है। साहू बतातें हैं कि लोग खुद इतने जागरूक हो गए थे कि वो हमारी भी मदद करते है। गर्मी के समय में आमलोग पानी, सेनेटाइजर, मास्क जैसे चीजें वितरण करते थे।

बच्चों से बनाई दूरी
बच्चों से कैसे करते थे मुलाकात? एएसआई साहू बताते है कि रात में ड्यूटी से जब घर जाते थे तब वो अच्छी तरह अपने आप को डिसइन्फेक्टेड किया करते थे। रात भर आराम करने के बाद बच्चों से सुबह मुलाकात, या इनके साथ समय बिताते थे। ताकि बच्चो को कोई खतरा न हो।

डर और नौकरी
नौकरी के चलते कोरोना से डर नहीं लगा? इस का जवाब देते हुए साहू कहते हैं कि हमे तो नहीं मगर परिवार के लोगो को थोड़ा डर था, मगर घर वालो को समझाइश देर कर ड्यूटी जारी रखा कि संकट के समय सहयोग नहीं करेंगे तो कब जनसेवा करेंगे।वहीं एसपी ऑफिस के एएसआई एल वेंकटेश से भी हमने बात की तो उन्होंने हमारे प्रश्न के जवाब में बताया कि जब कोरोना नया नया आया था, और देश भर में लॉक डाउन की घोषणा हुई तो हमें लगा कि ये क्या महामारी आ गयी है। मगर हमारी नौकरी ही ऐसी है कि हमे जनता की सुरक्षा के लिए रखा गया है तो हम तब डरे नहीं और अपनी ड्यूटी बखूबी निभाते रहे।

ड्यूटी के बाद घर
ड्यूटी के बाद घर पर कैसे रहते थे? एएसआई एल वेंकटेश ने बताया कि ड्यूटी के बाद घर के बाहर ही वर्दी और जूतों को ब्लीचिंग पाउडर में डूबा के रख देते थे, और फिर अच्छे से फ्रेश होकर ही घर में प्रवेश करते थे, पहले लॉक डाउन में घर वालो के करीब जाने से भी बचते थे।

असामाजिक तत्व और कोरोना
लॉक डाउन में आसामाजिक तत्वों से कैसे निपटें? एएसआई वेंकटेश ने कहा कि कोरोना की वजह से लोग ऐसे ही परेशान थे तो हमने अपनी ओर से बिल्कुल भी बल का प्रयोग नहीं किया, मगर हां जो बे-वजह घूमते रहे थे, तीन सवारी चलते थे, हुड़दंग करते थे, तो ऐसे लोगो को हम समझाइस देते थे।

कोरोना, मौत और पुलिस
कोरोना से खत्म हुए पुलिस वालों के परिवार का क्या हाल है? एएसआई वेंकटेश ने बताया प्रशासन ने आश्वासन दिया है, बाकी कोरोना के दौरान ड्यूटी में खत्म हुए जवान के परिवार के एक सदस्य को नौकरी की बात कही गई है। और अन्य सुविधाएं भी उन्हें दी जा रही है जिससे उनकी कुछ सहायता हो सके।ड्यूटी के दौरान बीमार पड़ने पर क्या सुविधाएं मिलती थी? वेंकटेश ने कहा कि मैं खुद कोरोना संक्रमित था। उस दौरान मुझे आइसोलेशन में रहना पड़ा था, और हर दो दिन में डॉक्टर्स और हमारे अधिकारी हाल चाल जानने फोन किया करते थे।

लापरवाह युवाओं को संदेश
कोरोना को लेकर लापरवाही बरतने वालों से आप क्या कहेंगे? एएसआई एल वेंकटेश ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि, उस दिन का इंतेज़ार मत कीजिये जिस दिन खुद आप पर बीते। अपने आस-पास के लोगो से सिख लो, और सावधान रहिए। क्यों कि हम सुरक्षित रहेंगे तो हमारे आसपास के लोगो को भी सुरक्षित रख पाएंगे।वहीं सिविल लाइन थाना के आरक्षक विक्रम वर्मा की ड्यूटी कोरोना के समय में पेट्रोलिंग की थी, वो बताते है कि कोरोना के समय ड्यूटी काफी कठिन थी। मगर संकट के समय में हम सब को मिल जुलकर इससे लड़ना था।

आमनागरिक और सहयोग
शहरवासियों का कितना सहयोग मिला? इसका जवाब देते हुए वर्मा कहते हैं कि जो लोग पिछले साल कोरोना के समय समाज सेवा में लगे थे उन्होंने हमारी और गरीब, प्रवासी मजदूरों की खान-पानी, मास्क, सेनेटाइजर जैसी ज़रूरी चीज़े बांट कर काफी सहयोग दिया। वर्मा बताते है कि वो खुद पेट्रोलिंग के समय रोजाना समाज सेवी के मदद से गरीबो को 150 से 200 पैकेट भोजन विरतण करते थे।

पेट्रोलिंग और जागरूकता
पेट्रोलिंग के समय आसामाजिक तत्वों से कैसे निपटें?
वर्मा बताते हैं वैसे तो कोरोना को लेकर शहरवासी जागरूक थे मगर कुछ बदमाश किस्म के लोगो के साथ सख्ती बरतनी पड़ती थी, जैसे फालतू घूम रहे लोगो को समझा बुझा के वापस भेज दिया जाता था मगर मोटरसाइकिल पर तीन सवारी, बिना मास्क के लोगो का चालान बनवाकर समझाइश के साथ छोड़ देते थे।कोरोना के समय शहर में क्राइम कितना था? वर्मा कहते हैं कि बीते साल शहर में क्राइम का ग्राफ काफी कम था शायद कोरोना की वजह से ही इस समय किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं आती थी।

कोरोना के बाद शहर में क्राइम का ग्राफ कैसा है? इस पर विक्रम वर्मा कहते है कि लॉक डाउन खुलने के बाद से ही क्राइम फिर से बढ़ रहा है, चोरी चकारी की घटनाएं फिर से होने लगी है। ऐसे घटनाओं से निपटने के लिए हमारी पुलिस टीम सदैव मुस्तैद है।कोरोना, मानसम्मान, और अनुभव
कोरोना के दौरान आपका अनुभव कैसा था?
आरक्षण विक्रम वर्मा कहते हैं कि आमनागरिकों द्वारा पुलिसकर्मियों को काफी मान-सम्मान मिला है, कुछ लोग मानते थे कि पुलिस बदमाश होती है वो किसी प्रकार की मदद नहीं करते, कोरोना के बाद आमलोगों में ऐसी धारणा काम हुई है। और वे सभी हमारा बेहद सम्मान करते है। कोरोना ड्यूटी के समय ही लोग हमें चाय-पानी-खाना, या जो उनसे बन पड़ता था वो हमारी मदद के लिए पूछा करते थे।

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