Thursday, December 9th, 2021

CGNews : प्रत्येक वर्ष अन्नकूट के पश्चात प्रथम रविवार को सूर्योपासना की जाती है- राजेश्री महन्त जी
सूर्य भगवान को जगत की आत्मा माना गया है

NHI धर्म शास्त्रों में भगवान सूर्य को जगत की आत्मा माना गया है, ये पृथ्वी लोक में जीवन की उत्पत्ति का स्रोत हैं। इसलिए वैदिक काल से सनातन संस्कृति में सूर्य भगवान की उपासना का उल्लेख प्राप्त होता है। चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराण तथा उपनिषदों सहित सभी धर्म ग्रंथों में सूर्य पूजा का महत्व किसी न किसी रूप में विद्यमान है। छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर में स्थित श्री दूधाधारी मठ में सूर्योपासना की गई, मठ मंदिर के पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने मठ के प्रांगण में स्थित प्राचीन कुएं के पाठ पर बैठकर विधिपूर्वक पूजा अर्चना संपन्न की, भगवान सूर्य देव का गंगाजल, दूध से अभिषेक करके तिलक लगाकर उन्हें 1008 पुष्प अर्पित किए गए, धूप, दीप, आरती के साथ नैवेद्य चढ़ाकर उनकी पूजा अर्चना की गई। अपने संदेश में राजेश्री महन्त जी ने कहा कि भगवान सूर्य ऐश्वर्य, समृद्धि, सुख, शांति के प्रतीक हैं उनकी आराधना से जीवों को आरोग्यता प्राप्त होती है। सनातन धर्म में प्राचीन काल से ही भगवान सूर्य देव की पूजा करने का विधान है। ये भगवान नारायण के स्वरूप हैं, इसलिए इन्हें सूर्य नारायण के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि दूधाधारी मठ में प्रत्येक वर्ष अन्नकूट के पश्चात जो प्रथम रविवार आता है उस दिन यह पूजा की जाती है। धर्म शास्त्रों में कहा गया है चक्षो सूर्यो जायत अर्थात सूर्य को भगवान का आँख माना गया है, इसके प्रकाश से ही संपूर्ण जगत प्रकाशित होता है यह जीवन की उत्पत्ति का स्रोत है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को भगवान सूर्य की आराधना एवं उपासना करनी ही चाहिए। सूर्य पूजन के इस कार्यक्रम में श्री बालाजी मंदिर के पुजारी रामअवतार दास जी, श्री रघुनाथ जी के मंदिर के पुजारी रामशिरोमणि दास जी तथा श्री राम हृदय दास जी, जय शुक्ला, अंकुश तिवारी, हर्ष दुबे, प्रवेश शुक्ला, राम मोहन दास जी, जगत दास जी, उमेश पुरी गोस्वामी, जीवराखन वर्मा, उमेश बिसेन, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।

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