Sunday, May 22nd, 2022

CG News : महान जन नाट्यकर्मी सफ़दर हाशमी और उनके साथी राम बहादुर की कुर्बानियों को याद किया गया

रायपुर,2 जनवरी 22 ,NHI ,1 जनवरी 2022 को शाम 5 बजे बाबा साहेब अम्बेड़कर प्रतिमा के समीप (नगरघड़ी तिराहा), रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित कार्यक्रम सलाम शहीद सफ़दर हाशमी-राम बहादुर में महान जननाट्यकर्मी शहीद सफ़दर हाशमी और उनके साथी शहीद राम बहादुर को उनके कार्यों और शहादत के लिए याद किया गया ।
शहीद सफ़दर हाशमी जन नाट्य मंच के संस्थापक थे । दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर का कार्य छोड़कर वो मजदूर इलाकों में मजदूर साथियों से जुड़े मुद्दे पर नुक्कड़ नाटक करने लगे। बहुत जल्द ही वे मजदूर साथियों के बीच लोकप्रिय हो गये। उन्होंने नुक्कड़ नाटक को आंदोलन की शक्ल दिया। मजदूर साथियों को उनके नुक्कड़ नाटक का इंतज़ार रहता था । उनके नाट्य प्रदर्शनों में हज़ारों की संख्या में मजदूर, कलाकार और छात्र-नौजवान उपस्थित होते थे ।
वामपंथी विचारधारा से प्रभावित सफ़दर के नाटकों में शासक वर्ग के लूट की तीव्र आलोचना होती थी इसलिए शासक वर्ग और फैक्ट्री के मालिकों के नज़र में सफ़दर और उनके साथी चुभने लगे । उनके नाटकों में मजदूर साथियों की पीड़ा बहुत गहराई से चित्रित होती थी ।
उनके लिखे नाटक **हल्ला बोल, मशीन, औरत, राजा का बाजा, समरथ को नहीं दोष गोसाई और मोटेराम का सत्याग्रह बहुत लोकप्रिय हुये । इन नाटकों की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा कि इन नाटकों का बहुत अधिक संख्या में मंचन पूरे देश के नाट्य दलों ने किया। सफ़दर हाशमी एक प्रतिबद्ध जननाट्यकर्मी थे । उनके नाटकों में हाशिये पर पड़े जन की केंद्रीय भूमिका थी। **सफ़दर हाशमी की इसी प्रतिबद्धता और लोकप्रियता से भयभीत शासक वर्ग ने 1 जनवरी 1989 को दिल्ली के साहिबाबाद में उनके मशहूर नाटक हल्ला बोल के मंचन के दौरान सफ़दर हाशमी और राम बहादुर की निर्मम हत्या कर दी। साथी राम बहादुर नेपाल से आये दिहाड़ी मजदूर थे । जब सफ़दर और उनकी टीम पर राजनैतिक गुंडों का हमला हुआ तब राम बहादुर बचाव में आये थे और उनकी भी हत्या कर दी गयी । सफ़दर की हत्या के बाद पूरे देश मे इसके विरोध में प्रदर्शन हुये । इस घटना के विरोध और सफ़दर के समर्थन में पूरे देश में एक दिन में नुक्कड़ नाटक के लगभग 25 हज़ार प्रदर्शन हुये जो सफ़दर की लोकप्रियता को अंकित करता है। सफ़दर हाशमी को देश के पहले शहीद जननाटयकर्मी होने का दर्जा हासिल है। सफ़दर ने लकदक मंचीय नाट्य मंचनो को छोड़कर नुक्कड़ नाटक को चुना । उन्होंने प्रदर्शन के दौरान नाट्यकर्मी और दर्शकों की दूरी को ख़त्म किया। उनके नाट्य विधा में दर्शक की भी उतनी ही महत्ता थी जितनी नाट्यकर्मीयों की थी । इस महत्ता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सफ़दर के बचाव में आकर दर्शक राम बहादुर (मजदूर साथी) ने अपनी जान दे दी । ऐसे उदाहरण दुनियाँ में बहुत ही कम मिलते हैं । कलाकार और दर्शक के इतने गहरे संबंध भी कहीं अन्यत्र देखने को नहीं मिलते हैं ।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम सफ़दर के लिखित कविता और जनगीतों का पाठ-गान किया गया । **शहर की उदीयमान नवेदित रंगकर्मी प्राही पटेल ने सफ़दर की कविता *किताबें करती हैं बातें*, **आज़ादी और राजू और काजू का बहुत सुंदर ही पाठ किया । इसके बाद **सफ़दर रचित और उनके द्वारा गाया जाने वाला गीत *लाल झंडा लेके कॉमरेड आगे बढ़ते जायेंगे, जागा रे जागा सारा संसार, पढ़ना लिखना सीखो ओ मेहनत करने वालो, धर्मराज महापात्र, पी सी रथ, रतन गोंडाने, राजेश अवस्थी, अजय कन्नौजे, शीतल पटेल, साजिद रज़ा, प्रदीप गभने, प्रदीप मिश्रा और शेखर नाग* ने गाया।
इसके पश्चात पी सी रथ और रतन गोंडाने ने लोगों को संबोधित किया।
इसके पश्चात वरिष्ठ साथी विप्लव बंधोपाध्याय नें लोगो को संबोधित करते हुए कहा कि सफ़दर के विचार और कार्य आज भी प्रासंगिक हैं । हमे सफ़दर जैसे अनमोल साथी को बचाना चाहिए था। भविष्य में इस तरह की घटना न घटे इसके लिए हमें पूरी तैयारी रखनी चाहिए।
**वरिष्ठ साथी धर्मराज महापात्र ने सफ़दर के कार्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि सफ़दर न केवल नाट्यकर्मी थे वो सम्पूर्ण प्रतिबद्ध कार्यकर्ता थे । उन्होंने बच्चों के लिए कवितायों की रचना की, मजदूर, महिलाएं और आमजनों के लिए नाटक लिखा और मंचित किया। *साक्षरता आंदोलन में भी सफ़दर की एक बड़ी भूमिका थी।*
इस कार्यक्रम में रेखा गोंडाने, प्रीति गोंडाने, शिक्षाविद संजय पटेल, डॉ नरेश साहू, पत्रकार गणेश सोनकर, बिनिका दुर्गम, अग्निश देव, गुप्ता सर, मेश्राम सर, आदि बहुत साथी उपस्थित थे ।
कार्यक्रम का संचालन शेखर नाग और आभार प्रदर्शन प्रदीप गभने ने किया।

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