Friday, July 23rd, 2021

Coronavirus India : अस्पतालों में बन रहा दहशत का बिल , मरीजों के लिए बिस्तर की बोली

Coronavirus India : रायपुर,न्यूज हसल इंडिया, कोरोना का कोहराम छत्तीसगढ़ में सिर चढ़कर बोल रहा है । 29 जिले। में लॉक डाउन है और करीब 20 जिलों में लॉक डाउन 5 मई तक बढ़ाया जा चुका है । मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही थी वहीं मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही थी ।

कल रविवार को ही मरीजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है । 17 हजार तक संक्रमित मरीजों की संख्या पहुंच गई थी जो कल घटकर 12 हजार में आई है । आगे अभी घटेगा कि बढ़ेगा कुछ नही कहा जा सकता । स्थिति बहुत गम्भीर है । शासकीय अस्पतालों में बेड नही मिल रहा है तो लोग आखिर थक हार कर निजी अस्पतालों के रुख ले रहे हैं ।

लेकिन निजी अस्पतालों में मरीजों की सेवा के बजाय व्यवसाय हावी है । कोरोना के नाम से जो दहशत है उससे लूट मची हुई है । अस्पतालों में लोग जो बिल पेमेंट कर रहें हैं वह उनके परिवार को बेमौत मारने के लिए बहुत है । एक के पीछे स्थिति के हिसाब से 2 लाख से दस लाख तक बिल बना रहे हैं और पेसेंट के परिजन को कहीं न कहीं से लाकर जमा करना पड़ रहा है । अब जिनके घर के दो तीन पेसेंट भर्ती हैं उनके ऊपर क्या गुजर रही होगी यह अंदाजा लगा सकते हैं ।

हाल ही में यहां राजधानी अस्पताल में आग लगने से 6 कोरोना पेसेंट की मौत हो गई । बावजूद अस्पताल प्रबंधन डेड बॉडी ले जाने से पहले बिल पेमेंट करने बोल रहा था । लोग वहां जान बचाने के लिए ले गए थे पर लाश लेकर बाहर निकले उसके बाद कहा जा रहा था पहले पैसा पटाओ । थोड़ी भी संवेदना अस्पताल प्रबंधन में नहीं बच गई है । सब केवल व्यवसाय कर रहें हैं । कोरोना का दहशत इस कदर हावी है कि भय से भी मरीज दम तोड़ रहा है ।

और अस्पताल प्रबंधन दहशत का बिल बना रहा है । मरीज के परिजन दहशत का बिल पेमेंट कर रहे हैं । कुछ लोग तो यह भी बता रहें हैं कि निजी अस्पताल कोरोना का इतना फायदा उठा रहे हैं कि बिस्तर की बोली लगा रहें हैं । यानी दहशत ऐसा कि मरीज की हालत खराब है और अस्पताल में बिस्तर नही मिलने का हौवा उड़ाया जा रहा है ।

फिर 5 लाख जमा कर दो बिस्तर मिल जाएगा । यानी बिस्तर तो अंदर ख़ाली है पर बताया जाता है फूल है अब पैसा लगाओ तो मिल जाएगा । यह बोली नहीं तो क्या है जो ज्यादा पैसा लगाएगा उसे बिस्तर मिल जाएगा । कोरोना ऐसा दुर्दान्त दिन लेकर आया है कि लोगों का सब कुछ पैसा,जेवर सोना चांदी घर द्वार जमीन जायदाद चला गया और अंत में राहत कुछ नही । बहुतों ने तो अंत मे मरीज भी खोया । लोगों के समझ के बाहर है यह देश कब तक ऐसा चलेगा ?

लॉक डाउन से भी कोई फायदा नजर नहीं आ रहा है । आख़िर लॉक डाउन कब तक बढ़ाया जा सकता है । केस कोई खास नहीं घटेंगे तो क्या होगा । निजी अस्पतालों ने लोगों को दिवालिया बना दिया है । हिंदुस्तान में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा प्राप्त है । लोग डाक्टरों को उसी सम्मान के नजरिये से देखते हैं ।

डॉक्टरों को विश्वास खोने का मौका नही देना चाहिए । पर जब भगवान ही शैतान बन जाए तो फिर दुनिया जाएगी कहाँ ? इधर मेडिकल वाले रेमडिसिवर की कालाबाजारी में व्यस्त हैं । 900 के इंजेक्शन को 15 से 20 हजार में बेच रहे हैं । दहशत इतना कि रोगी के परिजन जान बचाने को लेकर मुंहमांगा दाम फेक रहें हैं । गनीमत समझो कि दिल्ली की तरह यहां ऑक्सीजन की कमी नही है अन्यथा वह भी अभी पैसा कमाने का बहुत बड़ा स्रोत बना हुआ है ।

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