Friday, July 23rd, 2021

DELHI POLICE ने मांगी JNU हिंसा से जुड़ी चैट की जानकारी, GOOGLE ने माँगा कोर्ट ऑर्डर

DELHI POLICE की क्राइम ब्रांच ने गूगल को पत्र लिखकर 33 लोगों के बारे में जानकारी मांगी थी. ये वो 33 लोग हैं जिन्होंने वॉट्सऐप के दो ग्रुप्स में जनवरी 2020 में जेएनयू हिंसा (JNU Violence) के दौरान आपस में चैट की थी.

लेकिन दिल्ली पुलिस के इस पत्र के जवाब में गूगल की ओर से कहा गया है कि वह ये जानकारी तभी साझा कर सकती है जब पुलिस कोर्ट का आदेश लेकर आए.

बताया जा रहा है पिछले साल 5 जनवरी को तकरीबन 100 लोग मुंह ढँक कर जेएनयू के भीतर घुसे थे और इन लोगों ने तकरीबन चार घंटे तक यूनिवर्सिटी के भीतर मारपीट की थी.

इस दौरान हुई हिंसा में 36 लोग घायल हुए थे, जिसमे छात्र, शिक्षक और स्टाफ के लोग शामिल थे. जिसके बाद इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी. जिसकी जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई थी.

DELHI POLICE : व्हाट्सएप ग्रुप के 33 सदस्यों को EMAIL ADDRESS साझा किया

पुलिस ने वॉट्सऐप और गूगल को पत्र लिखकर दो वॉट्सऐप ग्रुप यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट, फ्रैंड्स ऑफ आरएसएस के 33 सदस्यों की बातचीत, तस्वीर और साझा वीडियो की जानकारी मांगी थी.

वॉट्सऐप की ओर से यह जानकारी देने से इनकार कर दिया गया तो गूगल ने अपने जवाब में कहा कि वह जानकारी को तभी साझा करेंगे जब कोर्ट से ऑर्डर लेकर आएंगे.

Google LLC द्वारा दी जाने वाली सेवाओं से संबंधित है, जो अमेरिका में संगठित और संचालित और अमेरिकी कानूनों द्वारा संचालित कंपनी है. उन्होंने कहा कि वे डेटा को सुरक्षित रखेंगे,

लेकिन एमएलएटी के तहत अनुरोध पत्र प्राप्त करने के बाद ही इसे साझा करेंगे. पुलिस की ओर से व्हाट्सएप ग्रुप के 33 सदस्यों के इमेल एड्रेस को साझा किया है.

7 लोगों की पहचान लेफ्ट स्टूडेंट के रूप में

सूत्रों ने कहा कि जांचकर्ताओं को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि उन्हें उन छात्रों के फोन पर कोई वॉट्सऐप ग्रुप नहीं मिला, जिनसे इस घटना के संबंध में पूछताछ की गई थी,

यह सुझाव देते हुए कि संदिग्धों ने संभवत अपनी चैट को साफ कर दिया था. पिछले साल 6 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने 9 संदिग्ध लोगों के नाम जारी किए थे, ये सभी छात्र थे, जिसमे से 7 लोगों की पहचान लेफ्ट स्टूडेंट के रूप में हुई थी.

जबकि दो लोग आरएसएस की छात्र संगठन के थे. हालांकि पुलिस ने इन दोनों संगठन के नाम जारी नहीं किए हैं. मामले की जांच के लिए 20 पुलिस कर्मियों की एक टीम का गठन किया गया था.

पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र कोमल शर्मा से पूछताछ की थी, जिन्होंने दावा किया था कि वह हिंसा के दौरान यूनिवर्सिटी में मौजूद नहीं थीं.

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