Friday, October 22nd, 2021

Editorial : धरना प्रदर्शन के लिए भी चाहिए पवित्र सोच

छत्तीसगढ़ में इन दिनों कांग्रेस महंगाई को लेकर उग्र नजर आ रही है । पेट्रोल के दाम भी करीब 100 के आसपास पहुंव गए हैं । पेट्रोल के बढ़ जाने से पूरे समान के दाम ही बढ़ जाते हैं । क्योंकि पेट्रोल ही व्यवसाय को जिंदा रखता है । वह माल परिवहन का मुख्य साधन है ।प्रदेश भर में कांग्रेस इन दिनों महंगाई का विरोध कर केंद्र सरकार को निशाने पर ली है और मोदी सरकार को कोस रही है वहीं प्रदेश की भाजपा भपेश सरकार को शराबबंदी के मामले पर निशाना बनाकर प्रदर्शन कर रही है । इस प्रकार राज्य में अभी भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रदर्शन की राह पर हैं । इस प्रदर्शन से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह सारा खेल महज राजनैतिक है इसका वास्तविक धरातल से कोई लेना देना नहीं है । इधर कांग्रेस महंगाई का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है तो उधर भाजपा शराबबंदी का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है । दरअसल ऐसे आंदोलन का कोई मतलब नही है जिसका सरोकार सामाजिक न होकर राजनैतिक होता है । कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने आज दिन में 12 बजे 5 मिनट चक्काजाम करने का भी आव्हान किया था । प्रदेश भर में कांग्रेसियों ने आज चक्का जाम किया । एक भारत की सर्वोच्च राजनैतिक पार्टी सौ साल पुरानी जो सत्तासीन है यदि वह चक्काजाम करने का आव्हान करे तो यह अच्छा नही है । इस पार्टी को रचनात्मक सोच रखना चाहिये । चक्का जाम करना कोई रचनात्मक नही है । ऐसा करके आखिर हम क्या कर रहें हैं यह सोचने की जरूरत है । यह विध्वंसात्मक गतिविधि है इससे देश कहां जाएगा । क्या कांग्रेस को नही मालूम कि चक्काजाम से कितनी परेशानी होती है और देश को भी कितना नुकसान पहुंचेगा ? यद्यपि यह सांकेतिक था पर विचार सांकेतिक नहीं है । महंगाई तो सच मे आसमान छू रही है । पेट्रोल डीजल व रसोई गैस के दाम बहुत बढ़ चुके हैं और कोरोनाकल में यह और भी असहनीय हो गया है क्योंकि लोगों की रोजी रोटी नही है उसके बाद अगर महंगाई कमर तोड़ दे तो यह तो और भी दुखदायी हो गया है ।लेकिन इसका मतलब यह भी नही है कि विरोध में हम ऐसे रास्ते चलें जिससे जनता की मुसीबत और बढ़े । यह गलत होगा । प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है और उसे हर कोई कर सकता है । लेकिन इसके लिए अलोकतांत्रिक रास्ते नही अपनाने चाहिए । कांग्रेस तो गांधी के रास्ते पर चलने वाली पार्टी है । वह सत्य अहिंसा व शांति के मार्ग का अनुसरण करें । चक्का जाम करना कोई बहुत अच्छी बात नही है । महंगाई का विरोध राजनीतिक भी न हो । सत्ता पाने या वोट बैंक बनाने के लिए मंहगाई का विरोध नही होना चाहिए । हमको गरीबों की मुसीबत को ध्यान में रखकर सत्याग्रह करने की जरूरत है ।मोदी सरकार का महंगाई पर नियंत्रण नही है तो इसके लिए विध्वंसात्मक रास्ते पर जाने की जरूरत नही है । सकारात्मक सोच के तहत किसी भी मुद्दे का विरोध होना चाहिए । इस पर प्रत्येक राजनीतिक दल को सोचना चाहिए कि वह ऐसा कोई काम न करे जिससे जनता को परेशानी में जाना पड़े ।

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