Atal Bihari Vajpayee : दुनिया के दिलों में राज करने वाले थे अटल बिहारी वाजपेई, जन्मदिन पर पुण्य स्मरण

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Atal Bihari Vajpayee : अटल बिहारी वाजपेई को भारत रत्न से नवाजा गया

ऐसे बहुत से राजनेता देश दुनिया में देखने मिले हैं जो अपने राजनीतिक जीवन को केवल राजनीति का विषय बनाकर रख

देते हैं बिरले ही कोई ऐसा नेता होता है जो नेता के बाद राजनेता फिर राष्ट्रनेता और भी उससे आगे कहें तो धर्मनेता के

तमाम पहलुओं को आत्मसात करने में सफल होते हैं । अटल बिहारी बाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) का नाम उन अनोखे नेताओं में से एक है ।

आज 25 दिसंबर को भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी बाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) का जन्म दिवस है । उनके आचरण में राजनीति,धर्म

,निष्ठा,अनुशासन और सामाजिक समरसता का अद्भुत समावेश था इस कारण ही देश उनके जन्म दिवस को सुशासन

दिवस के रूप में मनाया जाता है । उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था यानी आज उनका 99 वा जन्म दिन है ।

अटल बिहारी बाजपेई के जन्म दिन पर पूरे देश में विविध आयोजन होते हैं और उनके नीति सिद्धांतों से आज की पीढ़ी को

अवगत कराया जाता है । अपने तमाम गुणों के चलते ही वे देश के प्रधानमंत्री बने । पहली बार 16 मई से 1 जून 96 तक

रहे । अल्प मत की सरकार होने के कारण अटल बिहारी बाजपेई ने बहुमत सिद्ध करने के दौरान सदन में ही त्याग पत्र

देकर चले गए । फिर जब दुसरी बार उनकी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) जब बहुमत लेकर आई तब 19 मार्च 1998 से

22 मई 2004 तक प्रधान मंत्री रहे । उनके प्रधानमंत्री का यह काल आज भी याद किया जाता है ।एक तरह कह सकते हैं

उनका प्रधानमंत्री का पांच साल का यह सबसे सर्वोत्तम काल रहा है । राजनीति के साथ ही स्वच्छ और मजबूत प्रशासन की

उन्होंने अदभुत मिसाल पेश की । उनके पांच साल में मंहगाई पूरी तरह स्थिर रही । अब हर दो माह में कीमतें बढ़ती है ।

गैस सिलेंडर,पेट्रोल और सागभाजी के दाम हर रोज बढ़ते हुए मिल जायेंगे लेकिन (BJP) जी के कार्यकाल में महंगाई

स्थिर थी अगर घटी नहीं तो बढ़ी भी नहीं । इसका कारण है अटल जी का पूरा सामाजिक सरोकार था । वे समाज की

पीड़ा को भलीभांति भांपते थे । इसलिए उनके अंदर मानवता भी कूट कूट कर भरी हुई थी । वे नहीं चाहते थे कि सरकार

या प्रशासन की गलत नीतियों की वजह से जनता को तकलीफ हो । इसलिए वे जो भी निर्णय प्रधानमंत्री की हैसियत से लेते

थे बहुत सोच समझकर लेते थे । वे एक संवेदनशील प्राणी थे यही कारण है कि वे कवि बन गए । उनके विशाल हृदय में

कविता का भी वास था । उन्होंने अनेक सजग कविताएं लिखी है । जो आज भी लोगों के होठों पर गुनगुना लिया जाता है ।

कवि होने के साथ वे एक ओजस्वी वक्ता थे । उनकी सभाओं में लाखों की भीड़ होती थी । सदन में उनके भाषण सुनने के

लिए सब लालायित रहते थे । वे जब सदन में बोलते थे तब पूरा सदन उनको बड़े ध्यान से सुनता था । उनके भाषण पर

कोई कभी टिप्पणी निकाल दे हुआ ही नहीं । वे मोरारजी देसाई सरकार में भारत के विदेश मंत्री थे । उनकी वाकपटुता ,

सरल सहज आचरण, समृद्ध कूटनीति के चलते वे पूरी दुनिया में बेस्ट विदेश मंत्री के रूप में छा गए थे । उनकी प्रेस

कॉन्फ्रेंस सुनने विदेशों में भी भारी भीड़ उमड़ती थी । वे कुंवारे प्रधानमंत्री थे और आजन्म कुंवारे रहे । उनके कुंवारेपन को

लेकर अक्सर पत्रकार सवाल पूछते ही रहते थे । एक बार 1978 ने जब विदेश मंत्री थे तो जब वे विदेश से लौटे तब किसी

पत्रकार ने फिर यह सवाल उछाल दिया की बाजपेई आप कब तक कुंवारे रहोगे तो बाजपेई जी ने कहा जब तक आदर्श

पत्नी न मिले । पत्रकार ने फिर पूछा कि फिर आदर्श पत्नी मिली नहीं क्या तो बाजपेई जी ने कहा मिली थी । फिर पत्रकार

ने कहा फिर आपने शादी क्यों नहीं की तो बाजपेई जी ने अपने ऊपर व्यंग्य कसते हुए जवाब दिया क्योंकि उसको भी

आदर्श पति की तलाश थी । इस व्यंग्य से वहां हंसी की फुहारें चल गई । अटल बिहारी बाजपेई के जवाबों का जवाब ही

नहीं होता था । अटल बिहारी बाजपेई के जवाबों का पंडित जवाहर लाल नेहरू भी कायल थे । एक बार की घटना है जब

नेहरूजी ने उनकी पार्टी पर टिप्पणी की थी तब उन्होंने सदन में कहा था नेहरूजी आप शीर्षासन करते हैं यह मुझे मालूम

है । आप शीर्षासन कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है पर आप मेरी पार्टी की तस्वीर उल्टी करके मत देखिए । इससे

नेहरूजी भी बहुत ठहाके लगाए । इस तरह अटल बिहारी बाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) केवल अपनी पार्टी में ही प्रिय नहीं थे बल्कि वे विपक्षियों

के भी प्रिय नेता थे। वे जब प्रधानमंत्री थे तब उनके आवास में मिसेज कौल भी रहती थी तब । एक बार जब वे पाकिस्तान

से लौटे तब एक पत्रकार ने पूछ ही लिया ।

प्रधानमंत्रीजी ये मिसेज कौल का क्या मसला है । यह प्रश्न सुन वह हैरत में रह

गए तब थोड़ी देर रुके फिर बोले कश्मीर जैसा ही मसला है । यह जवाब सुनकर सारे पत्रकार हक्के बक्के रह गए । इस

तरह उनके भीतर हमेशा किसी भी विषय पर तात्कालिक जवाब हाजिर रखने की क्षमता थी । छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य

बनाने वाले अटल बिहारी बाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) ही हैं । 1998 में रायपुर की एक चुनावी सभा में अटल बिहारी बाजपेई ने कहा था की

तुम मुझे छत्तीसगढ़ से ग्यारह सांसद दो मैं तुम्हे पृथक छत्तीसगढ़ दूंगा । फिर क्या भाजपा की जीत हुई । छत्तीसगढ़ से

आठ सांसद चुने गए । अटल बिहारी बाजपेई (BJP) प्रधानमंत्री बने और प्रधानमंत्री बनते ही अपने वचन के मुताबिक पृथक

छत्तीसगढ़ की प्रक्रिया शुरू कर दिए। 2000 में पृथक छत्तीसगढ़ बन गया । एक नंबर 2000 को पृथक छत्तीसगढ़ राज्य

की स्थापना हो गई । साथ में झारखंड और उत्तरांचल भी बनाया गया । छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता कहलाए अटल बिहारी

वाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) । जबसे पृथक छत्तीसगढ़ बना है छत्तीसगढ़ ने गजब का उत्तरोत्तर विकास किया है जो दुनिया में मिसाल है। ऐसे

विराट सदाशयता समग्र चिंतन से भरपूर नेता मिलना मुश्किल है । अटल बिहारी वाजपेई (Atal Bihari Vajpayee) 16 अगस्त 2018 को दुनिया से विदा हो गए पर दुनिया के दिलों में अभी भी राज कर रहें हैं ।

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