Rajim : सांस्कृतिक सभ्यता का केंद्र रहा है राजिम, लाखों पर्यटक आते हैं यहां आनंद लेने

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Rajim : सांस्कृतिक सभ्यता का केंद्र रहा है राजिम, लाखों पर्यटक आते हैं यहां आनंद लेने

Rajim : छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहलाने वाला राजिम अपने विविध सांस्कृतिक वैभव के लिए जाना जाता है ।

Rajim : यही कारण है कि इसकी ख्याति न केवल भारत में है बल्कि यह विदेशों में भी अपनी गाथा का परचम फहराया हुआ है ।

इसकी समृद्ध विरासत को संजोने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं और इसे दुनिया के पर्यटन के नक्शे पर उकेरा है ।

आज लाखों पर्यटक राजिम आते हैं और यहां की संस्कृति और सांस्कृतिक धार्मिक विरासत की यादें अपने साथ ले जाते हैं ।

माघ महीना में लगने वाला पंद्रह दिन का राजिम मेला जिसे भाजपा सरकार ने पांचवे कुंभ के रूप में स्थापित किया है दुनिया में मशहूर है ।

राजिम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से मात्र 45 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा की ओर है जो आजकल विकसित नया रायपुर से लगा हुआ है । यह पहले गांव था पर अब एक शहर की शक्ल में तब्दील हो गया है ।

Why is Rajim famous? : यहां तीन नदियों का संगम है

महानदी, पैरी और सोंदुल। इसलिए इसे धार्मिक मान्यता पर प्रयागराज भी कहा जाता है ।

रोज सैकड़ों लोग यहां अपने दिवंगत परिजनों का अस्थि विसर्जन संगम में करने आते हैं । क्रिया कर्म के कारण यहां पंडों का बड़ा कारोबार भी चलता है ।

यहां का वातावरण बहुत ही रम्य है । नदी संगम के ठीक बीच में भगवान कुलेश्वर महादेव का मंदिर है जो बहुत प्राचीन है ।

इसकी मान्यता है कितनी भी बाढ़ आ जाए कभी मंदिर बहा नहीं ,यह मंदिर नदी के बीच आज भी स्थित है ।

Rajim : छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहलाने वाला राजिम अपने विविध सांस्कृतिक वैभव के लिए जाना जाता है ।
Rajim : छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहलाने वाला राजिम अपने विविध सांस्कृतिक वैभव के लिए जाना जाता है ।

What is the history of Rajiv Lochan Mandir? : यहां का राजीव लोचन मंदिर बहुत विख्यात है ।

यहां भगवान विष्णु की नयनाभिराम प्रतिमा है जिसकी अनेक किवदंतियां हैं ।

कहते हैं एक बार भगवान विष्णु ने कहा कि धरती में एक ऐसी जगह पर मेरे मंदिर का निर्माण करो जहां पांच कोस के अंदर शव न जला हो ।

पर विश्वकर्मा को ऐसा कोई स्थान नहीं मिला तो फिर उसने भगवान विष्णु को जाकर बताया कि धरती में यह

असंभव है तब भगवान विष्णु ने एक कमल फूल दिखाया बताया की यह कमल जहां गिरेगा वहीं मेरी स्थापना होगी ।

इस प्रकार कमल फूल के पराग पर विष्णु भगवान बसे हैं । इसीलिए इसे राजीवलोचन कहा जाता है ।

मंदिर कैसे बना इसका भी बहुत अदभूत किवदंती है । कहते हैं राजा जगतपाल ने इस मंदिर को केवल एक रात में बनाया है ।

Rajim : राजा जगतपाल की बड़ी प्रतिमा वहां रखी है ।

कमल फूल की पांच पंखुड़ियां के रूप में यह क्षेत्र पंचकोसी धाम नाम से प्रसिद्ध हुई हैं ।

पंचकोसी धाम में पांच महादेव हैं । यहां कार्तिक अगहन माह में पंचकोसी की पैदल यात्रा की जाती है ।

यात्रा राजिम के कुलेश्वर महादेव से शुरू कर कुलेश्वर महादेव में खत्म की जाती है ।

राजिम कुलेश्वर महादेव के चारों दिशाओं पर स्थित महादेव के दर्शन ही पंचकोसी यात्रा कहलाती है ।

पश्चिम की ओर ग्राम पटेवा में पटेश्वरनाथ महादेव का मंदिर है ।

उत्तर की तरफ ग्राम चंपारन जहां की भगवान वल्लभाचार्य का विशाल मंदिर है वहीं चंपेश्वर महादेव का मंदिर है,

पूर्व की ओर महासमुंद के पास बम्हनेश्वर महादेव का विशाल मंदिर है ।

यहां से गुप्त जल धारा भी बहती है ।

जो धरती के अंदर से कहां से आती है कोई नहीं जानता लेकिन बारहों महीना जलधारा बहता है ।

उसका बहाव और उफान वहां एक जलधारा कुंड में देखा जा सकता है ।

आप जल धारा कुंड में कोई भी वस्तु डालोगे तो वह ऊपर फेका जायेगा ।

What is Rajim Kumbh Mela? : इसे देखने रोज लोगों की भीड़ लगी रहती है ।

यहां से फिर ग्राम फिंगेश्वर में फनेश्वरनाथ महादेव है , दक्षिण की ओर ग्राम कोपरा में कोपेश्वर महादेव स्थित हैं ।

इस तरह पटेश्वरनाथ महादेव, चंपेश्वरनाथ महादेव, बम्हनेश्वरनाथ महादेव, फणेश्वरनाथ महादेव और कोपेश्वरनाथ महादेव

कुल पांच महादेव का दर्शन पैदल चलकर यानी पद यात्रा में किया जाता है। यह यहां की एक धार्मिक और सांस्कृतिक

परम्परा है । इसकी प्रसिद्धि दूर दूर तक है । अब तो छत्तीसगढ़ सरकार ने यहां का वैभव बढ़ा दिया है । नदी के दोनों

पाटों का सौंदर्यीकरण कर सुंदर बना दिया है । आवागमन के लिए पुल तो पहले से बना हुआ है अब छत्तीसगढ़ सरकार ने

दोनो पाटों के बीच लक्ष्मण झूला बना दिया है । जिससे कुलेश्वर महादेव का दर्शन नदी में बाढ़ रहने पर भी किया जा

सकता है । यहां पूजा पाठ की सामग्री का बड़ा कारोबार लगने लग गया है । यह छत्तीसगढ़ के लिए बहुत ही मनोरम और

पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाता है । प्रति दिन खासकर ठंड के दिनों में सितंबर से फरवरी के बीच रोज दस बीस

बस विद्यार्थी और आम लोगों के पिकनिक मनानेआते हैं ।

Rajim : नदी में स्नान करते हैं आनंद लेते हैं दर्शन करते हैं ।

यहां की खूबी है कि यहां हर समाज का मंदिर है । जिसकी वजह से हर समाज का साल में एक बार मेला लगता है ।

राजिम का मेला माघ पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक लगता है । यह एक साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी के

नाम से भी जाना जाता है । यहां राजीवलोचन परिसर में ही भगवान जगन्नाथ का भी मंदिर है जिसकी यह मान्यता है कि जो

भी ओडिसा के पुरी के भगवान जगन्नाथ का दर्शन करने जाते हैं उनकी यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक वे

राजिम के जगन्नाथ मंदिर का दर्शन न कर लें । इसलिए इधर के लोग जो कोई भी पुरी जाते हैं वे लोग लौटते समय राजिम

का जगन्नाथ मंदिर अवश्य जाते हैं । तभी उनकी साधना पूरी होती है । राजिम का पुराना नाम कमल क्षेत्र पद्मावती पूरी है ।

यहां एक तेलीन माता मंदिर है । यह भी कहते है कि राजिम नाम की एक तेलीन माता की कहानी इस मंदिर से जुड़ी हुई

है । राजिम संगम नदी के राजीव लोचन मंदिर के पास नदी किनारे एक और महादेव का मंदिर है ।

Rajim : कुलेश्वर महादेव और इस महादेव को मामा भांजा का मंदिर कहा जाता है ।

छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल कहा जाता है । कहते हैं अपने वन गमन के समय माता सीता ने बालू का महादेव

बनाकर यहां पूजा की थी । जिसका आधा भाग आज भी वहां कुलेश्वर मंदिर में है आधा भाग रेत का था जो बह गया ।

राजिम एक दर्शनीय और पर्यटन के दृष्टि से बहुत ही मनोरम रमणीय घूमने लायक जगह है । राजधानी रायपुर से हर पांच

मिनट में राजिम के लिए बसें चलती है । राजिम में छोटी रेल लाइन भी थी लेकिन आजकल उसका विस्तार करने के नाम

से केंद्र सरकार ने सब उखाड़ दिया है जिसे बड़ी रेल लाइन में तब्दील होने में अभी बहुत समय लगेगा । राजधानी रायपुर

से राजिम के लिए सड़कों का चौड़ी कारण भी किया जा रहा है जिससे आवागमन में समय भी बहुत कम हो जायेगा ।

राजिम में ठहरने के लिए होटल और धर्मशालाएं हैं ।

How to reach Rajiv Lochan Temple?

रायपुर का विवेकानंद एयर पोर्ट से राजिम मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर है । और रायपुर में छोटे से लेकर पांच सितारा

जैसे आलीशान होटल भी मिल जायेंगे । सारी सुविधाओं से परिपूर्ण राजिम घूमना आसान और आनंददायक हो गया है ।

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