Makar Sankranti: आज मकर संक्रांति महापर्व, पतंगबाजी और दान का महायज्ञ

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Makar Sankranti: आज मकर संक्रांति महापर्व, पतंगबाजी और दान का महायज्ञ

Makar Sankranti: पूरे देश में इस बार मकर संक्रांति (Makar Sankranti)का पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा है । जब पौष मास में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तब ही मकर संक्रांति मनाई जाती है ।

सूर्य उत्तरायण होता है ।

हमारे पुराणों धर्म ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने आते हैं इसलिए मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का खास महत्व है । ज्योतिष विद्वान इस पर्व को सूर्य उपासना का पर्व भी कहते हैं ।

इसलिए यह महापर्व के रूप में देश में पूजा जाता है। मकर संक्रान्ति (Makar Sankranti) को ही खर मास की समाप्ति होती है । भगवान सूर्य इस दिन तेज गति से चलना प्रारंभ करते है और मकर राशि में प्रवेश करते हैं ।

आम तौर पर इसी दिन शुक्र का भी उदय माना जाता है जो शुभ संकेत है इसलिए सारे शुभ काम इसी दिन से हिंदू धर्म में शुरू हो जाते हैं ।

मकर संक्रांति पर आप क्या कामना करते हैं?

आपको बता दें पंडितों के अनुसार 77 साल बाद मकर संक्रांति (Makar Sankranti) पर वरियांन योग और रवि का संयोग बन रहा है । इस दिन बुध और मंगल भी एक ही राशि धनु में प्रतिष्ठापित होंगे

वरियान योग 15 जनवरी को प्रातः 2 बजकर 40 मिनट से रात 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा । इसी दिन रवि योग सुबह 7 बजकर 15 मिनट से लेकर दुसरी सुबह 8 बजकर 7 मिनट तक रहेगा ।

पांच साल बाद मकर संक्रांति सोमवार को पड़ रही है। कहते हैं सोमवार की वजह से सूर्यदेव के साथ ही शिव का भी आशीर्वाद मिलेगा ।

मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही क्यों?

15 जनवरी को सूर्य रात 2 बजकर 54 मिनट में मकर राशि में प्रवेश करेगा । मकर संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 7.15 से शाम 6.21 तक बताया गया है और महा पुण्यकाल शाम 9 बजकर 6 मिनट तक माना गया है ।

मकर संक्रांति का स्नान कब है?

मकर संक्रांति के दिन सुबह नदी स्नान किया जाना चाहिए । नदी न हो तो तालाबों अथवा सरोवर में पुण्य स्नान किया जाता है। पानी में काले तिल डालकर नहाने से बेहतर स्वास्थ्य रहता है ।

स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं आराधना करें । तिल डालकर जल चढ़ाना बहुत शुभ माना गया है । हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के दिन दान का बहुत महत्व है ।

सुबह स्नान और पूजा पाठ के बाद गरीबों को यथा शक्ति दान अवश्य किया जाना चाहिए इससे सुकून का अहसास होता है। और गरीबों को मदद भी मिल जाती है ।

दान में कंबल ,गर्म कपड़े,भोजन खिचड़ी , अन्न या पैसा मुद्रा कर सकते हैं । मकर संक्रांति के दिन ही पतंग उत्सव का शुभारंभ होता है । पूरे देश में इस दिन आसमान में पतंग उड़ाते लोग नजर आएंगे ।

प्रायः सभी जगह पतंग प्रतियोगिता की जाती है जिसमे छोटे से लेकर बड़े तक पतंगबाजी करते हैं । उस दिन तिल का खास महत्व है । घर घर तिल का लड्डू बनाकर सुहागिन भगवान का भोग लगाती हैं ।

दिवाली की ही तरह सब अपने नाते रिश्तेदारों मित्रो परिचितों को तिल खिलाकर मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हैं । घर घर प्रसाद के रूप में तिल के लड्डू बाटे जाते हैं । देश में इस दिन पतंग और तिल के लड्डू का बड़ा व्यवसाय होता है ।

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