Bharat Ratna : कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न , वास्तविक गरीबों के पैरोकार का सम्मान

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Bharat Ratna : कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न , वास्तविक गरीबों के पैरोकार का सम्मान

Bharat Ratna: केंद्र की मोदी सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न देने का एलान किया है ।

सरकार ने न उनके जीते जी और न ही मरने के बाद करीब साढ़े तीन दशक मेंआरआर यह जहमत उठाई । इस बार मोदी सरकार ने कर्पूरी ठाकुर की सौवीं जयंती पर यह एलान करके पहली बार किसी ऐसे व्यक्ति को सम्मान दिया है जो सच में गरीबों के पैरोकार थे । अपने दो बार के मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने गरीबों के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं लागू की जिसे उनका जीवनस्तर बदला पर वे अपने घर का एक खपरा भी नहीं बाद पाए ।

इन्होंने पिछड़ों और अति पिछड़ों को आरक्षण देकर उनकी जिंदगी की किस्मत बदली पर अपनी किस्मत को चमकाने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई । वे एक सच्चे ईमानदार नेता थे । वे एक नाई के परिवार से आए बेटे थे जिन्होंने जिंदगी भर सादगी का जीवन जिया । वे मेट्रिक के बाद स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिए और देश के लिए हर कुर्बानी की कसमें खाई ।

वे पहली बार 1948 में राजनीति में कदम रखे और एक ईमानदार सामाजिक योद्धा के रूप में अपनी छवि के जरिए जल्दी ही लोगों के बीच जनप्रिय नेता बन गए । इसका असर यह हुआ कि पहली बार 1952 में चुनाव लडे और जीत गए तब से वे अपने जीवन में कभी चुनाव नहीं हारे अलबत्ता उनको दो बार मुख्यमंत्री के पद से नवाजा गया ।

Bharat Ratna: पहली बार 1970 बिहार के मुख्यमंत्री बने ।

उन्होंने हिंदी को बढ़ावा दिया । दो बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वे रिक्शे से चलते थे । उन्होंने कभी अपना घर नहीं बनाया । आज तो जो विधायक होता है उसके बंगले एक साल के भीतर बन जाते है और पांच साल में वह करोड़ो का आसामी हो जाता है । लेकिन आश्चर्य इनके पिता के घर के छप्पर के एक खपरैल भी नहीं बदल पाए । एक बार हेमवती नंदन बहुगुणा इनके घर गए तो इनके घर की दशा देखकर रो पड़े। इतनी गरीबी तो किसी गरीब के घर भी देखने को नहीं मिलती । हेमवती नंदन बहुगुणा की आंखों में आसूं आ गए ।

जेपी आंदोलन के समय इनके पहनावे को देख चंद्रशेखर ने अपने कुर्ता फैलाकर चंदा करके धोती कुर्ता के लिए इंतजाम किया । अपने विधायकी काल में एक प्रतिनिधि मंडल के साथ आस्ट्रेलिया जाना था तब इनके पास कोट नहीं थे । अपने एक मित्र से कोट मांगा तो वह भी फटा था । फटे कोट देखकर युगिस्लीविया के मार्शल टीटो ने इनको एक कोट भेंट की । इन्होंने अपनी बेटी की जब शादी की किसी मंत्री को नहीं बुलाया ।

घर बनाने के लिए विधायको को रियायती दर पर जमीन दी जा रही थी तब इन्होंने जमीन लेने से इंकार कर दिया । ये ऐसे अदभुत महान नेता थे जो गरीबों के वाजिब मसीहा थे । इन्होंने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में बिना मुनाफे की जमीन पर मालगुजारी लेना बंद कराए । कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देना यानी गरीबों का सम्मान करना है । निःसंदेह वे इस सम्मान के हकदार थे और यह दुनिया के लिए भारत के लोकतंत्र की खूबियों की मिसाल भी है ।

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