Chhattisgadh News : स्वामी आत्मानंद स्कूल अब कलेक्टर नहीं शिक्षा विभाग चलाएगा, शिक्षा में गुणवत्ता के नाम भारी घपले की आशंका !

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रायपुर, 9 फरवरी, छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद स्कूल की कहानी अब सुर्खियों पर है। आज ही शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस कहानी का पटाक्षेप भी किया है कि स्वामी आत्मानंद स्कूल अब कलेक्टर नहीं शिक्षा विभाग चलाएगा । दरअसल शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर पिछले पंद्रह बीस सालों से बहस चल रही है । इसको लेकर अनेक तरह के तर्क कुतर्क भी दिए जाते रहें हैं और सुधार के भी ऐसे प्रयोग समय
समय पर किए गए है जिससे सुधार न होकर केवल मंत्रियों अफसरों का समय पास हुआ है । अलबत्ता शिक्षा में गुणवत्ता के नाम पर छात्रों को पढ़ाई के बोझ तले धकेल दिया गया । जिन हाथों पर पहले दो कापी और दो पुस्तक लेकर स्कूल जाते थे अब कंधे पर दस किलो का बस्ता लेकर जाते हैं । इसका असर यह हुआ कि निजी स्कूलों की बाढ़ आ गई है। हर गली मोहल्ले से लेकर नेशनल हाईवे पर निजी स्कूलों की दुकानें लग गई है। शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया । एडमिशन के लिए कई तरह के लुभावने प्रयोजन भी किए गए हैं । यह देखा गया कि पब्लिक निजी स्कूलों में ज्यादा रुचि ले रही है । यह अवधारणा बहुत बलवती हो गई कि जितना ज्यादा फीस उतनी अच्छी पढ़ाई । जबकि ज्ञान तो अच्छे गुरु से ही हासिल हो सकता है ऊंची फीस से नहीं । यह देखा गया कि निजी स्कूलों में कम वेतन के शिक्षक से छात्रों का पढ़ाई का स्तर अच्छा है जबकि सरकारी स्कूलों में ऊंचे वेतन वाले शिक्षक के बाद भी पढ़ाई कमजोर है । इसलिए लोग सीधे निजी स्कूलों की तरफ दौड़े जा रहें हैं । धीरे धीरे सरकारी स्कूल पढ़ाई के नाम पर केवल आलोचना के केंद्र हो गए । कभी स्कूल का समय बढ़ाकर शिक्षा का स्तर सुधार रहे थे तो कभी परीक्षाओं की शैली बदलकर प्रयोग कर रहे थे । अंततः इससे कुछ नहीं हुआ । शिक्षा का स्तर छत्तीसगढ़ में मजबूत नहीं हो सका । ज्यादातर छात्र हाई स्कूल के बाद पुणे की ओर रुख करने लगे । जब 2018 कांग्रेस सरकार आई तो उसने शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए निजी स्कूलों के साथ मुकाबला करने का विचार बनाया । तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के महान विचारक स्वामी आत्मानंद के नाम पर अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने पर विचार हुआ जो निजी स्कूल के मुकाबले और बेहतर रिजल्ट देंगे । स्वामी आत्मानंद स्कूल के लिए कुछ चुने हुए जगह पर ही प्रयोग बतौर भवन बनाए गए । बहुत अच्छा आकर्षित सुसज्जित सारी सुविधाओं से लैस भवन तैयार किया गया । निजी स्कूलों की तरह बढ़िया टिपटॉप भवन बनाए गए । आत्मानंद स्कूल के लिए अलग से दक्षता प्राप्त अंग्रेजी टीचर नियुक्त किए गए और जबरदस्त फर्नीचर रखे गए । बच्चों को जब भर्ती किया गया तब बड़े बड़े घर के संभ्रांत लोगों ने भी इस स्कूल में अपने बच्चे भर्ती करने लाइन में खड़े हो गए । क्योंकि निजी स्कूलों में भारी भरकम फीस देनी पड़ती है । सो पैसा बचाना बड़ा उद्देश्य हो गया । जिससे बहुत से गरीब माध्यम वर्ग के बच्चे इस स्कूल के शिक्षा से वंचित भी रह गए । बहरहाल जो भी हो स्वामी आत्मानंद के नाम पर प्रदेश में कुछ चुनिंदा स्कूल खोलकर सरकार ने वाहवाही तो बटोरी पर स्कूल का संचालन कलेक्टर के हाथों में दे दिया गया । कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई जो स्वामी आत्मानंद स्कूल का संचालन कर रही थी । इसका नतीजा यह हुआ कि इस स्कूल में अनियमितता की अनेक शिकायतें भी आने लगी । कहने को तो पढ़ाई निःशुल्क थी पर छात्रों को समय पर ने तो शिक्षण सामग्री मिल पाती है और न ही यूनिफॉर्म । बहुत से स्कूलों में आजतक यूनीफॉर्म नहीं मिला है । कुछ जिलों में कहा गया कि पालक अभी स्वयं खरीदें बाद में उन्हें उनका कीमत दे दिया जाएगा । पर सच्चाई यह है कि न तो पैसा मिला न ही यूनिफार्म । कलेक्टर हमेशा फंड से लाचार रहते थे । इसी तरह शिक्षको के वेतन भी अनियमित रहे जिससे पढ़ाई पर प्रभाव पड़ा । स्थाई शिक्षक की नियुक्ति न कर अनुबंधित शिक्षक रखे गए जिनको उचित वेतन नहीं मिला । बावजूद मजबूरी में काम करना ही पड़ा लेकिन इससे रुचि अरुचि में बदल जाती है । कांग्रेस की भूपेश सरकार की सोच काम नहीं आई और वह केवल ढिंढोरा पीटते रह गई। अब बीजेपी की नई सरकार आई है तो शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने स्वामी आत्मानंद स्कूल के संचालन को ही गलत बताया और अब वह कह रहें हैं कि स्वामी आत्मानंद स्कूल का संचालन कलेक्टर नहीं बल्कि शिक्षा विभाग करेगा । इस संबंध में आज विधान सभा में भी एक ध्यानाकर्षण प्रश्न के जवाब में यह बात कही गई है। यह भी कहा गया है की स्वामी आत्मानंद स्कूल के निर्माण में भी भारी घपले की आशंका है जिसकी शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी । शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर के आरडी तिवारी स्वामी आत्मानंद स्कूल के बदलाव रिनोवेशन में चार करोड़ से ऊपर लगे राशि पर कहा कि इतने में तो पूरी नई बिल्डिंग तैयार हो जाती है ।उन्होंने कहा की टोटल आत्मा नंद स्कूल की निर्माण में करीब 8 सौ करोड़ का घपला नजर आ रहा है । जिसकी अभी सूक्ष्म जांच की जरूरत है ।

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