International Women’s Day: महिला दिवस विशेष – नारी तुझे शत शत नमन तुझसे ही खिलता ये चमन

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International Women's Day

International Women’s Day: नारी तुझे शत शत नमन तुझसे ही खिलता है ये चमनं

तपस्या की मिसाल तू , काटो पे चलती ढाल तू

करती है लाख कमाल तू कही तू माँ बन जाती है

कही बेटी कहलाती है,कही बहु ,कही भाभी

कही बहन बन जाती है करने पड़ते है तुझे सौ सौ जतन

नहीं है तुझपे कोई रहम हर जगह सवालों के जवाब जवाब देते

बन जाती है तू गुलाब वो जिसपर होते है काटो हजार

पर फिर भी करता हो वो इस गुलशन को गुलजार

हर समय देनी पड़ती है तुझे नयी परीक्षा

परीक्षा का नहीं कोई कभी मिला प्रतिसाद तुझे

पर फिर भी रहती है उस तरह जैसे है तू हरी का प्रसाद कोई

कभी तू दिखती है  बालिका बनकर घर में गूंजती है

तेरे नाम की किलकारियां , तेरे जन्मदिन पर करते है

माँ बाप लाख तैयारियों , जब होता है जश्न जन्म का

तब लगता है आज हमारी नई शुरुवात है

है हमारा जन्मदिन पर लगता है जैसे यह आने वाले

जीवन में जंग की नयी शुरुवात है

काटते है केक जन्मदिन का

पर नेक इंसान बनकर लगती है लाजवाब तू

क्या कहुँ किस्से तेरे हजार है ,नाकामियां ,नासमझियों ने

तुझे कुछ और समझा पर फिर भी रही तू हमेशा गुलजार तू

आज नहीं कोई नारी अबला बन गई है हर नारी सबला

आज तू है उन्मुक्त गगन की स्नेह सरिता तेरे जीवन से ही तो बहता है

जन्नत का हर एक कोना , तू है तो जिंदगी है तू है तो बंदगी है

तेरे आने से किसी का आशियाना गुलजार होता है

तेरे जाने से बाबुल खा घर भी थार होता है

है प्यार की नेक मिसाल तू कभी सखी कभी मशाल तू

ना मानी कभी हार, ना तू कभी झुकी,

ना कभी किया नैनो के अश्रुओं का बखान यू

क्या कहुँ जखम हर नारी के गहरे होते है पर वो भी तो है इंसान आखिर

फिर भी है उसे मिला इनाम क्या ? सच्चाई हमेशा कड़वी होती है

पर फिर भी वो हकीकत का अफसाना होती है।

क्या बताए दोस्त आज भी झुकी हुई कमर के साथ

International Women's Day

International Women’s Day

ना जाने कितनी माए अपने घरो को पाल रही है 

है जीवन की बड़ी विंडम्ब्ना बुढ़ापे में भी नहीं

 इन्हे शांति से जीने का कोई हक़ अब भी

रिश्तो के धोखो ने इन्हे शायद मजबूर कर दिया

पर है ये रौशनी का वो दिया

जिसने बुरे वक्त को भी अपने कर्मों से धो दिया

बुरा वक्त भी डरकर भाग जाता है जब महिला

का हाथ सामने पाता है हाथ नहीं ये फौलाद है

अंगारो पर धधकती जज्बात है कही कलम

की तलवार बनाकर अंजना ूम कश्यप बनी तू

कही आसमान में कल्पना चावला बनकर तूने किया ऐसा कमाल

नारी तेरे इतने कमाल रुकने का नहीं कही कोई नाम

है चंद्रयान भी तेरे नाम इसे दिया तूने मुकाम

है तुझे आज लाख सलाम ,

है तू हर क्षेत्र में आगे और अव्वल

घर दुनिया और देश हर जगह दिखी शान तेरी

है दुनिया की ाँ बान और शान तू ना तेरा अपमान कही

हर जगह मिले सम्मान तुझे ना किसी पिता की दुनिया दुखो से गुलजार

हो हर बाबुल का दामन खुशियों से गुलजार ,

ना हो कही दहेज़ प्रताड़ना , ना हो कही बलात्कार

ना हो कही कोई महिला हिंसा की शिकार

बने आज मेरी कलम बड़ी तलवार अब यही है पुकार

हो हिन्दोस्तान का हर कोना महिला को दे आत्मसम्मान से जीने का पुरस्कार

आज हर महिला को देती हु मैं महिला दिवस पर सम्म्मान, सम्मान, सम्मान।

International Women’s Day – By Priyanka Ghatge

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