Editorial: Cg News: मजदूरों को पांच रुपए में भरपेट भोजन , क्वालिटी बरकरार रखने की चुनौती

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छत्तीसगढ़ में इन दिनों दाल भात केंद्र की बड़ी चर्चा है । कोरबा जिले के बालको में श्रमिकों के लिए शुरू की गई 5 रुपए में भरपेट भोजन ने बरबस ही ध्यान खींचा है । यह श्रमिकों के लिए शुरू की गई बहुत ही सर्वोत्तम योजना है । दिन और रात कड़ी मेहनत करने वाले श्रमिक को यदि दिनभर में एक बार भरपेट भोजन न मिले तो यह दिखने वाला सारा विकास हमारे किस काम का है ? राज्य सरकार ने शहीद वीरनारायण सिंह के नाम पर इस योजना की शुरुआत की है और अभी यह योजना 21 स्थानों पर दाल भात केंद्र के रूप में संचालित है और अभी 22 स्थानों पर विस्तार की योजना है । सरकार किसी की भी हो इसके पहले भी दाल भात केंद्र चलाए गए हैं । मगर उसका हस्र सभी जानते हैं । लेकिन वह योजना सभी जरूरत मंदों के लिए थी । कलेक्टोरेट तहसील ऑफिस और अन्य भीड़भाड़ वाले शासकीय अशासकीय सार्वजनिक उपक्रमों के समीप खोले गए थे। कुछ दिन तो शुरू शुरू में सब ठीक ठाक चला बाद में धीरे धीरे यह सेवाभाव से ज्यादा व्यवसायिक होता चला गया और इसकी शुरुआती क्वालिटी खत्म हो गई । बाद में केवल भात रह गया और दाल पानी बन गई । चूंकि यह श्रमिकों का मामला है इसलिए सरकार इस बात पर अवश्य ध्यान रखे कहीं उसके पसीने की कीमत न घटे । श्रमिकों को अच्छा भोजन मिलना चाहिए । देश के विकास में श्रमिकों का सबसे बड़ा योगदान होता है । उनके हाथों ही देश की तकदीर गढ़ी जाती है । अगर श्रमिक न रहें तो सारा विकास ही थम जाएगा । पुल पुलिया से लेकर संसद भवन तक निर्माण में श्रमिक का हाथ है । लेकिन दुर्भाग्य है वही निर्माण कर्ता आज उपेक्षित हैं । कितनी विडंबना है उनके लिए ही 5 रुपए वाला सरकार को दाल भात केंद्र खोलना पड़ रहा है और भ्रष्ट्राचार में आकंठ डूबे अफसर, कर्मचारी ,अधिकारी और नेता मलाई खा रहें हैं । बहरहाल जो भी हो यह योजना चलनी चाहिए और सभी जरूरतमंद गरीब व्यक्ति को यहां से भोजन मिलना चाहिए । इसका विस्तार सभी ब्लॉक स्तर पर करने की जरूरत है क्योंकि श्रमिक केवल शहरों या कस्बों में ही नही होते बल्कि गावों में भी होते हैं ।उनके लिए भी व्यवस्था की जरूरत है । तहसील ब्लॉक स्तर पर इसका क्रियान्वयन होना चाहिए महज 21 जगह ही अभी चल रहा है इसे पूरे प्रदेश के तहसील और ब्लॉक स्तर पर ले जाने की जरूरत है । वहीं श्रमिकों को दी जाने वाली क्वालिटी में आगे चलकर गिरावट न आए यह भी ध्यान रखने की जरूरत है । एक बात और है श्रमिकों के इस सेंटर पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए । हम देखते हैं हर मंत्री , विधायक, सांसद,अफसर बॉटल वाला फिल्ट्रेट पानी मंगाकर पी रहें हैं लेकिन श्रमिकों के लिए क्या करते हैं वही अशुद्ध जनरल पानी परोसा जाता है । उम्मीद की जाती है सरकार श्रमिकों को भी शुद्धजल पीने के लिए देना शुरू करेगी । जिस दिन यह काम होगा वह सरकार का सबसे बड़ा और पुण्य का काम कहलाएगा । अगर दाल भात निःशुल्क मिले तो यह और बड़ा पुण्य का काम होगा । सरकार के हजारों बोरा धान आखिर बरसात में भीग कर खराब हो जाते हैं अगर उसे सुरक्षित रखकर इन श्रमिकों के लिए उपयोग किया जाए तो निःशुल्क और बेहतर होगा ।

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