Shiv Mandir Raipur : विराने में रहते थे भोले बाबा, आज लगता है ऐसे जैसे मनती हो यहाँ हर दिन दिवाली

newshustleindia.com
5 Min Read

न्यूज़ हसल इण्डिया (प्रियंका घाटगे )
रायपुर का एक ऐसा शिव  मंदिर  जिसकी बदलती तस्वीर किसी को देखकर आपको यकीन नहीं होगा कि क्या ये वही शिव मंदिर है ? जिसे हमने पहले कभी देखा था ? भारत सदा से ही धर्म और आस्था की संस्कृति का केंद्र रहा है। आज हर कदम पर शिव मंदिरों में भक्तों की संख्या की तादाद में वृद्धि हुई है। इसका श्रेय यदि हम अपने धर्म की विशेष प्रवक्ताओं को दे तो इसमें हमे कुछ गलत नहीं दिखाई देता है। आज हम आपको एक ऐसे क्षेत्र के शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जो छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में मठपारा, गभरापारा में स्थित है। यहाँ अभी हाल ही में महाशिवरात्रि के अवसर पर यादव भवन प्रांगण में नए शिव मंदिर की स्थापना की गयी है। यह मंदिर बहुत ही छोटा पर बहुत ही सुन्दर बना है। भक्तों की ईश्वर में यदि प्रगाढ़ आस्था हो तो छोटा सा शिव मंदिर भी किसी केदारनाथ के दरबार से कम नहीं लगता है।

Matpara Shiv Mandir

आज हम इस मंदिर के बारे में जो बताने जा रहे है वह  इसलिए खास  है क्योंकि इससे पहले यहाँ जो प्राचीन शिव मंदिर था, उसे नया शिव मंदिर बनने के बाद तोड़ दिया गया है। वह मंदिर लगभग 30 से 40 वर्ष प्राचीन था। जहां आज से 20 वर्ष पहले केवल यहाँ की पुजारन दुर्गी बाई और कुछ गिने चुने सदस्य  ही पूजा के लिए पहुंचते थे। बदलते समय के साथ शिव भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है। लोगो की बढ़ती आस्था उन्हें धर्म के साथ संगठित होकर कार्य करने के लिए प्रेरित करती दिख रही है। सुबह शाम यहाँ  15 से 20 दिए सभी भक्त दिये प्रज्वलित करके जाते है। शाम के समय इन दीयों से ही यह मंदिर इतना सुन्दर जगमगा उठता है, उसे देखकर यहाँ ऐसे लगता है जैसे हम हर दिन दीपोत्सव मना रहे हो। हर शाम ठीक 8 बजे माइक के द्वारा शिव भक्तों को आरती की सुचना दे दी जाती है। जिसके बाद सभी मोहल्ले एवं आसपास के सभी घर के लोग आरती के समय एकत्रित होकर भगवान के दर्शन का लाभ पाते है। इसी बहाने वे एक दूसरे के सुख- दुःख का हाल भी एक परिवार की तरह पूछते है।  एकता ही विकास का मूल मंत्र होता है। जिसे पूरा करने में हमारे कथा वाचकों पंडित प्रदीप मिश्रा, पंडित देवकीनंदनं ठाकुर जी एवं पंडित अंकुश तिवारी जी  जैसे महान प्रवक्ताओं के प्रभाव से ही संभव हो पाया है। आज इस शिव मंदिर प्रतिदिन लगभग 40 से 50 भक्त रोज अपनी मनोकामना लेकर भगवान् शिव के दरबार में पहुंच रहे है, वे विधि विधान से पूजा अर्चन कर भगवान् शिव से अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए रोज मुरादे मांगते है। रोज नंदी महराज के कान में अपने मुरादे पूरी करने के लिए भी प्रार्थना करते है।  बच्चे , बूढ़े , स्त्री और पुरुष सब मिलकर रोज यहाँ एक साथ कार्य कर मंदिर की साफ- सफाई करते है। सुबह 5 , 6 बजे ही यहाँ भक्तों की पूजा का ताता लगना प्रारम्भ हो जाता है।  मंदिर में सभी भक्त सिर्फ एक ही मंत्र का जप करते नजर आते है। वह है “श्री शिवाय नस्तुभ्यं “और “राधे -राधे”। इसे देखकर ऐसा लगता है मानो हम किसी अत्यंत सुन्दर संस्कारित वातावरण में रह रहे हो। मन में यदि प्रगाढ़ आस्था हो तो छोटा सा शिव मंदिर भी किसी केदारनाथ और बाबा बैधनाथधाम से कम नहीं लगता। फिर क्यों हम मलाल करे कि हम किसी विशेष तीर्थ में ना जा पा रहे हो। कहते भी है मन में यदि सच्ची श्रद्धा हो तो कंकण भी शंकर बन जाता है ? ज़िन्दगी में सुख- दुःख के भॅवर से निकल कर यदि हम कुछ समय स्वयं एवं ईश्वर के सान्निध्य में बिताये तो इसमें संदेह नहीं कि हम धर्म की राह पर चले तो निश्चित है कि विकास की बुलंदियों हमारे कदम चूमेंगी।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *