National: क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम) का अखिल भारतीय शिविर रायचूर,कर्नाटक में संपन्न

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रायचूर Karnataka,क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (कसम) का अखिल भारतीय शिविर 30 – 31 मार्च 2024 को कर्नाटक के रायचूर में आयोजित किया गया। शिविर में भारतीय जनता के दुश्मन नंबर एक और अडानी अंबानी जैसे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घरानों के लठैत संघी मनुवादी फासिस्ट ताकतों के खिलाफ तत्काल सांस्कृतिक प्रतिरोध तेज करने का निर्णय लिया गया।शिविर का उद्घाटन प्रख्यात क्रांतिकारी कवि,लेखक और ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया ( TUCI) के महासचिव कॉमरेड आर मानसैयया ने किया।अध्यक्षता कर्नाटक के प्रख्यात जनगायक एम आर बेरी ने किया।फासिस्ट आरएसएस- भाजपा कॉरपोरेट गठबंधन की नफ़रत और विभाजन की जहरीली संस्कृति के खिलाफ,साझी शहादत साझी विरासत पर केंद्रित क्रांतिकारी जनसांस्कृतिक आंदोलन को तेज करने के लिए क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ( आरसीएफ) , देश भर में समान विचार वाले प्रगतिशील सांस्कृतिक संगठनों के साथ मिलकर अविलंब साझा सांस्कृतिक प्रतिरोध अभियान चलाएगी ये फैसला लिया गया।इस अवसर पर “जनता का भारत/ इंडिया बनाम कॉरपोरेट शासित हिंदुराष्ट्र ” पर एक बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया। बहुभाषी कवि सम्मेलन में कॉमरेड गंगाधर( कसम कर्नाटक के संयोजक और जन गायक), कन्नड़ कवि दानप्पा निलोगल,कॉमरेड मानसैय्या,डॉक्टर महेंद्र,कॉमरेड आदि नागालुर,कॉमरेड रेड्डी,डॉक्टर अपन्ना ने कन्नड़ में कविताएं/ जन गीत प्रस्तुत किया।कॉमरेड प्रोविंट ,कॉमरेड वेणुगोपाल,कॉमरेड बालाकृष्णन,कॉमरेड निरंजन( मलयालम), कॉमरेड असीम गिरी और कॉमरेड रंजीत मजूमदार( हिंदी व बांग्ला), कॉमरेड फहीम सरफरोश, कॉमरेड निरंजन,कॉमरेड तुहिन(भोजपुरी, हिंदी व उर्दू),कॉमरेड रमन्ना और वेंकटेश( तेलुगु) तथा निरंजन द्वारा इतालवी जन गीतों / कविताओं का प्रस्तुतिकरण किया गया।शिविर में क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच की 17 सदस्यीय अखिल भारतीय नेतृत्वकारी समिति ( AILC) का चुनाव किया गया।कॉमरेड तुहिन और कॉमरेड असीम गिरी को संयुक्त संयोजक चुना गया।पांच सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव भी किया गया।शिविर में भारत के दस राज्यों के चुनिंदा सांस्कृतिक कर्मियों ने भाग लिया।

शिविर का उद्घाटन करते हुए मुख्य अतिथि कॉमरेड मानसैय्या ने कहा कि सांस्कृतिक शिविर का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब देश अपने इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है।
हम एक ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां मनुस्मृति के आधार पर कॉरपोरेट हिंदुराष्ट्र कायम करने के लिए कोरोना की मार से दुहरी हो गई जनता से भीषण गरीबी,भुखमरी,बेरोजगारी,मंहगाई दूर करने की जगह हिंदू खतरे मे है और कैसे हिजाब पहननेवाली महिलाएं धर्म के लिए खतरा पैदा कर रही हैं और कैसे मुस्लिम व्यापारियों के आर्थिक बहिष्कार से व हलाल मीट के बहिष्कार से खतरे में आ गए हिंदुओं को बचाया जा सकता है, का नफरती अभियान चला कर अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों को मारा और प्रताड़ित किया जा रहा है।असल में किसानों मजदूरों समेत तमाम मेहनतकश,दलित,उत्पीड़ित, महिलाएं और जो इस फासीवादी जुल्मी निजाम के खिलाफ आवाज उठाते हैं या सवाल खड़ा करते हैं वे सब संघी फासिस्टो के निशाने पर हैं। ऐसे नफरत भरे हिंसक फासीवादी संस्कृति की जगह हमे शहीद भगत सिंह – अशफाकुल्ला खान-रामप्रसाद बिस्मिल- प्रीतिलता वड्डेदार- बिरसा मुंडा के साझी शहादत साझी विरासत की संस्कृति को ऊंचा उठाना है।
कसम के अखिल भारतीय शिविर में सभी वक्ताओं ने कहा कि इस खतरनाक चुप्पी को, जिसे शहीद कवि अवतार सिंह पाश कहते हैं मुर्दा शांति से भर जाना, को हम सब मिलकर तोड़ें। इसी उद्देश्य से जातिव्यवस्था और धार्मिक कर्मकांड के खिलाफ 15 वी शताब्दी के नवजागरण अभियान के अग्रदूत वसवन्ना, क्रांतिकारी विचारक संस्कृतिकर्मी प्रोफेसर कलबुर्गी और गौरी लंकेश जैसों की कर्मभूमि कर्नाटक के रायचूर में कसम के अखिल भारतीय शिविर का आयोजन 30 व31 मार्च को किया गया।क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच,देश के संस्कृति कर्मियों, युवाओं, विद्यार्थियों, जनवाद पसंद, अमन पसंद नागरिकों व देशभक्त अवाम से अपील करता है कि वे संघी मनुवादी फासीवादियों के दमन शोषण चक्र के बुलडोजर राज और नफरती संस्कृति को उखाड़ फेंकने के लिए तत्काल एक साथ मिलकर साझा सांस्कृतिक अभियान चलाएं और सच्चे लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता और जाति आधारित आरक्षण की रक्षा करें। शिविर में भारत के इतिहास और संस्कृति के सांप्रदायिककरण और विकृतिकरण के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया।

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