Cg Highcourt Big News: आखिर नियुक्त बीएड शिक्षकों का कुसुर क्या है ? हाईकोर्ट ने बीएड पास सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की रद्द

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रायपुर,2 अप्रेल ,आज छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाइकोर्ट ने अपने एक फैसले में बीएड पास सहायक शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी है । वहीं अब बीएड पास अभ्यर्थियों को दावेदारी खत्म हो गई है क्योंकि हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में बीएड मान्य नहीं होंगे केवल डीएलएड को ही मान्यता दी जाएगी । अभी बीएड पास जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई है उनकी नियुक्ति निरस्त कर छः सप्ताह में केवल डीएलएड अभ्यर्थियों को शामिल कर पुनरीक्षित चयन सूची जारी करने कहा गया है ।अब बीएड अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए भी नहीं बुलाया जाएगा । हाई कोर्ट ने अपने नियम कानून के तहत देख कर जो भी उचित लगा निर्णय दिया है लेकिन सवाल यह हैं कि आखिर बीएड वालों का कुसूर क्या है ? सरकार ने वैकेंसी निकाली और बीएड छात्रों ने नौकरी के लिए आवेदन भरा उनका चयन हुआ उनको नौकरी मिली तो उनका कुसूर क्या है कि उनको अब नौकरी से हाथ धोना पड़ रहा है । अगर डीएलएड को ही चयन करना था तो सरकार को रोका कौन था इसमें तो सरकार की गलती है । सरकार को लिखना था कि डीएलएड पास छात्र ही आवेदन करें तो बीएड वाले क्यों आवेदन करते । अब तो उनकी मेहनत भी गई और नौकरी भी गई । किसी बेरोजगार को रोजगार देना और फिर रोजगार छीन लेना कहां तक न्याय संगत है ? इन शिक्षकों का तो अब मुंह से निवाला छीन लिया गया है । डीएलएड को और नौकरी दे देना था प्रदेश में शिक्षकों के तो हजारों पोस्ट खाली पड़े हैं पर नौकरी छीनने की क्या आवश्यकता थी । अगर शिक्षक की नौकरी छिनी भी गई तो किसी दूसरी सरकारी सेवा में इन्हें एडजेस्ट कर सकते थे । यहां तो हर विभाग में सेवा का अवसर निकल सकते हैं । जब सरकार मुफ्त में बिना सेवा के पैसे दे सकती है तो काम कराकर क्यों नहीं दिए जा सकते । आखिर अब ये बीएड वाले शिक्षक कहां जाएंगे ? बहुतों का उनका अपना परिवार है जो उनकी नौकरी पर ही आश्रित है अब आखिर उस परिवार का क्या होगा ? वो तो सड़क पर आ जाएंगे। डीएलएड वालों से कोई रंज नहीं है पर बीएड वाले जिनकी रोजी रोटी खत्म है गई वो भी तो हमारे परिवार हैं । आगे से भले ही घोषित कर देते कि अब भविष्य में डीएलएड को ही नौकरी दी जाएगी पर अभी तो जो नियुक्त थे उनको तो काम करने देना था । उन्होंने कोई गलत रास्ते से नौकरी नहीं ली थी सरकार ने वैकेंसी निकाली थी तब उनके नियमों के तहत ही आवेदन किए थे । इसमें उनका कुसुर ही कहां है । क्या भाजपा की नई सरकार इस पर संज्ञान लेगी और इनको किसी दूसरी जगह नौकरी में चांस देगी । सबका साथ सबका विकास का नारा क्या सार्थक होते दिखेगा ? इस नई सरकार से उम्मीद ती कर ही सकते हैं । सरकार सहनुभूति पूर्वक इस पर विचार कर ले तो बहुत अच्छा होगा । यह बताना भी उचित होगा इनके मां बाप ने लाखों रुपए खर्च करके इनको बीएड कराएं हैं और एक बड़ा सपना पाला था कि नौकरी लग जाएगी । कोई कोई तो खेती किसानी जेवर सब बेचकर इनको बीएड पढ़ाएं हैं आखिर अब उनके अरमान का क्या होगा ?

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