Democracy or Dictatorship? क्या हमारा देश तानाशाही की ओर बढ़ता जा रहा है ? आजाद भारत के इतिहास में पहली बार है कि किसी सिटिंग चीफ मिनिस्टर को अरेस्ट किया गया

आजाद भारत में ये क्या हो रहा है ? क्या हमारी डेमोक्रेसी बचेगी या तानाशाही की ओर बढ़ता जा रहा है ?

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31 Min Read
क्या हमारी डेमोक्रेसी बचेगी
Highlights
  • क्या इंदिरा गाँधी भी डिक्टेटर थी ?
  • डिक्टेटरशिप का क्या मतलब हो सकता है ?
  • क्या ऐसे होंगी देश में फ्री और फेयर इलेक्शंस ?

Democracy or Dictatorship? क्या हमारा देश तानाशाही की ओर बढ़ता जा रहा है, किसी भी सच्चे देशभक्त के लिए जो सही मायनों में देश की परवाह करता है उसके लिए सवाल बहुत जरूरी है कुछ लोगों को डाउट हुआ था

कि क्या सही में ऐसा हो रहा है या नहीं हो रहा लेकिन पिछले एक महीने में जो कुछ हुआ है देश में उसे देखकर तो यकीनन आपकी आंखें खुल जानी चाहिए दिल्ली के चीफ मिनिस्टर अरविंद केजरीवाल को बिना मनी ट्रेल और बिना Conviction (अपराध सिद्ध किए बिना) अरेस्ट किया गया ।

Contents
Democracy or Dictatorship? क्या हमारा देश तानाशाही की ओर बढ़ता जा रहा है, किसी भी सच्चे देशभक्त के लिए जो सही मायनों में देश की परवाह करता है उसके लिए सवाल बहुत जरूरी है कुछ लोगों को डाउट हुआ थाDemocracy or Dictatorship? अखबारों में पेड एडवर्टाइजमेंट छापने तक नहीं दियाDemocracy or Dictatorship? तानाशाही अच्छी चीज होगी देश के लिए ?आजाद भारत के इतिहास में पहली बार है कि किसी सिटिंग चीफ मिनिस्टर को अरेस्ट किया गयाइनोसेंट अंट्टी बेल मिलना आपका अधिकार कंसीडर किया जाता हैDemocracy or Dictatorship? अरविंद केजरीवाल को चार लोगों की स्टेटमेंट्स के बल पर अरेस्ट कियाDemocracy or Dictatorship? एक के बाद एक समंस मिस किए जा रहे थेDemocracy or Dictatorship? नेताओं को धमकाया जाता है पैसे देकर सरकारों को गिराया जाता हैDemocracy or Dictatorship? क्या ऐसे होंगी देश में फ्री और फेयर इलेक्शंस ?Democracy or Dictatorship? मोदी हटाओ देश बचाओDemocracy or Dictatorship? सोनम वांगचुक भी एक बार ही सरकार को सपोर्ट करते थेडिक्टेटरशिप का क्या मतलब हो सकता है ?क्या इंदिरा गाँधी भी डिक्टेटर थी ?इमरजेंसी के समय में लोगों ने भारी संख्या में अपनी आवाज उठाई थी

इलेक्टोरल बंड्स इतिहास के सबसे बड़े घोटाले की खबरों को टीवी चैनलों से और अखबारों से गायब कर दिया गया, देश की सबसे बड़ी अपोजिशन पार्टी कांग्रेस कह रही है कि उनके बैंक अकाउंट्स को फ्रीज किए जा चुका है वो कैंपेन नहीं कर पा रहे प्रचार प्रसार रुका हुआ है ।

सालों पुराने केसेस को लेकर इलेक्शन से एकदम पहले इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन पर 1700 करोड़ का फाइन लगा दिया एवं रिपोर्ट किया जा रहा है, कम्युनिस्ट पार्टी पर भी 11 करोड़ का फाइन लगा दिया, देश भर से खबरें आ रही हैं कि कैसे अपोजिशन के कैंडिडेट्स डिक्लेयर होते ही उन पर ईडी और आईटी के नोटिसेज आ जा रहे हैं

Democracy or Dictatorship? अखबारों में पेड एडवर्टाइजमेंट छापने तक नहीं दिया

कांग्रेस का तो यह तक कहना है कि उन्हें अखबारों में पेड एडवर्टाइजमेंट छापने तक नहीं दिया जा रहा, क्या इस तरीके से इलेक्शंस लड़ी जाएंगी हम लोग क्या कर सकते हैं ?

Democracy or Dictatorship? तानाशाही अच्छी चीज होगी देश के लिए ?

यहां पर देश की डेमोक्रेसी को बचाने के लिए इन सब सवाल के जवाब इस आर्टिकल में समझते हैं और कुछ लोग जिन्हें अभी भी यह लगता है कि डेमोक्रेसी सुरक्षित है

या फिर जिन्हें लगता है कि तानाशाही अच्छी चीज होगी देश के लिए इनके सवालों को भी आंसर करते हैं

आजाद भारत के इतिहास में पहली बार है कि किसी सिटिंग चीफ मिनिस्टर को अरेस्ट किया गया

शुरुआत करते है अरविंद केजरीवाल के अरेस्ट से, यह आजाद भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी सिटिंग चीफ मिनिस्टर को अरेस्ट किया गया हो और वो भी तब जब कोर्ट में कोई गुनाह साबित तक नहीं हुआ

इससे पहले दिल्ली के एजुकेशन मिनिस्टर मनीष सिसोदिया को अरेस्ट किया था दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन को अरेस्ट किया था आम आदमी पार्टी के एमपी संजय सिंह को अरेस्ट किया था और ये सब लोग आज भी जेल में बंद हैं

मनीष सिसोदिया को जेल में 1 साल से ऊपर होने जा रहा है और सत्येंद्र जैन को तो 2 साल होने को हैं, सबसे हैरानी की बात यह है कि इनमें से किसी का भी गुनाह कोर्ट में साबित नहीं हुआ है

ईडी का आरोप है कि आम आदमी पार्टी के लीडर्स को ₹1 करोड़ की रिश्वत दी गई

2 साल से ईडी और सीबीआई इस केस को इन्वेस्टिगेट कर रही है जिनमे 500 से ज्यादा रेड मारे जा चुके हैं और 1000 से ज्यादा विटनेसे ला चुके हैं

लेकिन अभी तक एक भी सबूत इन्हें नहीं मिला इस चीज का जो साबित कर पाए कि आम आदमी पार्टी या इनके मिनिस्टर्स ने कुछ गलत किया हो मनीष सिसोदिया के लॉयर ने यही चीज बताने की कोशिश करी थी दिल्ली हाई कोर्ट को कि यहां पर कोई मनी ट्रेल नहीं है बल्कि इस पॉलिसी से देश की जनता को फायदा हुआ क्योंकि सरकार का रेवेन्यू बढ़ गया था इस पॉलिसी की वजह से जिसको बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है स्कूल और अस्पताल बनाने के लिए तो सवाल ये उठता है कि अगर कोई सबूत ही नहीं है तो कोर्ट इन्हें बेल क्यों नहीं दे रहा ? इसके पीछे कारण है पीएमएलए (PMLA ACT 2018) प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2018 का कानून

कहा जाए तो 2018 में जो इस कानून में अमेंडमेंट करी गई थी मोदी सरकार के द्वारा इस अमेंडमेंट में सरकार ने बेल की कंडीशंस बदल दी, बेल लेना को और भी मुश्किल बना दिया गया ।

इनोसेंट अंट्टी बेल मिलना आपका अधिकार कंसीडर किया जाता है

INNOCENT UNTIL BAIL मिलना आपका अधिकार कंसीडर किया जाता है लेकिन पीएमएलए में अब क्या हो गया है, गिल्टी अंट्स आपको तब तक बेल नहीं मिलेगी जब तक आप अपने आप को इनोसेंट ना साबित करो इसी 2018 की अमेंडमेंट में ईडी को और

ताकत भी दे दी गई थी इन चीजों को अरविंद केजरीवाल ने खुद भी एक्सप्लेन किया था अपनी अरेस्ट से पहले ईडी के केसेस में जमानत क्यों नहीं मिल रही लोगों को अब यह पूरा कानून इन्होंने ईडी में पलट दिया अब इसमें हो गया यू आर गिल्टी टिल प्रूव्ड

इनोसेंट इस कानून में इन्होंने यह लिखा है कि आपके ऊपर आरोप लगेगा आपके ऊपर एफ आईआर होगी झूठा सच्चा जो मर्जी आरोप लगा दें आपको गिरफ्तार कर लिया जाएगा

और आपको बेल तब तक नहीं मिलेगी जब तक आपका मुकदमा पूरा नहीं हो जाता और आप इनोसेंट प्रूव नहीं हो जाते लेकिन बात सिर्फ इतनी सिंपल नहीं है दोस्तों अरविंद केजरीवाल के इस अरेस्ट के पीछे एक इलेक्टोरल ब ब घोटाले का भी कनेक्शन है

Democracy or Dictatorship? अरविंद केजरीवाल को चार लोगों की स्टेटमेंट्स के बल पर अरेस्ट किया

कोर्ट में जो हियरिंग हुई उसके अनुसार अरविंद केजरीवाल को चार लोगों की स्टेटमेंट्स के बल पर अरेस्ट किया ईडी ने उनमें से एक इंसान है शरत चंद्र रेड्डी जो कि अरबिंदो फार्मा कंपनी के हेड हैं 9थ नवंबर 2022 की बात है कि ईडी ने रेडी को बुलाया था

पूछता आज के लिए इस एलेज लीकर स्कैम के केस में उन्होंने जो स्टेटमेंट दी उस दिन वो केजरीवाल के फेवर में थी लेकिन अगले ही दिन 10 नवंबर 2022 को ईडी इन्हें अरेस्ट कर लेती है

इनके अरेस्ट होने के सिर्फ 5 दिन बाद इनकी कंपनी और बंदो फार्मा ने ₹ करोड़ का चंदा डोनेट किया बीजेपी को इलेक्टोरल बंड्स के जरिए ये चीज हम जानते हैं इलेक्टोरल बंड डाटा को देखकर आप क्रोनोलॉजी समझ लीजिए ये करीब

6 महीने तक जेल में रहते हैं अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में कहा कि इन्होंने नौ अलग-अलग स्टेटमेंट्स दी इस छ महीने के पीरियड में जो कि सारी स्टेटमेंट्स केजरीवाल के फेवर में थी उसकी अरेस्ट हुई उसके बाद उसके नौ स्टेटमेंट्स होते हैं

मैम नौ स्टेटमेंट्स वो मेरे खिलाफ नहीं बोलता उसके बाद छ महीने उसको अरेस्ट करने के बाद 25 अप्रैल को वो ूल जाता है लेकिन 25 अप्रैल 2023 को छ महीने जेल में रहने के बाद अगली स्टेटमेंट जो देते हैं वो केजरीवाल के खिलाफ होती है

अगले ही महीने मई 2023 को ईडी इन्हें बेल दे देती है और जून 2023 में यह ईडी के अप्रूवर बन जाते हैं इस केस में और बेल मिलने के करीब 6 महीने बाद इनकी कंपनी ₹ करोड़ रप की और डोनेशन करती है

बीजेपी को अब देख रहे हो दोस्तों किस लेवल का खेल खेला जा रहा है इलेक्टोरल बंड्स का डाटा हमें बताता है कि टोटल में इनकी कंपनी ने 52 करोड़ रप की बॉन्ड्स खरीदी थी

जिनमें से 2 तिहाई करीब 34 करोड़ र बीजेपी के पास गई 15 कर करोड़ बीआरएस के पास और ढाई करोड़ टीडीपी के पास यही कारण कि आतिशी ने कहा कि इस एलेज लिकर स्कैम का जो मनी ट्रेल है वो आम आदमी पार्टी के पास नहीं

बल्कि बीजेपी के पास जाता है ये है मनी ट्रेल शरत चंद्र रेड्डी की कंपनियों द्वारा दिया गया भारतीय जनता पार्टी के बैंक अकाउंट में पैसा जो बाकी तीन लोग हैं

जिनकी स्टेटमेंट्स की वजह से अरविंद केजरीवाल को अरेस्ट किया गया उनकी कहानियों में भी ऐसी ही क्रोनोलॉजी आपको देखने को मिलेंगी

Democracy or Dictatorship?

Democracy or Dictatorship? एक के बाद एक समंस मिस किए जा रहे थे

यही के अरविंद केजरीवाल एक के बाद एक समंस मिस किए जा रहे थे ईडी के और उन्होंने ईडी के इन सारे समंस को इल्लीगल ठहराया उनके अनुसार ईडी का मकसद सिर्फ और सिर्फ इन्हें किसी भी बहाने से अरेस्ट करना था

जिससे कि पार्टी को खत्म किया जा सके और दिल्ली और पंजाब की सरकारों को गिराया जा सके एक मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग है इस केस की जब अरविंद केजरीवाल खुद को कोर्ट में डिफेंड कर रहे थे

Arvind Kejriwal के अरेस्ट पर रिएक्ट करते हुए कांग्रेस पॉलिटिशियन राहुल गांधी ने कहा डरा हुआ तानाशाह एक मरा हुआ लोकतंत्र बनाना चाहता है

Democracy or Dictatorship? नेताओं को धमकाया जाता है पैसे देकर सरकारों को गिराया जाता है

नेताओं को धमकाया जाता है पैसे देकर सरकारों को गिराया जाता है नेताओं को जेल में डाला जाता है यह पूरी की पूरी मैच फिक्सिंग करने की कोशिश की जा रही है

मीडिया समेत सभी संस्थाओं पर कब्जा पार्टियों को तोड़ना कंपनियों से हफ्ता वसूली मुख्य विपक्षी दल का अकाउंट फ्रीज करना और अब तो चुने हुए मुख्यमंत्रियों की गिरफ्तारी भी आम बात हो गई है

कांग्रेस पार्टी को यहां अलग तरीकों से खत्म करने की कोशिश करी जा रही है और यह कोशिश भी कई महीनों से जारी है पिछले साल अगस्त के महीने में राहुल गांधी पर एक बहुत ही अजीबोगरीब डिफेमेशन केस किया गया

जिसके जरिए उन्हें डिसक्वालीफाई करने की कोशिश करी गई थी इस केस की मैंने डिटेल में इस वीडियो में बात करी थी जिसमें सूरत के कोर्ट ने 2 साल की सजा सुनाई राहुल गांधी को वो तो सुप्रीम कोर्ट ने इसे होने से रोक दिया नहीं तो

आज के दिन देश की दो सबसे बड़ी अपोजिशन पार्टीज के टॉप लीडर्स जेल में होते हैं लेकिन अब क्या किया जा रहा है कांग्रेस का दावा है कि उनके बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया है इसके पीछे क्या कारण दिया जा रहा है

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है कि कांग्रेस ने अपने रिटर्न्स फाइल नहीं किए थे डेडलाइन के टाइम पर इसके अलावा एक 31 साल पुराना केस कांग्रेस का खोला जा रहा है 1993 1994 का इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का कहना है

कि वहां पर कुछ हुआ था उस समय पर अब हम उसका पीनल चार्जेस मांगते हैं और 29 मार्च को आईटी डिपार्टमेंट ने 1700 करोड़ का नोटिस दिया कांग्रेस पार्टी को और सेम दिन रिपोर्ट में आया कि

कम्युनिस्ट पार्टी पर भी 11 करोड़ रुप की पेनल्टी लगा दी आईटी डिपार्टमेंट ने किस कारण से क्योंकि उन्होंने पुराना पैन कार्ड यूज किया था हर एक अपोजिशन पार्टी को इसी तरीके से टारगेट किया जा रहा है

Democracy or Dictatorship? क्या ऐसे होंगी देश में फ्री और फेयर इलेक्शंस ?

क्या ऐसे होंगी देश में फ्री और फेयर इलेक्शंस हालातों को देखकर इस फिल्म की याद आती है द डिक्टेटर नाम की एक कॉमेडी फिल्म जो कि एक सटीरिकल कहानी सुनाती है

एक फिक्शनल डिक्टेटर की रेस जीतने के लिए डिक्टेटर किसी भी हद तक जाने को तैयार है आज जो भी यह सब हो रहा है देश में इसकी खबर दुनिया भर में पहुंच रही है दोस्तों पहले जर्मनी की तरफ से स्टेटमेंट आ आई फिर अमेरिका ने स्टेटमेंट दी

और अब तो यूनाइटेड नेशंस भी कहने लग रहा है वो उम्मीद करते हैं कि इंडिया में लोग फ्री और फेयर तरीके से वोट कर पाएंगे सबके राइट्स को प्रोटेक्ट किया जाएगा सरकार के इन कारनामों की वजह से दुनिया भर में भारत की रेपुटेशन नीचे गिर रही है

कुछ बीजेपी के पॉलिटिशियन तो अब ओपनली कह रहे हैं हम 400 से ज्यादा सीट लाना चाहते हैं ताकि हम देश का कॉन्स्टिट्यूशन बदल सकें इस खबर को देखो 27 मार्च को शिवसेना ने अपने पॉलिटिशियन अमोल कीर्तिकर को कैंडिडेट घोषित किया यह हुआ

सुबह के 9:00 बजे और सिर्फ एक घंटे बाद 10 बजे इन्हें ईडी का नोटिस आ गया अमोल कीर्तिकर जी जैसे उनका नाम घोषित हुआ उनको ईडी का समंस आया ये दबाव तंत्र है ये डराने की कोशिश है एनसीपी के लीडर प्रफुल पटेल याद है

इन पर एक भारी आरोप लगाया गया था करप्शन केस का बीजेपी के द्वारा ठ महीने पहले इन्होंने लेकिन अपनी पार्टी तोड़कर बीजेपी की अलायंस जवाइन कर ली थी और इसका नतीजा क्या हुआ 29 मार्च की इस खबर को देखो जो भी केस सीबीआई ने चलाया था

इनके खिलाफ उसे अब बंद कर दिया गया अब मोदी सरकार कहती है कि यहां कोई करप्शन नहीं था ऐसे ही बहुत से और केसेस हैं जैसे कि नवीन जिंदल का केस देखो ये कांग्रेस के कैंडिडेट थे इन पर कोल गट स्कैम का आरोप लगा था

लेकिन 25 मार्च कोय बीजेपी जवाइन करते हैं और अचानक से इन्हें बीजेपी का टिकट मिल जाता है ये सब देखने के बाद भी कुछ लोग इतने बेशर्म है कि वो फिर भी कहते हैं अरे अगर ये नहीं तो और कौन हालत देख रहे हो देश में क्या हो गई है

हालत ये हो गई है कि कोई भी और ऑप्शन यहां पर बेहतर है देश में इलेक्शंस को फेयर तरीके से कंडक्ट करवाने की रिस्पांसिबिलिटी आती है इलेक्शन कमीशन के ऊपर लेकिन वहां अपनी अलग कहानी चल रही है

9th मार्च 2024 को इलेक्शन कमिश्नर अरुण गोयल ने अपनी पोस्ट से रिजाइन कर दिया चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार का कहना था कि उन्होंने यह इस्तीफा दिया क्योंकि हेल्थ कंसर्न्स थे उनको लेकिन

द हिंदू अखबार के अनुसार उनके पास के जो लोग थे उनका कहना है कि एक्चुअली में अरुण गोयल की जो हेल्थ थी वो परफेक्ट थी कारण इसके पीछे ये बताया जा रहा है कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार और

इलेक्शन कमिश्नर अरुण गोयल के बीच में असहमति आं थी अब इसके अलावा एक और इलेक्शन कमिश्नर की पोस्ट खाली पड़ी थी देश में तीन इलेक्शन कमिश्नर्स होते हैं

इनके रेजिग्नेशन के बाद दो पोस्ट खाली हो गई दो नए इलेक्शन कमिश्नर्स को कैसे अपॉइंट्स करेगा मैंने पिछले वीडियो में आपको बताया था कि मार्च 2023 में पांच जज कॉन्स्टिट्यूशन बेंच था सुप्रीम कोर्ट का जिन्होंने ऑर्डर किया कि इलेक्शन कमिश्नर्स की

अपॉइंटमेंट होनी चाहिए तीन लोगों की कमेटी के द्वारा प्राइम मिनिस्टर लीडर ऑफ अपोजिशन और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया लेकिन मोदी सरकार करीब 35 महीने पहले एक नया कानून लाई यहां पर और कहा कि नहीं इलेक्शन कमिश्नर्स की अपॉइंटमेंट में

चीफ जस्टिस नहीं होंगे हमारी ही सरकार का यूनियन मिनिस्टर होगा और प्राइम मिनिस्टर होंगे और एक लीडर ऑफ अपोजिशन सही इसके अनुसार दो नए इलेक्शन कमिश्नर्स अपॉइंटमेंट बनाई गई उसमें थे प्रधानमंत्री मोदी दूसरे थे होम मिनिस्टर अमित शाह

और तीसरे थे एक अपोजिशन पॉलिटिशियन अधीर रंजन चौधरी लेकिन इस अपॉइंटमेंट के वक्त भी प्रॉपर प्रोसीजर नहीं फॉलो किया गया अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि एक रात पहले उन्हें 212 नामों की लिस्ट दी गई और मीटिंग से एकदम पहले उन्हें छह नामों की

शॉर्ट लिस्ट दी गई और उन्हें समय ही नहीं दिया गया जज करने के लिए कि किसे का उनका एक्सपीरियंस कितना है उनकी इंटीग्रिटी कितनी है प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने अपनी मर्जी से इन दो इलेक्शन कमिश्नर्स को अपॉइंटमेंट ने अपनी तरफ से कंसर्न

जरूर एक्सप्रेस किया कि ये गलत है कि इस तरीके से सही डिटेल्स नहीं दिखाई गई लेकिन उसके अलावा कोर्ट ने कोई एक्शन नहीं लिया कोर्ट ने कहा कि बहुत केस हो जाएगा अगर हम दो अपॉइंटमेंट को रोक दे

तो तो कौन थे ये दो नए इलेक्शन कमिश्नर्स जिन्हें अपॉइंट्स कुमार एक रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर जो कि एक्चुअली में 2016 से 21 के बीच में होम मिनिस्ट्री के अंदर काम करते थे

अंडर अमित शाह दूसरे हैं सुखबीर संधू जो कि रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर हैं और 2014 से लेकर 2023 के बीच में इन्होंने पहले मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट में काम किया

चेयर पर्सन ऑफ एनएचएआई रहे और चीफ सेक्रेटरी रहे उत्तराखंड के क्या इन इलेक्शन कमिश्नर से एक्सपेक्ट किया जा सकता है कि यह फेयर तरीके से लोकसभा की इलेक्शंस कंडक्ट करवाएंगे यह टाइम

ही बताएगा अब हमारे देश में अगर कोई इंस्टीट्यूशन सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तो जिम्मेदारी जुडिशरी पर आती है लेकिन देश के कोर्ट्स में भी जो कहानी चल रही है वो भी ज्यादा अलग नहीं है

8 मार्च को एक बहुत ही शॉकिंग केस देखने को मिला कलका हाई कोर्ट के जज अभिजीत गांग उपाध्याय ने अपनी पोजीशन से रिजाइन कर दिया और कुछ ही दिनों बाद फॉर्मली भारतीय जनता

पार्टी को जॉइन कर लिया इन्होंने खुद एडमिट किया कि रेजिग्नेशन से पहले ही इन्होंने बीजेपी को अप्रोच किया था और एक रिसेंट इंटरव्यू में इन्होंने बताया कि इन्हें बड़ी मुश्किल होती है

गांधी और गोडसे के बीच चुनने में ऐसे जजेस अगर पॉलिटिकल पार्टीज के कांटेक्ट में रहेंगे तो क्या हमारी जुडिशरी को आजाद कहा भी जा सकता है आप ही बताइए कोर्ट कचहरी के सिस्टम में अक्सर एक

बात बार-बार दोहराई जाती है बेल इज द रूल जेल इज एन एक्सेप्शन इसका मतलब है कि बेल मिलना अधिकार है लोगों का लेकिन आज के दिन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कह रहे हैं

कि डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स में जेल रूल बनता जा रहा है लोअर कोर्ट्स के जजेस बेल देने से झिझक रहे हैं एडवोकेट दुषें दवे के अनुसार जजेस पर प्रेशर है एक डर का माहौल है जजेस को अपनी फैमिलीज की चिंता

होती है अब कुछ लोग कहेंगे कि अगर देश में हालत सही में इतनी बुरी है तो मैं यह वीडियो कैसे बना पा अगर देश सही में डिक्टेटर की ओर गिरता जा रहा है

तो मेरा मुंह बंद कैसे नहीं कराया गया अभी तक अगर लोकतंत्र खत्म हो जाए तो ऐसी चीज चल ही नहीं सकती है यहां पे द प्रिंट के शेखर गुप्ता ने भी यही आर्गुमेंट उठाया था मेरे पिछले वीडियो के बाद इन सब लोगों के लिए मेरा एक

सवाल है स्क्रीन पर इस वीडियो को देखो और मुझे बताओ कि ये गाड़ी टूटी हुई है या सही सलामत है अब कोई भी नॉर्मल इंसान कहेगा ओबवियसली भाई टूटी हुई गाड़ी है

लेकिन शेखर गुप्ता का लॉजिक अगर यहां इस्तेमाल किया जाए तो वो कहेंगे देखो गाड़ी में ड्राइवर बैठा है गाड़ी चल रही है इसका मतलब गाड़ी सही सलामत है कोई सेंस है इस बात का मेरा मुंह बंद नहीं हुआ अभी तक

इसकी खुशी मना रहे हो और उनका क्या जिनका मुंह बंद ऑलरेडी कराया जा चुका है इस न्यूज़ हेडलाइन को देखिए छह लोगों को अरेस्ट किया गया और 100 से ज्यादा एफआईआर कराई गई सिर्फ इसलिए क्योंकि लोग पोस्टर चिपका रहे थे

Democracy or Dictatorship? मोदी हटाओ देश बचाओ

मोदी हटाओ देश बचाओ के लेट पवन जैसवाल पर चार सेक्शंस के अंडर केसेस फाइल किए गए सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने यह रिपोर्ट किया स्कूल

में मिडडे मील के तौर पर बच्चों को नमक के साथ रोटियां खिलाई जा रही है ये एक बहुत बड़ी लॉजिकल फैले स है जिसे फॉल्स डिलेमा कहा जाता है

चीजों को जबरदस्ती ब्लैक एंड वाइट ट बना देना कि या तो देश एक डेमोक्रेसी है या फिर एक डिक्टेटरशिप है बीच में कुछ हो ही नहीं सकता मैंने कभी नहीं कहा था कि देश ऑलरेडी 100% डिक्टेटरशिप बन गया मैंने कहा था देश

डिक्टेटरशिप की ओर गिर रहा है और अभी भी यही कह रहा हूं ये डेमोक्रेसी और डिक्टेटरशिप ये एक स्पेक्ट्रम है एक स्केल है बहुत बड़ा अलग-अलग तरीके हैं जो डेमोक्रेसी मेजर करने के वो भी जीरो टू 10 के बीच में नंबर देते हैं अलग-अलग टर्म्स का इस्तेमाल

किया जाता है अगर बहुत अच्छी चल रही है देश में डेमोक्रेसी तो फुली फंक्शनल लिबरल डेमोक्रेसी उसके बाद है वर्किंग डेमोक्रेसी खराब है डेमोक्रेसी तो फ्लड डेमोक्रेसी उसके बाद डेफिशियेंसी में आ जाते हैं

और यहां डेमोक्रेसी की गाड़ी पर ऐसे डेंट मारे हैं इस तरीके से धजिया उड़ा दी गई है इस गाड़ी की कि लोग हैरान है देखकर कि गाड़ी अभी भी चल कैसे पा रही है अगर आप अपने आप

को देशभक्त कहते हो और गाड़ी की यह हालत देखकर भी अपनी आवाज नहीं उठाते तो क्या आप देश भक्त कहलाने लायक भी हो इसी महीने डेमोक्रेसी रिपोर्ट 2024 रिलीज हुई स्वीडन के वी डेम इंस्टिट्यूट के द्वारा और इसने इंडिया को पता है

कौन सी कैटेगरी में डाला है इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी की कैटेगरी में डाला है फुल डिक्टेटरशिप से दो कदम दूर इसका मतलब है कि देश में मल्टीपार्टी इलेक्शंस तो हो रही हैं लेकिन एक फेयर लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं मिल पा रही है लोगों की आजादी खत्म करी जा रही है

Democracy or Dictatorship? सोनम वांगचुक भी एक बार ही सरकार को सपोर्ट करते थे

सोनम वांगचुक भी एक बार ही सरकार को सपोर्ट करते थे जब आर्टिकल 370 हटाया गया था मेरे ख्याल से यह लद्दाख के लिए बहुत ही खुशी की बात है जो उसकी हक थी वो उसे वापस मिला है लेकिन जब उनके एरिया में कोई प्रॉब्लम आई

और उन्होंने अपनी आवाज उठाने की कोशिश करी 21दिन तक अनशन पर बैठे ठने के बावजूद भी सरकार का मुंह नहीं खुला डिक्टेटरशिप में एक डिक्टेटर सिर्फ अपने अहंकार अपनी पावर अपने पैसे से मतलब

रखता है उसे जनता की कोई फिक्र नहीं होती बहुत से किसान भी सरकार के समर्थक थे लेकिन जब उन्हें पता चला कि उन्हें अपनी मांगे रखने का अधिकार भी नहीं दिया जाएगा सारा मीडिया उन्हें देशद्रोही करके बदनाम करेगा तब उन्हें एहसास हुआ

डिक्टेटरशिप का क्या मतलब हो सकता है ?

डिक्टेटरशिप का क्या मतलब हो सकता है आप एक स्टूडेंट हो पेपर लीक होता है चुप बैठे रहो! , बढ़ती महंगाई के खिलाफ आपको आवाज उठानी है? , दबा दी जाएगी

अपनी डेली लाइफ में किसी भी तरीके का ना इंसाफ अगर आप सह रहे हो आपके पास कोई ऑप्शन नहीं बचेगा अपना मुंह बंद करके चुप बैठे रहने के अलावा बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर तो यह चीज हम ऑलरेडी

होते हुए देख सकते हैं अगस्त 2023 में मिनिस्टर ऑफ स्टेट जितेंद्र सिंह ने पार्लियामेंट को बताया कि 960000 से ज्यादा सेंट्रल गवर्नमेंट जॉब्स वेकेंट पड़ी है प्राइवेट जॉब्स की बात करी जाए

तो हायरिंग प्लेटफॉर्म इनडीड ने फरवरी के इस साल में बताया कि दिसंबर 2021 से फ्रेशर जॉब पोस्टिंग्स डिक्लाइन होती जा रही हैं मार्च 2024 की ये रिपोर्ट फ्रंटलाइन की है आईटी सेक्टर में भी हायरिंग डिक्लाइन देखने को मिल रहा है

जॉब्स की सिचुएशन इतनी खराब है कि हरियाना सरकार को 10000 से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट लेबर की नौकरियां एडवर्टाइज करनी पड़ी इजराइल में एक ऐसा देश जो वॉर जोन बना बैठा है

हरियाणा के यूथ को वहां भेजा जा रहा है सरकार के द्वारा यह हालत है देश में जॉब्स की और महंगाई की तो क्या ही बात करनी पेट्रोल का दाम 90 से लेकर ₹10 तक

पहुंच चुका है जनवरी 2024 की रिपोर्ट बताती है कि यूनाइटेड नेशंस का जो फूड प्राइस इंडेक्स है वो ग्लोबल फूड इंफ्लेशन को – 10.1 पर डालता है यानी दुनिया भर में खाने के प्राइस कम हो रहे हैं

लेकिन इंडिया में फूड प्राइस इंडेक्स इंफ्लेशन क्या है दिसंबर 2023 की 99.5 पर सरकार खुद 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को फ्री खाना बांटती है बताओ क्या जरूरत पड़ी 80 करोड़ लोगों को

फ्री खाना देने की ये तभी हो सकता है जब इन लोगों के पास खाना खाने तक के पैसे नहीं है अब यह सब सुनने के बाद अभी भी कुछ लोग कहेंगे कि भाई तू सिर्फ मोदी सरकार के बारे में क्यों बोल रहा है

क्या इंदिरा गाँधी भी डिक्टेटर थी ?

बट व्हाट अबाउट इंदिरा गांधी? वो भी तो डिक्टेटर थी उनकी उनके डिक्टेटर वाली चीजों के बारे में क्यों नहीं बात करता ये समाज ये देश, फिर से एक फालतू का आर्गुमेंट है इसे एक रेड हैरिंग फैले कहा जाता है

इमरजेंसी के समय में लोगों ने भारी संख्या में अपनी आवाज उठाई थी

इमरजेंसी के समय में लोगों ने भारी संख्या में अपनी आवाज उठाई थी और उसके बाद जो इलेक्शंस हुई उसमें इंदिरा गांधी को हरा दिया था उसी जज्बे से आज देश की जनता को इस अनडिक्लेयर्ड इमरजेंसी के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है अगर आप

भारत माता की जय कहते हो तो भारत माता को बचाने के लिए तैयार भी रहो अगर गांधी जी भगत सिंह नेताजी बोस की रिस्पेक्ट करते हो तो उनके जैसा जज्बा भी लेकर आओ जो आजादी उन्होंने अपना खून पसीना बहाकर दिलवाई है उस आजादी की रक्षा

करना इंडियन डेमोक्रेसी को बचाना हमारा धर्म है जरूरत है हम देश को बचा सकते हैं हम देश को बचाएंगे इंकलाब जिंदाबाद जय

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