Tuesday, September 21st, 2021

मोल्‍डो वार्ता से निकली सुलह की रात, गोगरा हाइट्स से पीछे हटी भारत और चीन की सेना

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से चल रहा सीमा गतिरोध अब समाप्त होता दिख रहा है. 12वें राउंड के कमांडर लेवल की बातचीत के बाद दोनों सेनाएं गोगरा इलाके से पीछे हट गई है. 4-5 अगस्त के दौरान दोनों सेनाओं ने यह कार्रवाई की है.

विदेश मंत्रियों की बैठक में भी इन इलाकों से पीछे हटने का फैसला लिया गया था. भारत और चीन की सेना के द्वारा बनाए गए सभी अस्‍थायी और उससे संबंधित अन्‍य ढांचों को ध्‍वस्‍त कर दिया गया है और उसे पारस्परिक रूप से सत्यापित भी किया गया है.

12वें दौर की बैठक में पीछे हटने पर बनी थी सहमति

अभी कुछ दिन पहले ही भारत और चीन के बीच मोल्‍डो में हुई 12वें दौर की बातचीत में दोनों देश पेट्रोल पॉइंट 17A से सैनिकों को हटाने पर सहमत हुए थे, जो पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में दोनों देशों के बीच फ्रिक्शन पॉइंट में से एक है.

12वें दौर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच पीपी-17A जिसे गोगरा भी कहा जाता है, से पीछे हटने का समझौता हुआ था. दोनों पक्षों के बीच अंतिम अलगाव इस साल फरवरी में हुआ था जब वे पैंगोंग झील के किनारे से अलग हो गए थे

वार्ता के बाद जारी बयान के अनुसार, ‘दोनों पक्षों के बीच भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर बातचीत हुई. बैठक का दौर रचनात्मक रहा, जिसने आपसी समझ को और बढ़ाया. दोनों पक्ष मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल के अनुसार इन शेष मुद्दों को शीघ्रता से हल करने और बातचीत और वार्ता की गति को बनाए रखने पर सहमत हुए.’

15 जून 2020 को गलवान घाटी में हुई थी हिंसक झड़प

भारत और चीन की सेनाओं के बीच सीमा पर यह गतिरोध पिछले साल मई में पैंगोंग झील इलाके में संघर्ष से शुरू हुआ था और दोनों पक्षों ने उसके बाद से वहां अपने सैनिकों और भारी हथियारों की तैनाती बढ़ाई है. पिछले चार दशकों में सबसे बड़े टकराव में 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में झड़प में भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. झड़प के 8 महीने बाद चीन ने भी स्वीकार किया कि इसमें उसके चार सैन्यकर्मी मारे गए थे. फिलहाल एलएसी पर संवेदनशील सेक्टरों में दोनों पक्षों की ओर से करीब 50 से 60 हजार सैनिक तैनात हैं.

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