Sunday, May 22nd, 2022

रेलवे ने शुरू की बायोमेट्रिक टोकन मशीन, अब जनरल डिब्बे में मिलेगी ‘रिजर्व क्लास’ जैसी सुविधा!

भारतीय रेलवे ने बायोमेट्रिक टोकन मशीन लॉन्च किया है. कोरोना में मुसाफिरों की सुरक्षा और एहतियात को ध्यान में रखते हुए यह मशीन शुरू की गई है. यह मशीन सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर साउथ सेंट्रल रेलवे ने लॉन्च की है. सिकंदराबाद स्टेशन पर लगने वाली ऐसी यह पहली मशीन है.

जनरल डिब्बे में यात्रियों को चढ़ते वक्त भारी भीड़ का सामना करना पड़ता है. रेलवे प्रशासन को भी इस भीड़ को काबू में करने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है. कोरोना काल में यह कतई उचित नहीं कि रेलवे स्टेशनों पर भीड़ उमड़े और यात्री दो गज की दूरी के नियम की धज्जियां उड़ाएं. इसे देखते हुए ट्रेन में बोर्डिंग को आसान बनाने के लिए बायोमेट्रिक टोकन मशीन की व्यवस्था शुरू की गई है.

टोकन से क्या होगा फायदा

इस मशीन से हर यात्री के लिए एक टोकन जनरेट होगा और उसी टोकन के सहारे अपनी-अपनी बारी से पैसेंजर ट्रेन में चढ़ेंगे. ध्यान रहे कि यह व्यवस्था पूरी तरह से अनारक्षित डिब्बे के लिए है क्योंकि रिजर्व क्लास में यात्रियों को पहले से पता होता है कि किस कोच में किस सीट पर बैठना है. इसलिए रिजर्व क्लास में भीड़ अपने आप नियंत्रित रहती है. अनारक्षित क्लास में ऐसा कोई बंदोबस्त नहीं होता और लोग एक साथ उमड़ पड़ते हैं. इससे कोरोना काल में ज्यादा खतरा हो सकता है. लिहाजा साउथ सेंट्रल रेलवे ने यह बायोमेट्रिक मशीन शुरू की है.

भीड़भाड़ से मिलेगा छुटकारा

ट्रेन पर चढ़ने के दौरान अत्यधिक भीड़ और कभी-कभार झगड़े की नौबत को देखते हुए बायोमेट्रिक मशीन लॉन्च की गई है. यह मशीन हर पैसेंजर का नाम, पीएनआर नंबर, ट्रेन नंबर और गंतव्य स्थान का रिकॉर्ड रखती है. मशीन पर यात्री को यह जानकारी देनी होती है. इसके बाद बायोमेट्रिक मशीन आपका फोटो और फिंगर प्रिंट को कैप्चर करेगी. ये सब जानकारी देने के बाद मशीन एक टोकन जनरेट करेगी. इस टोकन पर सीरियल नंबर और कोच नंबर लिखा होता है. यात्री को कोच नंबर के हिसाब से ही बताई गई सीट पर बैठना होता है.

बायोमेट्रिक टोकन मशीन का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यात्रियों के द्वारा ट्रेन में की जाने वाली आपराधिक वारदात पर नकेल कसी जा सकेगी. चूंकि रेलवे के पास हर यात्री की डिटेल होगी, इसलिए कोई भी अपराध होने पर आसानी से धरपकड़ हो सकेगी. हो सकता है कि बायोमेट्रिक मशीन में जमा होने वाले फोटो और फिंगरप्रिंट के डर से आपराधिक तत्व ट्रेन में चढ़ने से बचें. इससे रेल की यात्रा सुरक्षित हो सकेगी.

साउथ सेंट्रल रेलवे के मुताबिक, बायोमेट्रिक मशीन का बड़ा फायदा स्टेशनों पर भीड़ रोकने में होगा. चूंकि यात्रियों को पहले से कोच नंबर मिलेगा, इसलिए वे घंटों में लाइन खड़ाकर ट्रेन में बैठने का इंतजार नहीं करेंगे. बायोमेट्रिक मशीन से यात्री को टोकन लेते वक्त ही पता चल जाएगा कि किस कोच में बैठना है, तो वह स्टेशन या ट्रेन के पास तभी जाएगा जब वह आएगी.

प्लेटफॉर्म पर नहीं होगी भीड़

अभी जनरल क्लास के यात्रियों को कई घंटे पहले स्टेशनों पर जमा होते देखा जाता है क्योंकि उन्हें ट्रेन में चढ़ने की चिंता और भीड़ से बचने की फिक्र होती है. यात्री को एक बार टोकन मिल जाए तो वह ट्रेन खुलने के 15 मिनट पहले ही प्लेटफॉर्म पर जाएगा और आराम से अपनी कोच में दाखिल होगा. टोकन मशीन से रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की जरूरत और काम कम हो जाएगा क्योंकि पुलिस फोर्स को प्रशासनिक काम में ज्यादा माथापच्ची करनी होती है. बायोमेट्रिक मशीन सबसे पहले 14 सितंबर 2021 को लॉन्च की गई थी. सिकंदराबाद स्टेशन पर बहुत जल्द दूसरी बायोमेट्रिक मशीन भी लगेगी.

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