Friday, July 30th, 2021

Maharana Pratap Jayanti 2021 – महाराणा प्रताप की आज 481 वी जयंती पर विशेष

महाराणा प्रताप Maharana Pratap की आज 481 वी जयंती पर विशेष

Maharana Pratap की आज 481 वी जयंती पर विशेष : रायपुर,(न्यूज़ हसल इंडिया), वर्तमान में हम भले ही हम सभी सफलता के शिखर पर हो, जब तक हम इतिहास के महान पुरुषों को याद कर उनके चरित्रों से प्रेरणा नहीं ले लेते। तब तक हमारा जीवन अधुरा- अधुरा सा लगता है। आज महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की 481 वी जयंती है (Maharana Pratap Jayanti 2021)महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का जन्म  9  मई 1540  को कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था। वे पिता राणा उदय सिंह और माता महारानी जयवंता कंवर के बेटे थे। महाराणा प्रताप एक वीर और प्रतापी राजा थे।

जिन्होंने वीरता के बल पर मुगलों के साथ एक लम्बे समय तक संघर्ष किया। उन्होंने हल्दी घाटी की युद्ध में काफी अहम् भूमिका निभाई थी।  1556  में उन्होंने हल्दी घाटी युद्ध में बहुत ही कम राजपूत सेना के साथ मुग़ल सरदार राजा मानसिंह की बहुत ही बड़ी सेना के साथ चतुराई से सामना किया। महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) का चरित्र इतना मजबूत था कि उनकी सेना में भी देशभक्ति का जस्बा बहुत ही मजबूत था जिसके चलते महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को झाला मानसिंह ने कहा मैं अपने प्राण दे रहा हु महाराणा को युद्ध भूमि से जाने के लिए कहा। इतने  बड़े युद्ध में उनके घोड़े चेतक की मृत्यु भी हो गई जो काफी चालक और चतुर था।

जीवन में कोई भी सफलता माता- पिता के आशीर्वाद के बिना अधुरी होती है। ऐसे में महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने भी तलवार बाजी के गुर भी अपने पिता से बचपन में ही सीखे थे। बचपन में जब वे अपने संगी साथियों के साथ खेल खेलते थे। तब वे ढाल तलवार बाजी का ही बखूबी अभ्यास कर निपुण बनने की कोशिश भी करते थे। जिसमे वे सफल भी हुए। महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) की वीरता की गाथाओं के बारे में जीतना समझने की कोशिश की जाए उतना ही कम लगता है।

उन्होंने काफी कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष कर राजपूतों को सम्मान दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए मुगलों को लोहे के चने चबाने पर विवश कर दिया। मुग़ल सम्राट अकबर महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के राज्य को अपने राज्य में शामिल करना चाहते थे परन्तु महाराणा प्रताप जैसे वीर और तेजस्वी राजा के चलते उनके साड़ी योजनाओं पर पानी फिर गया और महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) ने ऐसा होने नहीं दिया।

इनका घोड़ा चेतक इतना चालक और स्वामी भक्ति के गुणों से भरपुर था कि उसने अपने प्राण दे कर 26 फुट गहरे दरिया में कूदकर अपने स्वामी के प्राण बचाये। एक जानवर होकर भी उसने जो इतने बुद्धिमानी दिखाई है। उससे बड़ी वफ़ादारी दुनिया में कोई हो ही नहीं सकती है। हल्दी घाटी में इसी घोड़े चेतक के नाम से एक मंदिर बना हुआ है।

राजस्थान की बहुत सी जनता महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) के आगे सर झुका चुकी थी परन्तु महारणा प्रताप (Maharana Pratap) ने बेहद ही कठिन परिस्थति में भी जब उन्हें जंगलों में भूख और प्यास के साथ भटकना पड़ा , पुरे परिवार के साथ तब भी वे डटकर इस संघर्ष में मुकाबला करते रहे।इस समय भी उन्होंने पाना आत्मविश्वास दृढ़ बनाये रखा। 30 वर्षों तक एक लम्बे समय तक महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को हराने के कोशिश के बाद भी अकबर को हार माननी पड़ी और अकबर महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) को पकड़ने में नाकाम रहा।

अंततः 19  जनवरी 1957 को चावंड में उनकी शिकार करने के दौरान निधन हो गया। महाराणा प्रताप (Maharana Pratap) जैसे वीर और तेजस्वी राजा आज भी हम युवाओं और बच्चों के लिए देशभक्ति का बहुत ही बड़ा प्रेरणास्त्रोत बने हुए है। यदि उनके जीवन के कुछ अंश भी हम अपने जीवन में उतार ले तो हमारा जीवन भी सफल हो जाएगा।

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