Friday, September 17th, 2021

जानिए कौन थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह, अलीगढ़ में बनेगी राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी, जिन्होंने अफगानिस्तान में बना दी थी भारत की सरकार, बड़ी रोचक है कहानी

राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म साल 1886 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुआ था. राजा को पढ़ाई-लिखाई का शौक था, लिहाजा उन्होंने अपने समय में काफी शिक्षा ग्रहण की

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ठीक दो साल पहले, अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर स्टेट लेवल यूनिवर्सिटी खोलने का ऐलान किया था. योगी आदित्यनाथ सरकार ने सितंबर, 2019 में घोषणा की थी कि राज्य सरकार प्रदेश के अलीगढ़ जिले में नई यूनिवर्सिटी खोलेगी. यूपी सरकार की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 14 सितंबर को अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करेंगे. राजा महेंद्र प्रताप सिंह यूनिवर्सिटी को लेकर बीजेपी का कहना है कि वे देश के उन लोगों को सम्मान दे रहे हैं, जिन्हें बाकी सरकारों ने नजरअंदाज कर दिया था.

जाट समुदाय से ताल्लुक रखते थे राजा महेंद्र प्रताप सिंह

अलीगढ़ में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस राजा के नाम पर विश्वविद्यालय का शिलान्यास रखने जा रहे हैं, उन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं. जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में ज्यादातर जाट समुदाय के लोग ही जानते हैं. इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग भी राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में थोड़ी-बहुत जानकारी रखते हैं. अब अलीगढ़ में जिस राजा के नाम पर विश्वविद्यालय बनने वाला है, उस राजा के बारे में जानना बहुत जरूरी हो जाता है. इसलिए, आज हम यहां आपको राजा महेंद्र प्रताप सिंह के बारे में कुछ बहुत ही जरूरी बातें बताने जा रहे हैं.

पहले विश्वयुद्ध के दौरान अफगानिस्तान में बना दी थी सरकार

राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म साल 1886 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुआ था. राजा को पढ़ाई-लिखाई का शौक था, लिहाजा उन्होंने अपने समय में काफी शिक्षा ग्रहण की. बताया जाता है कि उस समय वे अपने क्षेत्र के काफी पढ़े-लिखे व्यक्ति हुआ करते थे. एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ राजा महेंद्र प्रताप ने एक लेखक और पत्रकार का भी काम किया. वे हाथरस के मुरसान रियासत के राजा बने. आपको जानकर हैरानी होगी कि महेंद्र प्रताप सिंह ने पहले विश्वयुद्ध के समय अफगानिस्तान गए और वहां भारत की पहली निर्वासित सरकार का गठन कर दिया. अफगानिस्तान में भारत की पहली निर्वासित सरकार के राष्ट्रपति भी वे खुद ही बने.

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काम के नजरिए से नेताजी के साथ थी काफी समानताएं

महेंद्र प्रताप सिंह ने 1 दिसंबर, 1915 को अफगानिस्तान में पहली निर्वासित सरकार का ऐलान किया था. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजा महेंद्र प्रताप ने भी अपने जीवन में ठीक वही काम किया जो काम नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था. काम के नजरिए से देखा जाए तो महेंद्र प्रताप और नेताजी बोस में काफी समानताएं थीं. हालांकि, नेताजी कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे लेकिन महेंद्र प्रताप आधिकारिक रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं थे. राजा महेंद्र प्रताप सिंह करीब 32 साल तक भारत से बाहर रहे और देश को आजादी दिलाने के लिए अपने स्तर पर खूब प्रयास किए. उन्होंने आजादी के लिए जर्मनी, रूस और जापान से मदद की गुहार लगाई लेकिन इन देशों से उन्हें कोई मदद नहीं मिली.

कांग्रेस पार्टी ने नहीं दी थी खास तवज्जो

देश की आजादी से ठीक पहले साल 1946 में महेंद्र प्रताप सिंह भारत लौट आए थे. भारत लौटने के बाद उन्होंने वर्धा में महात्मा गांधी के साथ मुलाकात की. उन्होंने कोशिश तो की थी लेकिन उस दौर में कांग्रेस पार्टी में उन्हें कोई खास तवज्जो नहीं दी गई थी. हालांकि, वे देश को आजादी मिलने के बाद राजनीति में सक्रिय रहे. साल 1979 में उनका निधन हो गया था.

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