Friday, October 22nd, 2021

Mango Polotics Of Pakistan : काम नहीं आया पाकिस्तान की ‘मैंगो डिप्लोमेसी’,चीन अमेरिका ने वापस लौटाए आम

नईदिल्ली , न्यूज हसल इंडिया ,पाकिस्तान ने दुनिया को खुश करने के लिए इस बार आम का सहारा लिया है उसने कई वेराइटी के मीठे आम दुनिया भर के प्रमुखों को गिफ्ट बतौर दोस्ती का इजहार करने भेजा हैं। कोरोना महामारी और आर्थिक संकट से परेशान पाकिस्तान नई कूटनीतिक चाल अपनाया है, लेकिन उसके खास दोस्त चीन और अमेरिका ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। नई कूटनीतिक चाल के तहत पाकिस्तान दुनियाभर के देशों को गिफ्ट में मीठे आम की अलग-अलग वेराइटी भेज रहा है। लेकिन खुद उसके प्रिय दोस्त चीन और अमेरिका को पाकिस्तान की ये ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ पसंद नहीं नहीं आई है और पाकिस्तान की ओर से गिफ्ट में भेजे गए आम वापस लौटा दिए।  मीडिया रिपोर्ट केअनुसार, पाकिस्तान विदेश मंत्रालय (एफओ) ने बुधवार को अमेरिका और चीन समेत 32 से अधिक देशों के प्रमुखों कोगिफ्ट में मीठे आम भेजे थे,पर अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अपने कोरोना वायरस क्वारंटीन नियमों का हवाला देते हुए तोहफे को लेने से इनकार कर दिया। 

सरकार प्रमुखों को ‘चौसा ‘आम भेजे

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी की ओर से 32 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों को ‘चौंसा’ आम भेजे गए थे। आमों की पेटी को ईरान, खाड़ी देशों, तुर्की, अमेरिका, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रूस भेजा गया था। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय की इस सूची में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भी नाम था, लेकिन पेरिस से पाकिस्तान के इरादे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।इसके अलावा कनाडा, नेपाल, मिस्र और श्रीलंका को भी पाकिस्तान की ओर से गिफ्ट मेंमीठे आम भेजे गए पर आमों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया। दरअसल कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू क्वारंटाइन नियम का हवाला देते हुए गिफ्ट स्वीकार नहीं किया गया । आपको बता दें कि पाकिस्तान द्वारा भेजे जाने वाले आमों की किस्मों में पहले ‘अनवर रत्तोल’ और ‘सिंधारी’ खेप गिफ्ट का हिस्सा थीं, लेकिन इस बार दोनों को हटा दिया गया है। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इन दिनों बेहद आर्थिक तंगी से जूझ रहें हैं ऊपर से कोरोना महामारी के कारण देश में भयंकर बेरोजगारी भी बढ़ गई है जिसके चलते पाकिस्तान सभी देशों से दोस्ती के हाथ बढ़ाकर सहयोग लेना चाहता है यही कारण है कि वे सब देश के प्रमुखों को आम खिला देना चाहते हैं।

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