Saturday, July 24th, 2021

Mothers Day : मां तुझे सलाम

न्यूज हसल इण्डिया ,मदर्स डे का प्रचलन अब बढ़ गया है । मदर्स डे मानाने की आखिर क्यों जरूरत पड़ी यह भी एक बड़ा सवाल है ? इसका जवाब खोजेंगे तो तुरंत मिल भी जायेगा और लोग निबंध की तरह मदर्स डे का बखान कर देंगे। पर मां के प्यार के बारे में बात की जाये तो दुनिया का कोई वैज्ञानिक , विशेषज्ञ , बुद्धिमान उसकी गहराई नहीं माप सकता। वह चन्द्रमा में जा सकता है , वह मंगल व् शुक्र ग्रह में जा सकता है , वह अंतरिक्ष के शून्य में गोते लगा सकता है पर माँ के प्यार की गहराई को नहीं बता सकता। वह माँ जो अपने बच्चे को अपनी कोख में 9 महीने रखकर जब जन्म देती है तब वह बच्चा मनुष्य से कहीं अधिक मां के अंतर्मन से यात्रा करके आया होता है। और वह जब मां का दूध पीता है तो समझिये अंतर्मन से प्राप्त आत्मा को पकाता है। और वही आत्मा संसार के सामने मां को पूज्यनिय बनाती है। मुझे लगता है मां उतसव मनाने की चीज ही नहीं है। उतसव तो उसका मनाया जाता है जिसका खो जाने का भय होता है। वह विस्मृत न हो जाये इसलिए उत्सव मनाते हैं। पर मां विस्मृत होने की चीज नहीं है। पर माँ का प्यार कोई भी व्यक्ति अपनी अंतिम साँस तक नहीं भूल सकता । बचपन में माँ जब गोद में बिठाकर खाना खिलाती है । अपनी बाँहों में झूला झुलाती है ।रात में चंदा मामा दिखाती और लोरी गाकर सुलाती है । मां जब हाथ पकड़कर चलना सिखाती है ,मां जब पट्टी पेन्सिल पकड़ कर लिखना पढ़ना सिखाती है तब हम कही जाकर एक इंसान बनते हैं। आपने देखा है बच्चे की थोड़ी सी भी जब तबियत बिगड़ती है तो मां बेचैन हो जाती है । उसकी थोड़ी भी भूख मां को सही नहीं जाती। उसे हजार बार खाना देने के बाद भी मां को लगता है उसका बेटा भूखा है। वह अपना कौर अपने बेटे को फिर दे देती है। क्या इस प्यार को कोई नाम दे सकता है। बिलकुल नहीं, यह प्यार अथाह है। इसमें जितना गोता लगाओगे घुसते चले जाओगे। । इसलिए मदर्स दिवस की सार्थकता तभी है जब हम मां के प्यार को अक्षुण्ण बनाये रखें। मां के दिए सभी शिक्षा को हम अपने जीवन में प्राथमिकता से उतारें। माँ के प्यार का कर्ज हम नहीं छूट सकते पर मां को भी मां के दिए प्यार के बराबर हम उसे सम्मान दें और उसके सपनो के अनुरूप इंसान बनकर दिखाएँ तो यही मदर्स डे की सार्थकता होगी।

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