Friday, September 17th, 2021

MP Flood News : बाढ़ प्रभावितों को हर संभव सहयोग करेंगे, कोई कसर नहीं छोड़ेंगे – मुख्यमंत्री शिवराज सिंह


मुख्यमंत्री श्री चौहान का प्रदेश की जनता के नाम संदेश
दतिया | 09 अगस्त-20210  NHI,  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पिछले दिनों भयंकर वर्षा के कारण उत्तरी मध्यप्रदेश के कई जिलों विशेषकर ग्वालियर-चंबल संभाग और विदिशा जैसे जिलों में बाढ़ ने तबाही मचा दी। अतिवृष्टि भी साधारण नहीं थी। ऐसी वर्षा कभी देखी नहीं थी। अकेले श्योपुर जिले में 101 सेंटीमीटर बारिश हो गई। कभी भी इस समय तक 30 से.मी. से ज्यादा बारिश नहीं होती थी। शिवपुरी में 99 से.मी. बारिश हो गई। बारिश ने रिकार्ड तोड़ दिए सारे। इस भयानक वर्षा के कारण नदियों में भयंकर बाढ़ आ गई। ऐसा सैलाब इस सदी में देखा नहीं गया। गाँव के गाँव तबाह हो गए। मकान डूब गए, पशु बह गए, लोग बाढ़ में फँस गए। पानी जब नीचे उतरा, कई जगह हजारों मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। गृहस्थी उजड़ गई। फसलों को नुकसान पहुँचा। अधोसंरचना ध्वस्त हो गई। सड़कें टूट गईं। बिजली के सब स्टेशन डूब गए। कुछ जगह तो पुल भी बह गए। ऐसी भयानक त्रासदी कभी नहीं देखी गई।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आपदा के आते ही मैं भी सक्रिय हो गया और प्रशासन भी सक्रिय था। मंत्री अपने क्षेत्रों में अपने प्रभार के जिलों में पहुँच गए। प्रधानमंत्री जी से मैंने कई बार बात की और प्रधानमंत्री जी ने भी फोन किए। हमारे आग्रह पर तत्काल एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर भेजे गए। एयर फोर्स के 6 हेलीकॉप्टर, बीएसएफ के जवान, सेना के जवान, आर्मी, एनडीआरएफ की टीम भेज दी गई। अपनी एसडीआरएफ की टीम ने भी खूब काम किया। पुलिस प्रशासन, निचले स्तर तक के कर्मचारी, कई नौजवान, समाज-सेवी बचाव के काम में लगे। मेरे भाईयो-बहनों, में भी दिन और रात बचाव कार्य की मॉनीटरिंग करता रहा। मैंने बाढ़ ग्रस्त इलाकों के हालात भी जाकर देखे। नुकसान बहुत हो गया। लेकिन एक बात राहत की है कि हम लोगों की जिन्दगी बचाने में सफल हो गए। लगभग 8 हजार 900 लोग जो बाढ़ के पानी में अलग-अलग जगह फँस गए थे, कोई टापू पर बैठा था, कोई घरों की छत पर बैठा था, कोई मंदिरों के ऊपर था, कोई पेड़ों पर था। एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर, सेना के जवानों ने और एसडीआरएफ के जवानों ने हमारे पुलिस के जवानों के साथ लोगों का रेस्क्यू किया और बीच पानी में डूबते हुए उन्हें बचाने में सफलता प्राप्त की। इस दौरान 32 हजार 900 लोग बाढ़ से  निकालकर ऊंचे स्थानों पर पहुँचाए गए, राहत शिविरों में रखे गए। हमने जानें बचा लीं लेकिन माल नहीं बचा पाए। गृहस्थी उजड़ी, सामान नष्ट हुआ, दुकानों में रखा सामान भी नष्ट हो गया, घर के अन्दर का सामान खराब हो गया, काम-धंधे चौपट हो गए।

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