Thursday, December 9th, 2021

MP News : Employments : दीपोत्सव के लिए कलात्मक दीपक, ईको फ्रेंडली मूर्तियां और शुद्ध देशी घी के पकवान लेकर आ रही हैं स्व-सहायता समूह की महिलाएँ



ग्वालियर | 23 अक्तूबर-20210 NHI

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    मिट्टी व गोबर से बने कलात्मक दीपक तो ईको फ्रेंडली गणेशजी व लक्ष्मीजी की मूर्तियाँ। शुद्ध देशी घी से बने पकवान व नमकीन तो घर पर पवित्रता को ध्यान में रखकर बनाई गईं अगरबत्ती, मोमबत्ती, रूईबाती सहित अन्य पूजन सामग्री। साथ ही घर-द्वार सजाने के लिए फ्लॉवर पॉट व रंग-बिरंगी आकर्षक झालरें। दीपोत्सव में उपयोग होने वाली यह सभी सामग्री तैयार करने में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ीं स्व-सहायता समूहों की महिलायें जुटी हैं। फूलबाग स्थित संभागीय ग्रामीण हाट बाजार दीपावली से पहले स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा अपने हाथों से निर्मित इस सामग्री से गुलजार होगा।
   शहरवासियों को दीपावली के लिए पूजन सामग्री व अन्य कलात्मक वस्तुएँ लेने के लिए भीड़-भाड़ वाले बाजारों में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। ग्रामीण हाट बाजार में यह सब उचित दर पर उपलब्ध होगा।
   ग्राम सौंसा के मुस्कान स्व-सहायता समूह से जुड़ीं श्रीमती बीना यादव  व चकमहाराजपुर के रतनगढ़ वाली माता समूह से जुड़ीं श्रीमती भावना सैनी शुद्ध देशी घी के पकवान और नमकीन लेकर ग्रामीण हाट बाजार में आयेंगीं। इसी तरह ग्राम केरूआ के माँ शेरावाली समूह की सदस्य श्रीमती मीरा जाटव मिट्टी के गणेश जी व लक्ष्मी जी की आकर्षक मूर्तियां बनाने में जुटी हैं। देवरीकला के ठाकुरबाबा स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती सुमित्रा प्रजापति का कहना है कि ग्राम सहारन व देवरीकला में स्व-सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं द्वारा गोबर व मिट्टी के आकर्षक एवं कलात्मक दीपक तैयार किए जा रहे हैं। ग्राम धवा की श्रीमती उमा कुशवाह आकर्षक खिलौने बनाने में जुटी हैं तो विकासखण्ड घाटीगांव के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा बड़े पैमाने पर झाड़ू एवं फूलबाती बनाने का काम किया जा रहा है।
   ग्वालियर जिले के ग्रामीण अंचल में निवासरत ये महिलाएँ स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर तो बनी ही हैं, साथ ही महिला सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्वालियर जिले के ग्रामीण अंचल में गठित 3 हजार 287 स्व-सहायता समूहों से लगभग 36 हजार महिलायें जुड़ी हैं और सफलतापूर्वक आजीविका गतिविधियाँ संचालित कर रही हैं। इनमें से ढ़ाई हजार से अधिक ऐसी महिलायें हैं, जो घर बैठे 10 हजार रूपए प्रति माह से अधिक कमाई कर लखपति क्लब की सदस्य बन चुकी हैं। कोरोना संकट के समय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की इन महिलाओं को समूहों के माध्यम से घर बैठे ही रोजगार मिला। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप स्व-सहायता समूह से जुड़ीं महिलायें स्कूली बच्चों के गणवेश, सेनेटरी नेपकीन, साबुन, मसाले, पापड़, बड़ी व फिनाइल भी बना रही हैं। साथ ही जब कोरोना संकट आया तो बड़े पैमाने पर इन महिलाओं ने मास्क और सेनेटाइजर का निर्माण भी किया। इसके अलावा उन्नत कृषि, जैविक खेती और पौध रोपणियों से भी महिलायें जुड़ी हैं।
   स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को मंच प्रदान करने के लिये जिला पंचायत द्वारा ग्वालियर में फूलबाग स्थित संभागीय ग्रामीण हाट बाजार में विपणन केन्द्र बनाया गया है, जहाँ पर महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री करने के लिये पक्की दुकानें मुहैया कराई जाती हैं।

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