Tuesday, June 22nd, 2021

MSP Editorial : किसानों को सम्मानजनक एमएसपी तय हो, किसान ही भगवान

देश के किसान अन्न उगाते हैं और वही लोग दुनिया के पेट भरते हैं यदि वो न रहें तो हमारा कोई वजूद नहीं इसलिए किसानों को हमेशा उचित पुरुस्कार मिलना चाहिए । लेकिन दुर्भाग्य से हमारे किसान ही ठगे जाते हैं । हर साल यह मांग की जाती है कि किसानों को सममजनक एमएसपी मिले पर हमारे सत्ताधारी राजनेता हमेशा ऊंट के मुंह में जीरा जैसे एमएसपी देकर अपने कर्तव्य का अंत कर देते हैं ।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अघ्यक्षता में कल खरीफ फसल के लिए एमएसपी तय कर दिया गया है । यह तो बहुत अच्छी बात है कि पीएमओ आफिस व कृषि मंत्रालय ने किसानों के हित का बारे में सोचा । किसान ही भगवान है । किअसं ही देश की रीढ़ की हड्डी है । और जब तक रीढ की हड्डी मजबूत नही रहेगी आदमी कुछ काम का नही रह जायेगा । ठीक वैसा ही हम किसानों के बारे में भी कह सकते हैं । यदि किसानों को हम मजबूत नहीं रख पाएंगे तो समझिए हम देश को मजबूत नही रख पाएंगे । किसानों के हित से ही देश का हित जुड़ा हुआ है । इसलिये किसानों को सबसे पहले सुविधा सम्पन्न और समृद्ध करने की जरूरत है । लेकिन खरीफ फसल की एमएसपी की जो सूची जारी हुई है वह धान के मामले में बहुत ही निराशा जनक है । 8-10 खरीफ फसलों की जो सुचो हैं उसमें धन का ही एमएसपी बहुत कम है यानी धन का सिर्फ 72 रुपये प्रतिक्विंटल बढाया गया है । सबसे ज्यादा तिल का 452 रुपये बढ़ाया गया है । तुअर व उड़द का 3-3 सौ रुपये बढ़ाया गया है । ऐसा शायद इसलिए है कि धान की बिकवाली ज्यादा होती है । बाकी तिल ,उड़द,तुअर का धान की तुलना में बहुत कम बिकवाली है । ऐसे में यदि धान का एमएसपी ज्यादा बढ़ेगा तो सरकार को आर्थिक भार ज्यादा आएगा । पर यह कोई पैमाना नही है । उत्पादक किसान को जब तक अच्छा लाभ नही देंगे तब तक व कृषि में कोई अच्छी रुचि नही लेंगे । यह कल्पना कीजिये अगर किसान धान न बोए तो क्या होगा । तिल न बोए तो क्या हो जाएगा ? आदमी का काम चलता रहेगा ।पर अगर किसान धान बोने से मना कर दे तो सब भूखे मर जायेंगे । यह एक विचारणीय सवाल है । अगर तिल को 452 बढ़ा रहे हो तो धान को कम से कम 200 रुपये तो बढ़ाना चाहिए । छतीसगढ़ सरकार ने केंद्र सरकार के इसी रवैये के चलते धान का 2500 रुपये प्रति क्विंटल कीमत अदा कर रही है क्योंकि धान का समर्थन मूल्य करीब 1800 के आसपास था और शेष 700 रुपये अंतर की राशि का भुगतान वह राजीव गांधी न्याय योजना के तहत किसानों को दे रही है । कुल कीमत 2500 के हिसाब से ही दे रही है । तो केंद्र व राज्य के बीच ऐसी टकराव पूर्ण नौबत क्यों आनी चाहिए । किसानों को अच्छा दाम दोगे तो अच्छा प्रतिफल भी मिलेगा । केंद्र सरकार किसानों को धान में मात्र 72 रुपये पकड़ाकर अपने कर्तव्यों का इतिश्री कर रही है । यह किसानों के सम्मान में नही कहा जा सकता । उनको एक सम्मानजनक एमएसपी तय होना चाहिए । केंद्र सरकार इस पर पुनर्विचार करे । केंद्र सरकार फिर से संशोधित एमएसपी जारी करे और किसानों को उनके पसीने का उचित पुरुस्कार दे ।

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