Friday, July 30th, 2021

No Lockdown in India – Modi का धर्म संकट : Coronavirus की चेन या आदमी का चैन !

No Lockdown in India

नईदिल्ली,न्यूज हसल इंडिया,

प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने बीती रात 9 बजे देश को अचानक संबोधित किया । मोदीजी के संबोधन से पहले ही धुकधुकी लगती है और जब अचानक ही टीवी पर संबोधन के लिए प्रगट हो जाएं तो फिर दिल का हॉलबेहाल हो जाता है । मेरे प्यारे भाइयों बहनों बोलने के बाद पता नहीं आगे क्या बोलेंगे । ऐसे ही बोलके एक बार नोटबन्दी किये थे और दूसरी बार पिछले साल 24 मार्च को रात 12 बजे लॉकडाउन (Lockdown) किये थे । तब से वे जब कभी भी टीवी पर उभरते हैं दिल धक से करता है । कल रात 9.45 को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश को संबोधित किया । दिल मे हाथ रखकर पूरे देश के लोगों ने ध्यान से सुना कि इस बार मोदी जी क्या घोषणा करते हैं पर उन्होंने इस बार उन्होंने वैसा कुछ नहीं किया जैसे अब तक पहले करते आये थे । हां इस बार वही राग अलापा गया जो हमेशा बोलते आये हैं । यही कि coronavirus की लड़ाई को हम सब मिलकर जीतेंगे । बस इसके लिए जरूरी है कोरोना गाइडलाइन का पालन आपसब ईमानदारी से करे । पर मोदीजी यह संदेश खुद बिना मास्क लगाए दे रहे थे । यदि वे खुद भी मास्क लगा लिए रहते तो शायद उनका संदेश ज्यादा सार्थक होता । मोदी जी ने इस बार न तो थाली बजवाई न ही ताली बजवाई । बल्कि कहने लगे कि माइक्रो कंटेन्मेंट जोन बनाकर जीतेंगे । इसी कोरोना में आप एक एक किलोमीटर तक कंटेन्मेंट जोन बनवाते थे अब आप कहते हैं छोटा छोटा कंटेन्मेंट जोन बनाओ । बीमारी तो वही है पर इसमें दो तरह की बातें क्यों होती है । छोटा बनाने से दूरियां फिर कैसे मेंटेन होगी । फिर छोटा बनाओ या बड़ा उससे क्या फर्क पड़ जायेगा ? सारी व्यवस्थाएं तो उतनी ही लगेगी बल्कि छोटे ज़ोन करने से व्यवस्थाएं बढ़ जाएगी । हम चाहते थे इतनी भारी संख्या में जो मौतें हो रही है उस पर वैज्ञानिक और क्या कर रहें हैं उस पर कुछ बोलेंगे । आप मजदूरों को कहते हैं घर मत जाओ जहां हो वहीं रहो । आपको काम भी मिलेगा और दाम भी मिलेगा । यह सबभाषण में भले ही अच्छा लगता है पर सचाई इससे कोसो दूर होती है । पिछले लॉकडाउन (Lockdown) यानी एक साल से मजदूरों के कारखाने बन्द हो गए हैं । उत्पादन रुक गया है । मालिक पगार नहीं दे रहें हैं । प्रदेश सरकार कुछ नही कर रही है । वह केंद्र पर दोषारोपण कर रही है । केंद्र राज्य पर ।वह तो 5 किलो सूखा चावल देकर अपना काम खत्म कर देती है । परिवार से दूर मजदूर को खाना पीना साबुन सोडा नमक मिर्च मसाला कपड़ा लत्ता दवाई पानी सब की जरूरत होती है । चावल देने से क्या होता है खाना बनाने के लिए ईंधन भी चाहिए । यह बेचारे कहाँ से लाएंगे । प्रदेश सरकारें काम नहीं दे सकती इसलिए वह पलायन भी नहीं रोक सकती । ऐसे में मजदूर तो यही सोचता है मरें तो अपने परिवार के बीच जाकर मरे । आप देखिए दिल्ली के बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों पर हजारों लाखों में प्रवासी मजदूर घर जाने के लिए इकट्ठा हो गए हैं । केजरीवाल जी चीख चीख कर बोल रहे हैं हम आपकी व्यवस्था करते हैं पर उनको एक कप चाय भी नहीं मिल रही है । मजदूरों का विश्वास अब सरकारों पर नहीं रह गया है । वह टीवी पर बोलती कुछ है और हकीकत में करती कुछ है । यह तो अच्छी बात है भले मजदूर न रुकें पर उनको मोदीजी पर बहुत भरोसा है । इस कठिन समय में भी वे देश को चला रहे हैं यह कोई कम नहीं है । पर मजदूरों को इस वक्त पैसा चाहिए । रोटी कपड़ा और मकान चाहिए तभी घर जाने से रुक पाएंगे । उनको किसी की संवेदना की जरूरत नहीं है । बस उनके दोनों हाथों को रोजगार दे दो । फिर वे किसी महामारी से नहीं डरते । जिंदगी जीने की कला उनके पास है वे किसी संवेदना के मोहताज नहीं । मोदी जी यही धर्म संकट है आप देश बचाने सोच रहें हैं और मजदूर अपना घर बचाने । मोदी की सलाह No Lockdown In India

#NoLockdowninindia

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