Wednesday, December 8th, 2021

Oxygen shortage, देश में बड़ा संकट और जगह जगह घूम रहे ‘सांसों के सौदागर’

Oxygen shortage, न्यूज हसल इंडिया NHI ,

देशभर में कोरोना पेसेंट के लिए हो रही ऑक्सीजन (Oxygen) की कमी को लेकर कोहराम मचा हुआ है । प्रायः प्रायः हर अस्पताल प्रबंधन ऑक्सीजन की कमी को झेल रहा है जिसके लिए वे मरीजों के परिजन के क्रोध का शिकार भी हो रहें हैं । दिल्ली में तो स्थिति और बहुत बुरी है । वहां ऑक्सीजन के लिए मरीज से लेकर मन्त्री तक दिनरात भागमभाग है । बेड की कमी जो अलग है वह है सबसे बड़ी तकलीफ तो ऑक्सीजन की है । देश के शीर्ष अदालत ने आज केंद्र सरकार को पूछा भी है कि उसके पास ऑक्सीजन सप्लाई के लिए क्या व्यवस्था है । वह तत्काल भर्ती मरीजों को जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन की पूर्ति करे ।

इस मामले पर सलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया है कि सरकार तत्त्कालिक तौर पर हरसंभव उपाय कर ऑक्सीजन सप्लाई कर रही है । कोर्ट ने केन्द्र से कोरोना पर क्या तैयारी है जवाब मांगा है । कोर्ट ने ताज्जुब व्यक्त किया है कि उद्योगों के वास्ते ऑक्सीजन मिल रहा है और मरीजों के लिए ऑक्सीजन (Oxygen) नहीं है । कोर्ट ने उद्योग ऑक्सीजन को ततकाल मेडिकल ऑक्सीजन में तब्दील कर मरीज़ों को सप्लाई करने कहा है । दिल्ली में केजरीवाल सरकार बार बार केंद्र की ओर सहयोग मांगने लालायित है । वह हर काम के लिए केंद्र पर आश्रित हो जाना चाहती है जबकि उनके द्वारा भी ऑक्सीजन के विकल्प तैयार किये जा सकते हैं ।

भाजपा सांसद गौतम गम्भीर ने तो आज केजरीवाल को कहा है कि आप हर काम के लिए केंद्र के पास आकर खड़े हो जाते हो । जबकि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ही एक ऐसी सरकार है जो विज्ञापन पर 6 सौ करोड़ रुपये खर्च करती है । गौतम गम्भीर ने केजरीवाल को चुनौती भी दी है कि अगर केजरीवाल कोई दूसरा राज्य बता दे जो 6 सौ करोड़ से ज्यादा विज्ञापन पर खर्च की है तो मैं इस्तीफा दे दूंगा । अगर गौतम गम्भीर का यह आरोप सही है कि केजरीवाल फिजूल के विज्ञापन पर 6 सौ करोड़ खर्च करते हैं तो निःसन्देह यह जनता की राशि का दुरुपयोग है । इस पैसे को स्वास्थ्य शिक्षा पर खर्च करते तो यह दिल्ली की सेहत का काम आता ।

लेकिन ऑक्सीजन की समस्या केवल दिल्ली की नहीं है यह रायपुर से लेकर दिल्ली तक है । उत्तर से दाक्षिणी और पूर्व से पश्चिम में है । हर कस्बाई नुमा शहर में भी 5से 10 टन ऑक्सीजन की खपत रोज है । इसकी पूर्ति कैसे होगी यह बड़ी समस्या है । तरकीब यही है कि फिलहाल राज्य के औद्योगिक ऑक्सीजन को मेडिकल ऑक्सीजन में तब्दील कर मरीजों को जीवन दान दिया जाए । इस मामले पर छत्तीसगढ़ सरकार की तारीफ की जानी चाहिए कि उसने 22 अप्रेल को एक आदेश निकालकर औद्योगिक ऑक्सीजन को उत्पादन में लगाने से रोक लगा दी है तथा उसे अस्पतालों में सप्लाई करने का आदेश दिया है ।

कल रात ही सिमगा में एक कोरोना पेसेंट को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत हो गई । ऐसे कठिन समय में देश में ऐसे भी मुनाफा खोर बैठे हैं जो ऑक्सीजन पर सौदेबाजी कर रहें हैं । 5 रुपये की चीज को 5 सौ रुपये में बेच रहे हैं । ऑक्सीजन में भी यही हो रहा है । ऑक्सीजन की इतनी मारामारी है कि अपने परिजन की जान बचाने ऑक्सीजन की मुंह मांगे दाम दे रहें हैं । जिससे मुनाफाखोरों की बन आई है ।पर यह मानवीयता के खिलाफ है ।ऐसे संकट के समय में जब देश को तन मन धन से सहयोग करना चाहिए तो और सांसों के सौदागर बनकर काम करते हैं । यह निंदनीय है । सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई करे ।

 

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