Wednesday, December 8th, 2021

Editorial : सीएम द्वारा PM की मीटिंग लीक करना Protocol का उल्लंघन

Editorial : नईदिल्ली, न्यूज हसल इंडिया ,

आज सुबह जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश मे आक्सीजन की कमी को लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों से बात कर रहे थे तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मीटिंग की रिकार्डिंग व लाइव टेलीकास्ट कर अपने किस आचरण का परिचय दे रहे थे यह समझ से परे है ।

आपको बतादे अरविंद केजरीवाल ने पीएम से अपनी कही गई बातें चुपके से रिकार्ड कर लिया और न केवल रिकार्ड किया बल्कि लीक भी कर दिया ।

एक अदना सा व्यक्ति भी जानता है प्रधानमन्त्री के साथ किसी गम्भीर विषय पर चलने वाली मीटिंग प्रोटोकाल के अंतर्गत आता है और उसे तोड़कर चालाकी करना कोई बुद्धिमानी की बात नहीं होगी ।

किन्तु अरविंद केजरीवाल इतने ऊंचे ओहदे और एक जवाबदार जनसेवक के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पद की गरिमा को नहीं समझा यह हैरानी का विषय है ।

आखिर बातचीत की रिकार्डिंग टेलीकास्ट करके अरविंद केजरीवाल क्या कहना चाहते थे ? यही कि उन्होंने प्रधानमंत्री से जनता के लिए सारी सुविधाएं मांगी और उन्होंने नही दी इसलिए मौतों के लिए दिल्ली सरकार जिम्मेदार नही होगी ।

क्या यह कहकर पल्ला झाड़ा जा सकता है हमने तो मोदी जी के समक्ष समस्या रखकर ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया है अब वो नहीं दिए तो हम क्या करें ।

ऐसा आचरण एक सुलझे हुए राजनेता की पहचान नहीं है । आखिर प्रधानमन्त्री के टोकने पर केजरीवाल को माफी मांगनी पड़ी ।

प्रधानमन्त्री ने टोका कि यह अब तक चल रही परंपरागत प्रोटोकाल के खिलाफ है कि कोई मुख्यमंत्री ऐसी इनहाउस मीटिंग को लाइव टेलीकास्ट करे ।

निःसन्देह अरविंद केंरिवाल की यह भारी गलती थी और अब उन्होंने ऐसा करके अपने मलिन राजनीतिक आचरण का परिचय दिया है ।

वहीं वह अब ऎसा करके भाजपा की झोली में एक बड़ा मुद्दा डाल दिये हैं । भाजपाई तो आज से ही कहने लगे गए हैं कि अरविंद केजरीवाल चर्चा की रिकार्डिंग लीक करके राजनीति कर रहें हैं ।

उन्हीं के दिल्ली में लोग बिना ऑक्सीजन के दम तोड़ रहें हैं और इधर दिल्ली के ही सीएम ऑक्सीजन पर राजनीति कर रहें हैं क्या यह शोभनीय है ?

अरविंद केजरीवाल कितना भी कुछ कर लें एक मुख्य्मंत्री होने के नाते वे अपनी जवाबदारी से नहीं भाग सकते । उनको पीएम को बताना था कि कोरोना को लेकर उनकी क्या व्यवस्था है ।

कहाँ पर कैसी तकलीफ है और केंद्र राज्य मिलकर उसे कैसे दूर कर सकते हैं । इसी तरह उन्होंने पीएम को यह सुझाव दिया है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए उत्पादक कारखानों को सेना के हवाले कर दी जाए ।

दरअसल यह सुझाव भी व्यवहारिक नही है । फिर सेना अपने मन से आपूर्ति करेगी तो शिक़ायत करने किसके पास जाओगे । सेना का काम दुश्मनों के छक्के छुड़ाना और देश की रक्षा करना है ।

अगर सेना देश के भीतर की समस्या में लग जायेगी तो बार्डर खाली हो जाएगा फिर क्या होगा ? सेना का उपयोग आखिर हम अपने देश के लिए क्यों करें । अगर सब कांम सेना करेगी तक फिर देशवासी क्या करेंगे ।

क्या केजरीवाल इस पर कभी सोचे हैं ? जो समस्याएं हैं वह अभी लोगों की जिंदगी से जुड़ी हुई है । वह मानवीय धरातल पर हमारे कर्तव्यों की परीक्षा भी ले रही है इसे आपस मे मिलजुल कर समन्वय से काम कर दूर किया जा सकता है ।

तभी कोरोना का यह युद्ध जीता जा सकेगा । उम्मीद है केजरीवाल आगे ऐसी धृष्ठता नही करेंगे और यह भी उम्मीद है कि देश की स्वस्थ सेहत और स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस घटना से सीख लेंगे ।

 

 

Leave a Reply

x
%d bloggers like this: