Friday, September 17th, 2021

POEM : BEETIYA

साहित्य :-
बिटिया

हमारी बिटिया बहुत बातूनी है
क्या- क्या बोलती है
तरह- तरह की बोलती है

बिटिया की नन्हीं जुबान है
बिटिया की बातें अच्छी लगती है
बिटिया की बातें बुरी भी लगती है
बिटिया की बातें कुछ भी नहीं लगती है
फिर भी बिटिया की बातें सब सुनना चाहते है
बिटिया की भली बुरी बातों में मिठास है

बिटिया बहुत छोटी है
बिटिया की क्या- क्या मानें
बिटिया रोज लाती है घर भर बिटिया
बिटिया अपनी फ्रॉक बांटने कहती है
बिटिया सबको खाना देने कहती है
बिटिया चिड़ियों को दाना देने कहती है
बिटिया कुत्तों को रोटी डालती है
बिटिया बिल्लों को दूध डालती है

घर पर क्या है
फ्रॉक पड़ोसिन की बिटिया का है
रोटी बाजरे की है
चिड़िया तो सिर्फ चहकने आती है
चिड़ियों के लिए कनकी कहां है
कुत्ते तो हमें भौकने आते हैं
घर में दूध बिटिया के लिए आता है
बिटिया निरंक पानी पीती है
पानी में दूध कहां है
हमारी बिटिया को लाज नहीं आती

बिटिया बहुत बोलती है
बिटिया को पायल चाहिये
बिटिया स्कुल जाएगी
बिटिया को बस्ता चाहिये
बिटिया को पेन्सिल चाहिये
बिटिया को किताबें चाहिये
बिटिया को साइकिल चाहिये
बिटिया को टिफिन चाहिये
बिटिया को मोज़े चाहिये
बिटिया को फीस चाहिये
बिटिया अव्वल आएगी
बिटिया को सब कुछ चाहिये
बिटिया की जुबान कैंची है
बिटिया परीक्षा चाहती है

बिटिया को कुछ नहीं लगता है
बिटिया दुश्मन के घर जाती है
बिटिया छिपकलियों के पास जाती है
बिटिया छिपकलियों को पास बुलाती है
बिटिया सापों के बिल में हाथ डालती है
बिटिया बिल्लियों के साथ खेलती है
बिटिया नारे लगाती है
बिटिया छीना झपटी करती है

बिटिया को अब क्या सीखना है
बिटिया को गिनना आता है
बिटिया को चुनना आता है
बिटिया क्या नहीं जानती
बिटिया क्या नहीं पहचानती
बिटिया फूलों का रंग जानती है
बिटिया जीने का ढंग जानती है

बिटिया एक दिन ब्याह रचायेगी
बिटिया एक दिन बिटिया लायेगी
बिटिया के घर में होगी और बिटिया
बिटिया बातें करेगी
बिटिया की तरह बातें करेगी

हमारी बिटिया की बातें बहुत अच्छी लगती है
बिटिया बहुत बातूनी है
बिटिया हमारी पाठशाला है।

  • शम्भाजी राव घाटगे (विवेक)
    मठपारा रायपुर

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