Friday, June 25th, 2021

Politics on Coronavirus Pendamic : क्या यह सियासत की राजनीति का समय है ?

Politics on Coronavirus Pendamic : News Hustle India , आक्सीजन संकट को लेकर आज प्रधान मंत्री ने अपना बंगाल दौरा निरस्त कर एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर आक्सीजन की आपूर्ति के सम्बन्ध में आपात बैठक ली।

अधिकारीयों ने प्रधानमंत्री को ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए किये जा रहे प्रयत्न के संबंध में अवगत कराया। प्रधान मंत्री मोदी ने ऑक्सीजन की उत्पादकता और सुमुचित वितरण पर जोर दिया। वहीं गृह मंत्रालय ने यह सलाह दी है की ऑक्सीजन की समय समय पर आपूर्ति के लिए अंतर्राज्यीय आवाजाही की छूट दी जाये।

इधर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने प्रेस को बताया है की दिल्ली के सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन का स्टॉक खत्म हो चूका है। हम इधर उधर से जुगाड़ कर ऑक्सीजन देकर मरीजों को उनकी जिंदगी बचा रहे हैं। लेकिन अब आगे जिंदगी बचाना मुश्किल हो जाएगी। मनीष सिसोदिया ने बताया की ऑक्सीजन का कोटा केंद्र तय करती है।

हमें दिल्ली के लिए 378 मीट्रिक टन का कोटा दिया गया है जबकि हमको दिल्ली के लिए इस वक्त 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। हमने केंद्र से मांग की है कि हमको तुरंत 700 मीट्रिक टन कोटा आबंटित किया जाये।

इसी तरह हमने 5 हजार बेड की मांग की थी लेकिन केंद्र ने मात्र 2 हजार बेड दिए। कुल मिलाकर दिल्ली की स्थिति बहुत ख़राब है और इससे निपटने के लिए तत्काल ऑक्सीजन की बहुत जरूरत है। दिल्ली में प्रति दिन पच्चीस हजार नए मामले आ रहें हैं जो बेहद गंभीर और चिंतनीय है।

मनीष सिसोदिया ने यह भी आरोप लगाया है कि हरियाणा के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने दिल्ली ऑक्सीजन सप्लाई रोक दी है ।सवाल यह है की क्या मनीष सिसोदिया केंद्र के तरफ पाला डालकर सियासत की राजनीती कर रहें हैं ?

आखिर इस दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार कौन है ? पहली लहर जब शांत होने की स्थिति में आ गई थी सारे कोविड सेंटर बंद हो चले थे या बंद होने के कगार पर आ गए थे तब सरकारें कोरोना की गंभीरता ख़त्म कर चुकी थी।

लोग भी सहज हो चुके थे। क्या यही लापरवाही में तब्दील हो गई। केंद्र सरकार , राज्य सरकार और जनता तीनों ने कोरोना की गंभीरता पूरी तरह विस्मृत कर दिया गया था। सरकारें फिर अपनी सत्ता हथियाने में मशगूल हो गई थी।

जबकि स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार सचेत कर रहा था। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को समय समय पर पत्र लिखकर आगाह किया है बावजूद सरकारें केवल सत्ता हथियाने की राजनीती में मशगूल हो चुकी थी। पांच राज्यों में चुनावी घोषणा के बाद सब सत्ता के जोड़तोड़ में उलझ गए।

इसका उदाहरण पश्चिम बंगाल के चुनाव में देखने मिला। चाहे भारतीय जनता पार्टी हो टीएमसी या कांग्रेस। सभी ने अपनी सभा में किराये की भीड़ इकट्ठा कर जनता और कार्यकर्ताओं को जोखिम में डाला है। लोग टीवी पर देख रहे थे की सभाओं में कैसी भीड़ उमड़ रही थी ।

कोई कोविड के नियमों का पालन नहीं कर रहा था। चुनाव आयोग ने भी इस पर कोई कड़ाई नहीं की। आज उसका नतीजा सामने है। जनता कोरोना (Corona) के भंवर जाल में फंस गई है और सरकार को भंवरजाल से निकालना कठिन हो गया है। यह देश के सामने सबसे बुरे दौर का संकट है।

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