Tuesday, June 22nd, 2021

Lockdown : गांधी पुतले के नीचे अब गायों का सत्याग्रह ,दाना पानी नहीं मिलने का दुख

रायपुर, न्यूज हसल इंडिया NHI, आपने इंसानों के सत्याग्रह के बारे में सुना होगा पर हम आज आपको गायों के सत्याग्रह के बारे में बताएंगे । छत्तीसगढ़ में करीब तीन सप्ताह से लॉक डाउन चल रहा है । कोरोना महामारी की दूसरी लहर बहुत खतरनाक बनकर उभरी है । सरकार से लेकर समाज तक सब बेबस नजर आ रहें हैं । चारों तरफ चीत्कार और हाहाकार है । अस्पतालों में न बिस्तर ह न दवा है मर भी गये तो कोई कंधे देने वाला नहीं है ,कोई कंधा देकर श्मशान तक ले भी गया तो जलाने के लिए लाइन लगाना पड़ रहा है । दुखों का सागर बिछा हुआ है और गरीबों को रोजी रोटी भी नसीब नही हो रही है । कितनों के घर चूल्हे नहीं जल रहै हैं । इधर उधर से दानपुण्य का जो खाना मिल रहा है उसे ग्रहण कर रहें हैं । यह तो इंसानों की बात हुई पर इंसानों के साथ उनके जो घरेलू जानवर होते हैं उनकी भी मुसीबत रहती है । लॉक डाउन में उनको भी चारा पानी नहीं मिल पाता है । पैसे वाले तो अपने पैसों के बल पर अपने घर के जानवरों के लिए भी इंतजाम कर लेते हैं पर लावारिश जानवरों के लिए कौन सोचेगा । सब्जी मार्केट खुला रहता है तो इन गाय बैलों को दाना पानी मिल जाता है । फिर घर घर जूठन का अन्न खाने को मिल जाता था जो अभी प्रायः सबके दरवाजे बंद पड़े हैं । पहले लॉक डाउन में लोगों ने खूब दया धर्म किया था पर कोरोना की दूसरी लहर में ऐसे दयालुओं की कमी दिख रही है । इन गाय बैलों के भूखे मरने के दिन चल रहे हैं । न तो सरकार ध्यान दे रही है न समाज । अब अपने भूखे पेट को लेकर इन गायों ने सत्याग्रह शुरू कर दिया है । रोज रात में गांधी पुतले के नीचे ये इकट्ठा होते हैं और गांधी जी से फरियाद करते हैं कि आपके तीनों बंदर धोखेबाज निकल गए हैं । जितना बुरा हो सके देख रहें हैं और जितना बुरा सुन सके सुन रहें हैं और जितना बुरा हो सके बोल रहे हैं । गांधी बापू बताए ऐसे में हम मूक जानवरों का क्या होगा । हो सके तो इनकी आंखे खोलिए और हम भूखे जानवरों को भोजन दिलवायाईये । हम जानवरों ने किसका क्या बिगाड़ा है जिसके लिए हमें सजा दी जा रही है । लॉक डाउन में हम इंसान की तरह दो नम्बर रास्ते से खाना नहीं मांग सकते । न ही हमें कोई होम डिलवरी की सुविधा है । हमारे भी छोटे छोटे बछरू हैं जो तीन तीन हफ्ते से भूखे हैं । हमारा कोई सुनने वाला नही है । बापू हम थक हार कर आपके पुतले के नीचे सत्याग्रह कर रहें हैं । उम्मीद करते हैं आप न्याय दिलाओगे । यहां इंसानियत तो मर गई है पर आप कम से कम आंख बंद नहीं करोगे । आपकी एक आवाज में जादू है । यह तो गलत हुआ कि राज नेताओं ने आपके रहते कोरोना को नहीं आने दिया । आपके प्रभाव को सब जानते थे । कहीं आप कोरोना को एकाध लाठी जड़ देते तो षड्यंत्रकारियों और मुनाफाखोरों का बहुत बड़ा नुकसान हो जाता । उनको ब्लेक में रेमडिसिवर और बेड बेचने का मौका नही मिलता । बापू आपके जाने के बाद देखो क्या दिन आ गए हैं । लोग अपनी इंसानियत बेच रहें हैं । मानवीयता गिरवी रख दी गई है । लाशों को कंधा देने का मनमानी पैसा मांग रहें हैं ।अंतिम संस्कार के लिए मुर्दों का लाइन लगवाया जा रहा है । अग्नि संस्कार पैसे देकर भी नही कर रहे है । दूसरे लाश के साथ ही जला दे रहें हैं । क्रियाकर्म के लिए अस्थि अब गंगा ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ रही है । दशगात्र तेरहवीं सब खत्म हो चुका है । कोई किसी के यहां न आता है न जाता है । अब अस्पताल से ही भूल जाते हैं कौन किसका मा बाप भाई बहन है । अस्पताल के चौखट से ही रिश्तेदारी समाप्त हो जाती है । बापू आपको और क्या कहानी बताये । आप तो मौन साध लिए हो । यहां जनता बहुत दुखी हैं जिन डॉक्टरों को आप भगवान कहते थे वे अपने अस्पतालों में कोरोना के नाम पर लोगों को निचोड़ रहें हैं । हम पशुओं को तो पैरा भी नहीं मिल रहा है और ये डॉक्टर लोग एक एक मरीज के पीछे 2 लाख से 10 लाख तक बिल बना रहे हैं । ये हमारे चारा की बोरी में पैसा भर भर रख रहें हैं । पर इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा है । इनको भगवान कहते थे पर ये शैतानों के शैतान निकले । मालूम बापू 900 रुपये के रेमडिसिवर इंजेक्शन को 20-20 हजार में बेच रहे हैं । डेडबॉडी को अस्पताल में एक रात रखने का 2500 ले रहे है । बापू इनको तो भगवान का भी डर नहीं है फिर आपका क्या कहें । कोरोना को महामारी का नाम देकर जितना लूटते बन रहा है लूट रहें हैं । अब इनको किसी जन्म में ऐसी तिजोरी भरने वाली बीमारी नहीं मिलेगी । बापू अभी एक माह लॉक डाउन होने जा रहा है अभी इनकी कमाई पूरी नहीं हुई है । लाकडाउन अभी और बढ़ेगा तब तक तो हम जानवरों की खैरियत ही नहीं रहेगी । बापू अब आपके चुप रहने से काम नहीं चलेगा । कोई आएगा और आपकी लाठी से ही हमे मार भगाएगा। ये लोग हमारा सत्याग्रह तुड़वाना चाहते हैं । यह बहुत अन्याय है बापू । हम लोग कोई रुपया पैसा या कर्ज माफ करने नहीं कह रहे हैं । हम लोग तो पैरा घासफूस ही मांग रहे है । ये लोग तो लॉक डाउन में भी घी खा रहे हैं । हम लोग तो सिर्फ बच्चों का जूठन मांग रहें हैं । बापू अब तो भगवान का भी सहारा नहीं दिख रहा है । आप ही एक सहारे हो । इनको ज्ञान दो बापू हम पशुओं को लॉक डाउन में कम से कम एम टाइम पैरा तो दे दो । अगर यह भी नहीं करेंगे तो हमारे बछरू यह पीढी क्या आने वाली पीढ़ी को भी माफ नहीं करंगे। हम गायों को भूखे मारकर बापू कोई स्वर्ग नहीं जा सकता ।आज इनको यह बात याद दिला दीजिये । बापू ,स्वर्ग का रास्ता हमारे से होकर गुजरता है ।

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