Wednesday, December 8th, 2021

छत्तीसगढ़ की नदियां सूखी , त्रिवेणी संगम में पानी नहीं, भटक रहें निस्तारी व् क्रियाकर्म वाले

रायपुर/ राजिम, न्यूज हसल इण्डिया , छत्तीसगढ़ की नदियों में अब बिलकुल भी पानी नहीं है। माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि के चलते फरवरी मार्च में ऊपर के बांधों से पानी छोड़ा गया था किन्तु अब वह भी सूख गया है। जो पानी थोड़ा बहुत यहां वहां दिख रहा है वह पूरी तरह दूषित है और पीने क्या नहाने योग्य तक नहीं है। राजिम के त्रिवेणी संगम में अस्थि विसर्जन के लिए अभी रोज सैकड़ों में लोग आ रहें हैं। अभो कोरोना महामारी में मृतकों की संख्या में इजाफा होने के कारण अस्थि विसर्जन के लिए बहुत लोग पहुँच रहें हैं। जिनके लिए आवास व् नदी में साफ जल की जरूरत है। लेकिन नदी का पानी काईयुक्त दूषित है। इससे महामारी को बढ़ने का और खतरा है। गंदे पानी से संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है। राजिम के युवा नेता , विचारक , चिंतक ,अधिवक्ता आशीष शिंदे ने बताया कि राजिम की नदी तो हर साल सूख जाती है। यहां के संगम में एनीकट बनाया गया है पर उससे भी कोई फायदा होते नहीं दीखता है। एनीकट के पानी में बहाव नहीं होने से जल्द दूषित हो जाता है। संगम का पानी नदी में सब्जी भाजी की बखरी लगाने से भी दूषित होता है लेकिन वह गरीबों की आजीविका है उसे मना नहीं किया जा सकता। प्रशासन को यह ध्यान रखने की जरूरत है की बारहो महीने कम से कम नदी में पानी का बहाव बना रहे ताकि पानी रुककर दूषित न हो। यही हाल छत्तीसगढ़ के अन्य नदियों का भी है। नदी के ऊपर कई बांध बना दिए गए हैं जिससे पानी वहीं रुक जाता है। उस पानी का उपयोग सिंचाई और कल कारखानों के लिए इसका फायदा उद्योगपतियों को मिलता है। पर गरीबन के हक में केवल दूषित जल ही मिलता है। यहां के जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस और अनेक बार आकर्षित किया गया है किन्तु उनकी भूमिका वोट बैंक तक आकर सिमट जाती है। इस बार रामनवमी का जवारा विसर्जन भी सूखी नदी में दूषित जल में करना पड़ा। यह स्थिति प्रायः हर साल रहती है।

 

 

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