Tuesday, June 22nd, 2021

RAJIV GANDHI DEATH ANNIVERSARY : विश्व इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे राजीवगांधी , आधुनिक भारत उनकी देन

RAJIV GANDHI DEATH ANNIVERSARY : विश्व इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे राजीवगांधी , आधुनिक भारत उनकी देन

राजीव गांधी (RAJEEV GANDHI) देश के चमकते सितारे में से थे। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। बाकी थे। वे नेहरू परिवार के ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने आजादी के आंदोलन को नहीं देखा था।

जबकि उनके परिवार में पंडित जवाहरलाल नेहरू , उनकी बेटी इंदिरा गाँधी आजादी के आंदोलन में शामिल थे । नाना पंडित जवाहरलाल नेहरूराजीव गाँधी के जन्म के समय अपनी 9वीं और अंतिम जेल यात्रा पर थे।

उनकी मां इंदिरा गांधी 15 महीने पहले ही जेल सेरिहा हुई थी। पिता फिरोज गांधी सिर्फ एक वर्ष पहले ही जेल से छूटे थे।शिक्षा और काम : कैम्ब्रिज में किये।

वे चुपचाप अपना काम करते रहे पता नहीं चलता था कि वे प्रधानमंत्री के पुत्र हैं। एक बार तो जानकारी लेने पर उन्हें यह बताना पड़ा था कि महात्मा गांधी से उनका कोई रिश्ता नहीं है।

बिना यह बताए कि वे पंडित नेहरू के नाती हैं।दूसरे छात्रों की तरह पैसों की तंगी से संघर्ष करना पड़ जाता था। पैसों की तंगी के चलते छुट्टियों के दौरान उन्हें फल चुनने, आइस्क्रीम बेचने, ट्रक लोड करवाने तथा बेकरी जैसी जगह पर रात्रिकालीन काम करना पड़ जाता था।

RAJEEV GANDHI DEATH ANNIVERSARY

इंदिरा गांधी के पुत्र और पं. जवाहरलाल नेहरू के नाती होने के राजीव गाँधी का पालन-पोषण सत्ता के प्रभामंडलके साये में हुआ। इसलिए उनको हमेशा राजनीतियों और वैदेशिक कूटनीतिज्ञों को करीब से देखने का अवसर मिलता रहा।

उनकी खासियत थी की कभी उन्होंने खुद को सत्ता के आसपास आने की कल्पना तक नहीं की थी, लेकिन छोटे भाई संजय गांधी की मृत्यु के बाद अपनी मां इंदिरा गांधी को राजनीतिक सहारा देने के लिए उन्हें अनिच्छा से भारतीय राजनीति में आना पड़ा।

फिर एक दिन ऐसा भी आया कि मां की मृत्यु के बाद उन्हें खुद प्रधानमंत्री का पद स्वीकार करना पड़ा। जब वे प्रधानमंत्री बने तब किसी ने कल्पना नहीं की थी की वे एक कुशल प्रधानमंत्री के रूप में उभरेंगे।

बल्कि उन्होंने समाज के सभी वर्गों के लोगों को अत्यधिक प्रभावित किया था। इस राजनीतिक सफलता-कुशलता का कारण राजीव गांधी को अपने पिता फिरोज गांधी से ‘अपना काम खुद करो’ का रास्ता मिला था जो उनके जीवन का प्रेरणा बन गया।

उन्होंने अपने नाना पंडित नेहरू से ‘आराम हराम है’ तथा पिता फिरोज गांधी ने ‘श्रम की महत्ता’ की प्रेरणा मिली थी। अपने पिता से ही उन्होंने पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत का शौक पाया था जबकि इंदिरा गाँधी का सोचना था कि नेहरूपरिवार संगीत प्रेमी नहीं होते हैं।

राजीव गाँधी ने 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली जब उनकी मन की उनके सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी । इंदिरा गाँधी को टीवी के लिए एक इंटरव्यू देना था।

जैसे ही वे 1, सफदरजंग रोड स्थित अपने आवास 1, अकबर रोड स्थित कार्यालय के लिए निकलीं, उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन पर गोलियां चला दीं।

इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी राजीव गाँधी के कंधे पर आ गई थी जिसकी वजह से इन्हें राजनीति में आना पड़ा था जबकि राजीव गांधी इंडियन एयरलाइंस में एक पायलट थे।

इंदिराजी की हत्या के बाद जब प्रथम बार राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो वे विश्व के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। 1984 में ही वे इंका अध्यक्ष बने।

उसी दिन राजीव गांधी ने रेडियो और टेलीविजन पर राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि- ‘एक साथ मिलकर हमें एक ऐसा भारत बनाना है जो 21वीं सदी का आधुनिक भारत बने।’ जिस आधुनिक भारत का लोहा आज पूरी दुनिया मान रही है। वह राजीव गांधी की ही देन है।

RAJEEV GANDHI DEATH ANNIVERSARY

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