Wednesday, December 8th, 2021

राम नाम के जपने से हो जाएंगे सारे काम ,जय श्री राम, जय श्री राम, दो अक्षर का प्यारा नाम

रायपुर,(प्रियंका घाटगे,न्यूज़ हसल इंडिया))
भारतीय संस्कृति में राम नवमी का बहुत अधिक महत्व है क्योंकि चैत्र पक्ष में ही चैत्र नवरात्रि से हिन्दू नववर्ष की शुरुवात होती है। इस नवरात्री की नवमी तिथी को भगवान श्री राम जी का जन्म होता है। भगवान श्री राम जी के जन्म का प्रसंग इतना अधिक पावन होता है कि उसके पठन या श्रवण मात्र से ही मनुष्यों को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। अयोध्या जैसी पवित्र नगरी में राजा दशरथ हुआ करते थे। जिन्हें भगवान की कृपा से अपने राज्य में सभी भौतिक सुख प्राप्त थे। पत्नियां भी इतनी कुशल मिली थी कि वे भी पतिव्रत धर्म का पालन करती थी। राजा के पास अथाह धन दौलत होने के बाद भी पुत्र सुख नहीं था। जिसके विषय में बात करने के लिए वे पाने के लिए वे अपने गुरु वशिष्ट के पास गए। जहां गुरु वशिष्ट ने बताया कि तुम्हारे भाग्य चार सुन्दर पुत्रों का योग है। ये चारों पुत्र बहुत गुणवान और धर्म की रक्षा करने वाले और कर्तव्य परायण होंगे। ये सदैव ही अपनी प्रजा की रक्षा के लिए ततपर रहेंगे। इसके लिए गुरु वशिष्ट जी ने श्रृंगी ऋषी को बुलवाकर राजा दशरथ की कामना को पूरा करने के लिए पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया। जिसके फलस्वरूप राजा दशरथ और उनकी पत्नियों को जिसमें माता कौशल्या, माता सुमित्रा तथा माता कैकेई को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। जिनका राम, लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न रखा गया। इन पुत्रों के आगमन पर समस्त अयोध्यपुरी ऐसे लग रही थी मानों वहां दीपावली मन रही हो। भगवान राम के जन्म का समय दोपहर 12 बजे था। उस समय सभी देव अपने- अपने विमान पर भगवान के दर्शन के लिए आ गए थे और उनके एक मात्र दर्शन के लिए लालायित थे। जैसी ही प्रभु राम का जन्म हुआ। भगवान सूर्य भी कुछ समय के लिए एक जगह पर अपने रथ में थम से गए थे। चन्द्रमा भी एक ही जगह पर रुक गया था सभी ग्रह कुछ देर के लिए भगवान राम के दर्शन के लिए रुक गए थे। ऐसा लग रहा था जैसी पूरी दुनिया थम सी गई हो। पुरे अयोध्या में राजा दशरथ ने हितकारी कृपालु और दीनदयाल प्रभु के प्रकट होने की ख़ुशी पुरे प्रजा को बारे और सभी प्रजा को ढेर सारे हीरे, मोती और रत्न जड़ित आभूषण न्यौछावर देकर सभी को प्रसन्न किया। माता कौशल्या ने भी जब राम को देखा तो वह मातृ सुख में खो गई। भगवान ने ऐसी लीलाए दिखाई कि माता भी अचम्भित रह गई। एक बार माता कौशल्या भगवान को भोग लगाने जा रही थी। तब उन्होंने देखा को भगवान राम उस भोग को खा रहे हैं।

उसके बाद भगवान के कक्ष में रोने की आवाज सुनाई दी तब भी माता कौशल्या को वहां भी भगवान राम दिखे। तब माता ने भगवान से कहा यह क्या हो रहा है ? तब भगवान ने अपना असली रूप अपनी माता को दिखाया वह अपने हाथों में शंख, चक्र और गदा और पद्म लेकर चतुर्भुज रूप में अपनी माता के सामने प्रकट हुए। तब माता ने उन्हें प्रणाम कर कहा हे प्रभु आप मेरी गोद में आए है तो मुझे बाल लीला का सुख दीजिये और मुझे मातृत्व सुख प्रदान कीजिए। फिर अयोध्या महल में चार पुत्रों के नन्हें- नन्हें कदम की किलकारियों से पुरे अयोध्या में ख़ुशी का माहौल उत्पन्न हुआ। भगवान हनुमान सदैव ही राम भक्त रहे है और वे राम के हृदय में निवास करते है। इसलिए यह भी कहा जाता है कि भगवान् हनुमान से कोई विनती या प्रार्थना करनी हो तो उनके सामने भगवान राम का नाम लेना चाहिए क्योंकि भगवान राम का नाम लेने पर भक्तों के सभी कार्य पुरे होते है। भगवान् हनुमान ही एक ऐसे देव है जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है। भगवान राम ने बड़े होने पर माता सीता संग विवाह कर बहुत ही प्रेम पूर्वक अपना पति धर्म निभाया और माता सीता ने भी महल का सुख छोड़कर वन में भी भगवान राम के संग अपना विवाहित जीवन को पुरे पतिव्रतधर्म के साथ निभाती भी रही। समय आने पर उन्होंने अपने पवित्रता के लिए अग्नि परीक्षा भी दी है। जिससे उन्होंने दिखा दिया कि स्त्री कमजोर नहीं होती है। वह सदैव से ही शक्ति का प्रतीक रही है। समय आने पर वह हमेशा ही हर रण में विजयी रही है। भगवान राम के साथ उनके भ्राता लक्ष्मण भी उनके वन में साथ रहकर अपने भाई को प्राणों से भी प्रिय मानते हुए भगवान राम की निःस्वार्थ भाव से सेवा की है। उन्होंने भी अपने गृहस्थ जीवन में विरह की अग्नि को सहकर अपने भाई का साथ देकर दिखा दिया कि प्रेम की शक्ति से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती है। प्रेम ही ईश्वर है। प्रेम ही मोक्ष का द्वार है। इसी तरह भरत और शत्रुघ्न ने भी अपने राम को ही भगवान माना है। राम ने रावण का वध किया और उसे मोक्ष दिया। रावण को अंत में राम नाम से ही मोक्ष की प्राप्ति हुई है। राम नाम में इतनी शक्ति होती है कि बड़े से बड़ा संकट भी आये तो राम नाम से ही वह टल जाता है क्योंकि राम ही तीनों लोकों के स्वामी है। वे ही अपनी माता की आज्ञा पर अयोध्या को त्याग कर वन गए थे और कठीन जीवन जीकर भी उन्होंने धैर्य और सादगी के साथ जीवन जीया है। जिसके कारण उन्हें मर्यादा पुरषोत्तम भी कहा गया है। भगवान राम का ननिहाल छत्तीसगढ़ को कहा जाता है। रायपुर में दूधाधारी मंदिर भगवान राम का बहुत ही प्राचीन मंदिर है जो लगभग 300 से 400 वर्ष प्राचीन है। इसके अलावा वीआईपी रोड पर भी श्रीराम का भव्य मंदिर बनवाया गया है। छत्तीसगढ़ को भगवान् राम का ननिहाल कहा जाता है इसलिए यहां मामा अपने भांजे को पैर नहीं सपर्श करवाते है क्योंकि उनमे वे भगवान राम का रूप मानते हैं। राम नवमी की इस पवित्र तिथी पर अयोधया नगरी में अत्यंत सुन्दर आलोकित भगवान राम का दरबार वहां के भक्तों को सदैव ही भगवान राम के होने का अहसास हमेशा ही करवाते रहेगा।

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