Wednesday, December 8th, 2021

कोरोना निगल गया रामनवमी का उत्सव , वीरान सड़कें याद दिलाते रही पुराने दिन

रायपुर,न्यूज हसल इंडिया, यह छत्तीसगढ़ की राजधानी बूढ़ातालाब का किनारा है । इस सड़क पर आज राम नवमी के दिन गुजरना मुश्किल होता था यहां पर सुबह से लगातार सैकड़ों ज्योत जवारा विसर्जन का जुलूस शाम तक चलता रहता था और ट्रैफिक पुलिस लोगों को रास्ता डायवर्ड कर आवागमन कराती थी । आज कोरोना केवल केवल आदमी की जान नहीं ले रहा है वह देश की धार्मिक व सामाजिक संस्कृति को भी सफाया कर रही है । बूढ़ातालाब किनारे की यह सड़क जहां रामनवमी में दो दिन गुजरना मुश्किल रहता था बिल्कुल सुनसान पड़ी हुई है । इक्का दुक्के बिरले कोई आ जा रहें हैं । राजधानी रायपुर में कोरोना संक्रमण के तेजी से होते फैलाव के चलते 9 अप्रेल से लॉकडाउन लगा हुआ है । यहां मन्दिर देवालय सब बन्द है । मन्दिर के पुजारी लोग ही भगवान का पूजापाठ करके रामजन्मोत्सव मनाए हैं । कहीं ज्योत जवारा मनोकामना ज्योति कलश नहीं जलाई गई । केवल एक मुख्य ज्योति कलश की स्थापना कर दी गई थी। यहां रायपुर के प्राचीन महामाया मंदिर में करीब 5 हजार मनोकामना ज्योत जलाए जाते थे ।वह रद्द कर दिया गया । इसी तरह बंजारी धाम मन्दिर, काली मन्दिर में भी बड़ी संख्या में ज्योति प्रज्वलित की जाती थी जो इस साल रद्द की गई । लोग लॉक डाउन के चलते किसी मन्दिर देवालय में पूजा अर्चना करने नही जा सके । घर के पास पेड़ के नीचे चौक चौराहों वाले छोटे मन्दिर पर भी कोरोना की दहशत से नहीं जा रहें हैं । सारे छोटे मन्दिर भी सुनसान पड़े हुए हैं । डोंगरगढ़ की बम्लेश्वरी मन्दिर में तो 9 दिन का भव्य मेला ही लगता था । और वह 50 हजार ज्योत से जगमगाता था ,इसी तरह दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी देवी मंदिर, रतनपुर की महामाया मन्दिर , घटारानी जतमई में बड़ी संख्या में लोग मनोकामना ज्योत जलाते थे । वहां भी ग्रहण लगा हुआ है । प्रयागराज राजिम में राजीवलीचन मन्दिर में रामजन्मोत्सव की धूम अयोध्या जैसी होती है पर कोविड की वजह से भगवान के भी सारे उत्सव सिमट गए हैं और रद्द भी हो गए हैं ।

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