Friday, July 30th, 2021

SAMBHAJI MAHARAJ JAYANTI 2021: महान मराठा प्रशासक संभाजी भोसले की 364 वीं जयंती पर विशेष

रायपुर(न्यूज़ हसल इंडिया),
मराठों का इतिहास हमेशा से ही गौरवशाली रहा है। मराठों में महाराज वीर छत्रपति शिवाजी ने योद्धा एवं कुशल प्रशासक के रूप में बहुत ही सकारात्मक बनाई थी। शिवाजी का जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी, पुणे में हुआ था। वे शाहजी भोसले और जीजाबाई के पुत्र थे। माता जीजाबाई ने उन्हें शुरू से ही बहुत ही संस्कारवान तथा गुणी बनाया था। जिसके कारण वे काफी निडर और देशभक्ति के गुणों से भरपूर थे। उन्होंने मुगलों की सेना के छक्के छुड़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शिवाजी माता तुलजाभवानी के भक्त थे। इन्होने तोरणा में प्रथम विजय हासिल कर उस राज्य में सर्वप्रथम पहले कब्ज़ा किया। इसके अलावा इन्हीं के सेना के नेतृत्व में कोंडाणा किले में विजय हासिल किया गया। जिसमें तानाजी मालसुरे की मृत्यु हो गई। इसी तानाजी के ऊपर बनाई गई फ़िल्म तानाजी भी बनाया गया था। जिसे लोगों ने खूब सराहा था। शिवाजी के जीवन काल में जीवनसंगीनी बनकर साईबाई, सोयाराबाई, पुतलाबाई, सकवरबाई, लक्ष्मीबाई, काशीबाई आई।इनमें से शिवाजी के संतान में संभाजी , राजाराम, सखुबाई निम्बालकर, रणुबाई जाधव, अंबिकाबाई महादिक, राजकुमारबाई शिर्के संतान थे। जिनमे से सबसे बड़े तथा पहली पत्नी साईबाई के पुत्र थे- संभाजी भोसले। जिनका जन्म जन्म 14 मई 1657 को पुरन्दर दुर्ग में हुआ था। यह मराठा शासक वीर छत्रपति महाराज शिवाजी और साईबाई के पुत्र थे। दुर्भाग्य से बचपन में ही इनकी माता का देहावसान हो गया। जिसके बाद इनकी दादी जीजाबाई ने बड़े ही प्यार और दुलार से इनका पालनपोषण किया था। ये कला के बड़े ही पुजारी थे। जिसके कारण इन्हे संस्कृत के अच्छे जानकर तथा वीर योद्धा भी बने थे। 6 जून 1674 को इन्हें मराठा साम्राज्य के दूसरा राजकुमार के रूप में

ज्याभिषेक कर दिया गया था। संभाजी के पत्नी के नाम जीवजीबाई था परन्तु मराठों के धर्मानुसार उन्होंने अपना नाम यसूबाई लिया था। राजकुमार बनाकर इन्होने अपनी बहादुरी की प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि सभी के दिल जीतने में कामयाब रहे। इन्होने बहुत ही छोटी उम्र महज 16 वर्ष की उम्र में रामनगर के प्रथम युद्ध में विजय पताका लहराया। इनकी अच्छी बहादुरी के गुणों के कारण ही इन्हें बचपन में छवा बोलकर बुलाया जाता था जिसके मतलब होता है शेर के पुत्र।संभाजी में काफी कुशल गुणों के कारण उन्होंने बुलेट प्रूफ जैकेट तथा तोपों का भी निर्माण किया था। शिवजी की मृत्यु के समय संभाजी को पन्हाला जिले में कैद कर रख लिया गया था और इस समय उनकी सौतेली मां सोरबाई ने फायदा उठाते हुए अपने पुत्र राजाराम को मराठा राज्य को सौंप दिया था जब संभाजी को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने अपने बहुत से सैनिकों के साथ उस जगह पर आक्रमण कर पन्हाला जिले में भी अपने राज्य की स्थापना करने में कामयाब रहे। संभाजी की मृत्यु 11 मार्च 1689 को तुलापुर, पुणे में औरंगजेब द्वारा अत्यंत ही क्रूर हत्या के कारण हुई थी। वे अपनी अंतिम सांस तक हिन्दू धर्म के समर्थक रहे थे।संभाजी महाराज की जयंती महाराष्ट्र में बहुत ही हर्षोलास के साथ मनाई जाती है। इस वर्ष महाराष्ट्र में कोरोना के चलते लॉक डाउन है परन्तु फिर भी वहां के सत्ताधारी नेताओं ने जिनमें प्रकाश जावड़ेकर एवं शिवसेना पार्टी तथा अन्य सभी नेताओं ने उन्हें याद कर उन श्रद्धांजलि दिया है। इस महान वीर योद्धा संभाजी भोसले को उनेक बड़े बलिदान तथा वीरता के इतिहास के कारण समस्त मराठा समाज भी आज के दिन सभी राज्यों में याद कर उन्हें नमन करता है और श्रद्धांजली देता है।

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