Tuesday, September 21st, 2021

Shivaji Maharaj Rajyabhishek : 6 जून 1674 शिवराज्याभिषेक: स्वतंत्रता का जयघोष -शिवाजी पाटिल


आज हमे संसदीय लोकशाहीमें संविधानसे प्राप्त हक अधिकार हैं. जिससे हम देशका राष्ट्रपती,प्रधानमंत्री चुनते है.पर मध्ययुगीन इतिहासमें यह परिस्थिती नहीं थी.किसानमजदूरमहिलाओंको राज्याभिषेक,राजाबनना,बनाना, नेतृत्वकरना यह धारणा सपना देशी धर्मपंडित और बाहरी आक्रांताओके गठबंधनके कारण तकरीबन ६००वर्ष असंभव बन चुकी थी.विशेषत:श्रमिक मजदूर किसान पूर्वकी अस्पृश्य जातींयोंके लिए मेहनत लढनेकेशिवाय किसी भी तरह के लीडरशीपका सपने देखने पर पाबंदी थी.ऐसी विषम स्थितीमें छत्रपती शिवाजी महाराज राज्याभिषेक करते है,
यह एक महान क्रांतिकारक, ऐतिहासिक उम्मीद-आत्मबल बढानेवाली और प्रेरणादायक घटना थी.राज्याभिषेक,श्रमिकहताश,पिडीत भारतीयोंमें नवचैतन्य देनेवाली घटना थी.आजबाजू ८ सत्ता मोगल,आदिलशहा,पोर्तुगीज,इंग्रज, कुतुबशहा डच,फ्रांसीस,निजामशाह का राज्य.राजा,राजकार्यपर संगठीत होने पर पाबंदी थी.

सार्वभौम अधिकारवाला राजा बनकर भारतीयोंमें स्वराज्य निर्माणकी आत्मलालसा निर्माणकरनेका सफल प्रयास एक किसान पुत्र छत्रपती शिवराय महाराजने किया.समकालीन कृष्णाजी अनंतसभासद लिखता है ये मराठा पातशहा एक छत्रपती बना यह कोई सामान्य घटना नही.अर्थात शिवराज्याभिषेक यह घटनाप्रसंग असामान्य है.
ईस प्रसंगको साकार करनेके पिछे जो दृढसंकल्पयोध्दा थे.वह रणमर्दाणी थे, वह छत्रपती शिवराय की गुरूमाता स्वराज्यसंकल्पिता राष्ट्रमाता जिजाऊ,स्वराज्यसंकल्पक महाराज शहाजीराजे भोसले थे.भारतीयोंको खोया वजूद वापिस लौटानेवाले शिव-गिरीजा थे.भारतीयोंके प्रखर स्वाभिमानके केंद्रीय प्रेरक है.
तत्कालीन परिस्थिती में उत्तरसे दक्षिण पश्र्चिम से पूरबतक सबकेपास ढाल तलवारे थी पर किसी के पास स्वयंका स्वतंत्र वजूद नहीं था. उसके शिवाय हजारो जातबिरादरीयोंको एक भारतीयतामें एक धागे में पिरोनेवाला स्वराज्य नहीं था, ना वह कोई बना पाया. वंशपरंपरागत रजवाडोंकी कोई कमी भी नहीं थी. एक नया भारत का स्वराज्य जो एकसाथ कई मिशन पर काम किया. भारतनिर्माणका संक्षिप्तमें कार्य विवरण :-
६शतकतक-दबे कुचले हताश नाउमेद वजूदके साथ सबकुछ खोये हुये वर्ग में आत्मबल स्वतंत्रता स्वराज्यप्रेम,अपनादेश अपनाराजा होना चाहिए यह स्वाभिमानकी लालसा जगाकर सामान्य भारतीयोंका स्वराज्य, 2रे शेकडो जातीयोंको जोडकर जातीनिर्मूलनकेसाथ नया‌समाज बनाया”मावला”, सबको मराठा पहचान देकर हिन हताश मानसिकता से बाहर निकाला, 3रा किसानश्रमिको को नया धर्म दिशा दिया.
४था भारतीयोंको नयी कालगणना थी, शिवशक, ५वा-नियमित बाहरी गुलामीसे देशी भाषाओंपर असर पडा था, ईसलिए भारतीय भाषाकोष बनाया, ६वा-भारतीयोंको स्वयंकी मुद्रा दी-होन,आजका मूल्य १होन मतलब ४००रूपये.७वा महिलाओंको शस्रशास्रका अधिकार देकर राजमुद्रा राजदंड धारणाधिकार,७वा बहुभाषिकता प्राधान्य
९वा भारतीयोंको जलसेना-Navy force दी. १०वा गुरीला युद्धनीती दी. ११वा पारंपारिक हथियारोंका आधुनिक विकल्प दिया, ११वा शत्रूकी उंचाई सारखी लंबाई के मुकाबले नये अवजार खोजे, १२वा. जमीन मापण और सरल राजस्व नियम, १३वा प्रत्यक्ष उपजपर टैक्स,आयात पर जादा टैक्स,देशी उद्यमशीलता को बढावा १०वा शत्रूकी शक्ती संख्याबलके बजाए वैचारिक स्थिरता एकता, ११वा वैदिकोने भारयीयोंपर लगाई सप्तसिंधुबंदी तोडकर आम भारतीयोंको शस्रशास्र धारणका अधिकार, १२वा दुनियाका अनोखा राजा जो शस्रशास्रविशेषज्ञ,जलतज्ञ, वास्तूरचकार,कृषी विशेषज्ञ,जमीन और राजस्व विशेषज्ञ,प्रखर सामाजिक सुधारवादी, १३वा.धर्म सुधारवादी, प्रगतीशील विचारक, १४वा.शिवरायकी सुधारवादी नीती के कारण कमेरा (SCSTOBC)समाज को स्वतंत्रता शास्रशस्र धारण का, राज्य का अधिकारी,किल्लेदार नंबरदार जमीनदार बनने का अवसर मिला.

रवींद्रनाथ टागोर जी को जपानमें प्रश्न पुछा गया की भारती की एक लाईन में पहचान बताओ, तब वह जबाब दिये,की तथागत बुध्दकी करूणा और छत्रपती शिवराय महाराज की समतावादी प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था.तथागतका समय राजनीतिक नजरियेसे सुरक्षित था.राजपूत्रके नाते और उनकी वैचारिक प्रतिभाके कारण संसाधनभी समयसमयपर स्थानियस्तरपर मिले गये. धर्मव्यवस्थाका सिवा हसला करने का साहस तथागत पर नहीं हुआ. पर शिवराय पर बाहरी ८ शत्रूओंकेसाथ धर्मव्यवस्थाका सिधा हमला दिखाई देता है. शिवाजी महाराज की स्थिती बिलकुल विपरित थी.

८शत्रूओंके राजकाज संसाधन की नजरियेसे शिवराय संसाधन व शक्तीसंतुलनमे शून्य. हताश पीडित नाउमेद समाज में विचार ज्वाला बनाकर सेना बनाना साथ में प्रचंड धन अभाव की स्थिती, कोई वंशपरंपरागत प्रभावशक्ती नहीं ऐसी विपरित स्थितीमें शिवराय ने आमजनमें अस्मिता स्वाभिमानकी स्वराज्य समजाकर जान मालकी संपदा की स्रीप्रतिष्ठा रक्षा का एक नया विश्र्वास जगाकर एक जन विश्र्वास की शक्ती बनाई और स्वतंत्रताका संग्राम छेडा. यह केवल स्वराज्य स्वतंत्रताका राजनैतिक युध्द नहीं था,यह मानवमुक्तीका जातिनिर्मूलन एक राष्ट्रीय संग्राम था.सामाजिक धार्मिक राजनितिक सांस्कृतिक आर्थिक आजादीका आंदोलन था.दुनियामें राजमहाराजे सम्राट बहुत हो गये पर छत्रपती एकही हुआ है.मानव इतिहास में सारे सम्राटोके महाराजाओंके दरबारमें महिलाओंको नृत्य पैंजण मृदुंग वाद्यके साथ नाचगानेमें ईस्तेमाल किया गया,पर दुनियाका यह एकही राजा ऐसा है जिसके दरबारमें महिला सिंहासनपर बैठकर राजकाज शौर्य पराक्रम शस्रशास्रसें संपन्न राजमुद्राधारी अधिकारी शासन‌कर्ती बनी है.वह दरबार शासन है छत्रपती शिवाजी महाराज का. ईसतरक उन्नत जीवनी का दर्शन वही हो सकता‌ है जहां की प्रेरकशक्ती एक महिला हो. शिवराय की प्रेरकशक्ती थी गुरूमाता जिजाऊ. चाणक्यसे कई कदम आगे.

छ्त्रपती शिवाजी महाराजके ३५ वर्षके शासनमें आपको सैनिक किसान महिला अनाथोंके आंखोमें कभी आंसू नहीं दिखाई दिये, ना किसीने आत्महत्या की, ना किसी संकटमें शासकके तौरपर शिवरायकी आंखोमें हताशा-आंसू दिखाई दिये.ना कोई किसान सैनिक महिलाने आत्महत्या की.स्वराज्य स्वतंत्रता समतावादी सोच के संस्कारके कारण उनका ज्ञानमहर्षी महापराक्रमी रणधुरंधर कुटनीतिज्ञ दयासागर पुत्र स्वराज्यवीर छ्त्रपती संभाजी महाराज (देडलाखसैन्य) शक्तीसंतुलनमे विषमस्थितीमें भी औरंगजेब(६लाख सैन्य)केसाथ ९वर्ष लढे अखीर औरंगजेबकी हताश जीवनीका अंतभी अहमदनगरमेंही हुआ.
स्वराज्यसंस्कारके कारण महाराणी येसूबाई साहेब का असीम त्याग, छत्रपती संभाजी महाराज का शहिदी समर्पण,छत्रपती राजाराम महाराज युध्दनीती, महाराणी ताराराणी की रणमर्दाणी शौर्यताने भारतीयोंकी मध्ययुगीन गुलामीसे स्थायी मुक्ती दिलाई है.
आज शिवराज्याभिषेक दिवसपर भारतीयोंको आत्मीय बधाई.

#शिवक्रांतिदूत कमलेश पाटील राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष मराठा सेवा संघ, दिल्ली#

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