Sunday, October 17th, 2021

T20 World Cup में ICC ने किया तगड़ा बदलाव, कप्तानों की बढ़ेगी सिरदर्दी, अंपायरों की गड़बड़ी की खुलेगी पोल!

आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप (ICC Men’s T20 World Cup) में पहली बार डिसीजन रिव्यू सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. आईसीसी ने इसे बारे में मंजूरी दे दी है. टी20 वर्ल्ड कप यूएई और ओमान में खेला जाना है और इसकी शुरुआत 17 अक्टूबर से होगी. टूर्नामेंट के लिए आईसीसी ने खेल से जुड़ी शर्तें बता दी हैं. इसके तहत पहली बार इस टूर्नामेंट में डीआरएस रहेगा. हरेक पारी के हिसाब प्रत्येक टीम को दो-दो रिव्यू मिलेंगे. आईसीसी ने जून 2020 में इस बारे में कहा था कि टी20 वर्ल्ड कप के दौरान प्रत्येक पारी में हर टीम को एक अतिरिक्त रिव्यू मिलेगा. ऐसा कोरोना के चलते कम अनुभव वाले अंपायरों की मौजूदगी को देखते हुए किया गया था. इसके बाद टी20 और वनडे में एक पारी में हरेक टीम को दो और टेस्ट में तीन रिव्यू दिए जाते हैं.

आईसीसी ने बारिश के चलते मैच में देरी होने या खलल पड़ने की समस्या को लेकर भी कदम उठाए हैं. इसके तहत न्यूनतम ओवरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है. टी20 वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज में मैच का नतीजा निकालने के लिए प्रत्येक टीम को कम से पांच ओवर बैटिंग करना जरूरी है. इसके बाद ही डकवर्थ लुइस सिस्टम से फैसला होगा. अभी टी20 क्रिकेट में यही फॉर्मूला चलता है. लेकिन वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल और फाइनल मैचों के लिए न्यूनतम ओवरों की संख्या को बढ़ा दिया गया है. इन मैचों में दोनों टीमों के कम से कम 10 ओवर खेल लेने के बाद ही मैच का नतीजा निकाला जाएगा. पिछले साल महिला टी20 वर्ल्ड कप के दौरान भी यही तरीका अपनाया गया था. तब भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल मैच में बारिश हुई थी.

5 साल बाद हो रहा है पुरुष टी20 वर्ल्ड कप

पुरुष टी20 वर्ल्ड कप करीब पांच साल बाद हो रहा है. इससे पहले 2016 में भारत में यह टूर्नामेंट खेला गया था. तब इंटरनेशनल टी20 क्रिकेट में डीआरएस इस्तेमाल नहीं होता था. इस वजह से टी20 वर्ल्ड कप में भी डीआरएस नहीं था. आईसीसी के पहले टी20 टूर्नामेंट में डीआरएस की शुरुआत 2018 से हुई थी. तब वेस्ट इंडीज में हुए महिला टी20 वर्ल्ड कप में हरेक पारी के हिसाब से एक-एक रिव्यू मिलता था. फिर 2020 के महिला वर्ल्ड कप में भी ऐसा ही हुआ था.

क्रिकेट में डीआरएस की शुरुआत अंपायरों के फैसलों में होने वाली खामियों में कमी लाने के लिए की गई थी. 2017 से इसका इस्तेमाल आईसीसी के सभी बड़े टूर्नामेंट में हो रहा है. इसके तहत अंपायर किसी फैसले को लेकर थर्ड अंपायर से मदद ले सकते हैं तो खिलाड़ी मैदानी अंपायर के किसी फैसले को चुनौती दे सकते हैं.

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