Friday, September 17th, 2021

ट्रिब्यूनल में खाली पदों पर सुनवाई: SC ने केंद्र को फटकारा, कहा- नियुक्ति की प्रक्रिया निराशाजनक, दो हफ्ते में दें जवाब

New Delhi, News NHI, ट्रिब्यूनल रिफॉर्म एक्ट 2021 की संवैधानिक वैधता और देश भर के न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों के मुद्दे पर बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने चयन समिति (SCSC) की ओर से भेजे गए नियमों को नजरअंदाज करके प्रतीक प्रतीक्षा सूची के नामों से नियुक्तियां कीं, यह बहुत ही निराशाजनक है. CJI ने कहा कि हम कानून के शासन का पालन करने वाले लोकतांत्रिक देश हैं. हम इसे स्वीकार नहीं कर सकते.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर ट्रिब्यूनल के सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए मनमुताबिक व्यक्तियों को चुनने का आरोप लगाया, जबकि सुप्रीम कोर्ट जजों की अध्यक्षता वाले चयन पैनल द्वारा पर्याप्त संख्या में नामों कि सिफारिश की गई थी. बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमणा ने कहा कि जिस तरह से केंद्र ने नियुक्तियां की हैं, उसे लेकर वह बहुत ‘नाखुश’ हैं.

केंद्र ने कहा- सरकार के पास सिफारिश के नामों को अस्वीकार करने का अधिकार

इस पर अटॉर्नी जनरल (एजे) केके वेणुगोपाल ने कहा कि केंद्र को सिफारिश में भेजे गए नामों को अस्वीकार करने का अधिकार है. एजे के जवाब पर सीजेआई एनवी रमना और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एलएन राव की पीठ ने कहा कि यह चिंताजनक है कि चयन पैनल द्वारा भेजे गए नामों, जिसमें 2 सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश और सरकार के मंत्रालयों के 2 सचिव शामिल हैं, उनका तिरस्कार करके ऐसा व्यवहार किया जा रहा है.

CJI के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि वह केंद्र को नियुक्तियों को अच्छा करने और भेजे गए नामों को अस्वीकार करने के लिए कारण बताने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान करती है. इससे पहले सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया था. बुधवार को ट्रिब्यूनल रिफॉर्म एक्ट 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश और मद्रास बार एसोसिएशन की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई बातों के लिए केंद्र को खरी-खोटी सुनाई.

सुनवाई की शुरुआत में वकील अरविंद दत्तार ने कहा कि ट्राइब्यूनल में नियुक्तियां नियम के मुताबिक नहीं है. एनसीएलटी (NATIONAL COMPANY LAW TRIBUNAL) में जस्टिस एसआई चीमा की नियुक्ति नियम के अनुरूप नहीं है. इस दौरान सीजेआई ने भी नियुक्तियों पर उठे सवाल के मद्देनजर नाराजगी जताई.

सुनवाई के दौरान सीजेआई और सरकारी पक्ष (अटॉर्नी जनरल) के तर्क और जवाब…

CJI: SCSC ने NCLAT के लिए 9 न्यायिक सदस्यों और 10 तकनीकी सदस्यों की सिफारिश की गई थी. नियुक्ति पत्र जारी किया गया था कि कैसे सदस्यों को पहले से चुना गया था और कुछ को प्रतीक्षा में रखा गया था. हम चयनित उम्मीदवारों की उपेक्षा नहीं कर सकते और प्रतीक्षा सूची में नहीं जा सकते. लेकिन यह किस प्रकार का चयन और नियुक्ति है? जस्टिस एल नागेश्वर राव ने कहा, ‘हमने यह कहा था कि एक पद के लिए दो नाम नहीं हो सकते हैं और नामों को 3 महीने के भीतर मंजूरी देनी होती है. यह धारा 3(7) है जिसे समाप्त कर दिया गया था.’

एजी: सरकार के पास की गई सिफारिशों को स्वीकार नहीं करने की शक्ति है.

CJI: आप यह नहीं कह सकते कि हम स्वीकार नहीं कर सकते.

एजी: यूपीएससी मामले में यह कहा गया था कि केंद्र इसे स्वीकार नहीं करने का फैसला कर सकता है. हमने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार काम किया है. हम मुख्य सूची को समाप्त करने के बाद प्रतीक्षा सूची में गए हैं. इस प्रकार 6 न्यायाधिकरणों के लिए कोई सिफारिश लंबित नहीं है.

जस्टिस एल नागेश्वर राव ने कहा- हमने एसजी को एससीएससी द्वारा की गई सिफारिशों के बारे में बताया. हमने कानून के अनुसार नामों की सिफारिश की थी, जिसमें एक रिक्ति पद के लिए 2 नाम थे और एक साल बाद भी अब तक कोई नियुक्ति नहीं हुई है. यह कब तक जारी रह सकता है?

एजी: मेरे पास सरकार की ओर से निर्देश हैं कि हम पुनर्विचार के लिए तैयार हैं.

जस्टिस राव: तो फिर सिफारिशों की शुचिता क्या है?

CJI: हम इस बात से बहुत नाखुश हैं कि सिफारिशों पर कैसे कार्रवाई की जा रही है. हमने एनसीएलएटी में न्यायिक सदस्यों के लिए 530 और तकनीकी के लिए 400 से अधिक उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया. इसमें से 8 न्यायिक सदस्य और उसी तरह तकनीकी सदस्य स्वीकृत हैं.

CJI: COVID के दौरान आपकी सरकार ने हमसे साक्षात्कार आयोजित करने का अनुरोध किया और हमने COVID के दौरान इतना समय बर्बाद किया. अब 5 न्यायिक सदस्यों में चुने जाते हैं और वे पहले से ही 64 और 65 वर्ष के हैं. ऐसे में उन्हें सेवा के लिए एक साल का समय मिलता है?

एजी: नहीं, कार्यकाल के लिए 67 साल है.

CJI: बहुत अधिक असंगति है.

वकील दातार: एनसीएलटी न्यायाधिकरण अधिनियम से बाहर है और मूल अधिनियम के तहत है, इसलिए कार्यकाल पहले से ही एक वर्ष है.

एजी: हम सभी गैर-स्वीकृति सूची पर पुनर्विचार करने के लिए तैयार हैं.

CJI: ITAT के साथ भी यही हुआ है.

इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने कहा कि डीआरटी और नियुक्तियों के मुद्दे पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया जाए. जिस पर सीजेआई ने सरकार को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय दे दिया.

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