Sunday, October 17th, 2021

Talaq-Ul-Sunnat: मुस्लिम समाज की तलाक उल सुन्नत प्रथा को दिल्ली हाई कोर्ट मे चुनौती, PIL के तौर पर होगी सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में तलाक-उल-सुन्नत (Talaq-Ul-Sunnat) के तहत पति द्वारा अपनी बीवी को किसी भी समय बिना कारण तलाक देने के एकाधिकार को चुनौती दी गई है. मुस्लिम महिला द्वारा दाखिल याचिका में कहा गया है कि तलाक उल सुन्नत की प्रथा मनमानी, शरिया विरोधी, असंवैधानिक, स्वेच्छाचारी और बर्बर’ है.

याचिका के मुताबिक शौहर द्वारा अपनी बीवी को किसी भी समय, बगैर बिना कारण बताए तलाक देने के अधिकार, तलाक-उल-सुन्नत देने का यह अधिकार एकतरफा और मन माना है. दरअसल 28 वर्षीय मुस्लिम महिला ने इस मामले में याचिका दायर की है. महिला नौ महीने के बच्चे की मां है

जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई की सिफारिश

उसे उसके पति ने इस साल अगस्त में तीन तलाक बोलकर छोड़ दिया था. इसके बाद महिला ने याचिका दाखिल कर मुस्लिम पति द्वारा अपनी पत्नी को किसी भी समय तलाक देने के अधिकार को स्वेच्छाचारी घोषित किए जाने की मांग की. जस्टिस रेखा पल्ली (Justice Rekha Palli) की बेंच ने पीड़ित महिला की याचिका में उठाए गए मुद्दों को देखते हुए याचिका को PIL के तौर पर सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए, याचिका को जनहित याचिका की सुनवाई करने वाली बेंच के समक्ष हस्तांतरित करने की सिफारिश की है.

23 सितंबर को होगी मामले में सुनवाई

अब हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में 23 सितंबर को होगी. अधिवक्ता बजरंग वत्स के माध्यम से दायर याचिका में तलाक-उल-सुन्नत द्वारा तलाक के संबंध में जांच और संतुलन के रूप में विस्तृत दिशा-निर्देश या संबंधित कानून की व्याख्या करने के लिए निर्देश देने की भी मांग की गई. इस आशय का एक घोषणा पत्र जारी करने की भी मांग की गई, क्योंकि मुस्लिम विवाह केवल एक अनुबंध नहीं है बल्कि एक स्टेटस है.

रिकवरेबल तलाक है तलाक उल सुन्नत

तलाक उल सुन्नत को प्रतिसंहरणीय (रिकवरेबल) तलाक भी कहा जाता है. इसके तहत एक बार में पति-पत्नि अलग नहीं हो जाते हैं. उनके बीच हमेशा समझौता होने की संभावना बनी रहती है.

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