Thursday, May 19th, 2022

Weather Alert: एमपी व छत्तीसगढ़ में हुई वर्षा, गुजरात और हिमाचल में बारिश की संभावना

नई दिल्ली। उत्तर मध्यप्रदेश के मध्य भागों में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। संबद्ध चक्रवाती परिसंचरण औसत समुद्र तल से 5.8 किमी तक फैला हुआ है। गुजरात के दक्षिणी हिस्सों पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है। एक ट्रफ रेखा गुजरात पर बने चक्रवाती परिसंचरण से लेकर गंगीय पश्चिम बंगाल तक उत्तरी मध्यप्रदेश के मध्य भागों में बने हुए चक्रवाती परिसंचरण से होकर गुजर रही है।

मानसून मानसून की रेखा भुज, उदयपुर से होते हुए मध्यप्रदेश के ऊपर बने हुए चक्रवाती हवाओं के मध्य से गुजरते हुए अंबिकापुर, झाड़सुगुड़ा, बालासोर होते हुए दक्षिण पूर्व दिशा में पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। स्काईमेट के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मध्यम से भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हुई।

पूर्वी और मध्य उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों और केरल और गंगीय पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ भागों में भारी बारिश हुई। असम, मेघालय अरुणाचल प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल, बिहार के कुछ हिस्सों, झारखंड, उत्तरी ओडिशा, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, लक्षद्वीप, हिमाचल प्रदेश और पूर्वी गुजरात और दक्षिण-पूर्व राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई।

जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, दिल्ली और एनसीआर के कुछ हिस्सों, सौराष्ट्र कच्छ, कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना और उपहिमालयी पश्चिम बंगाल के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश हुई। अगले 24 घंटों के दौरान, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

पश्चिम बंगाल, बिहार के कुछ हिस्सों, सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, मध्यप्रदेश, पूर्वी गुजरात, झारखंड के कुछ हिस्सों, दिल्ली एनसीआर और हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश संभव है। गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, सौराष्ट्र और कच्छ, दक्षिणपूर्व राजस्थान, कोंकण और गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, लक्षद्वीप और तमिलनाडु में हल्की बारिश संभव है।

सितंबर अंत तक जारी रहेगी वर्षा : देश में इस वर्ष मॉनसून लंबे समय तक बना रह सकता हैं, क्योंकि सितंबर के अंत तक उत्तर भारत में बारिश में कमी आने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून उत्तर पश्चिम भारत से तभी वापस होता है जब लगातार पांच दिनों तक इलाके में बारिश नहीं होती है। निचले क्षोभ मंडल में चक्रवात रोधी वायु का निर्माण होता है और आर्द्रता में भी काफी कमी होना आवश्यक है।

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